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बारिश से लगा खुशियों पर ग्रहण
बरेली।
Updated Sat, 30 Sep 2017 01:34 AM IST
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मानसून की आखिरी तीन दिन की बारिश ने किसानों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। पहले से ही कर्ज में डूबकर आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे चार या छह बीघे जमीन में धान, गन्ना, दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को अपने बेटे बेटियों की शादी टालनी पड़ रही है। त्योहारों पर कपड़ा, बर्तन, सोना, चांदी या अन्य चीजों की खरीद में कटौती करनी पड़ेगी।
बिशारतगंज के गांव कंधरपुर के किसान मोरध्वज की आठ बीघे खेत में धान के साथ शिमला मिर्च को भी बारिश से भारी नुकसान पहुंचा। इसी गांव के रामसेवक की फसल भी बारिश और तेज हवाओं ने बर्बाद कर दी। सदर तहसील के मल्लपुर में रहने वाले किसान हरीशंकर, झांझनलाल, जीवनलाल, दयाराम की फसल भी खेत में बिछ गई। सदर तहसील के कलारी, अहलादपुर, तिगरा, मल्लपुर, अखा, ढका गरऊ खजुहाई गांवों में बारिश से पहले धान, गन्ना की फसल ठीक थी। फरीदपुर, नवाबगंज और बहेड़ी के किसान उम्मीद लगाए थे कि धान और गन्ने की फसल का उत्पादन पिछले साल से अच्छा होगा। बेचने पर पुराना कर्ज निपट जाएगा और दशहरा, धनतेरस, दिवाली, भइया दूज जैसे त्योहारों पर घरेलू चीजों की खरीददारी भी कर लेंगे। तमाम किसानों ने बेहतर धान गन्ना होने पर अपने बेटे और बेटियों की शादी इसी साल करने की योजना बना ली थी लेकिन उनकी उम्मीद धुल गईं। खरीफ फसलों के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी की कमी की आशंका से किसान परेशान हैं। फसल उत्पादन का असर कपड़ा, बर्तन, सराफा के अलावा रियल एस्टेट के कारोबार पर पड़ने की आशंका है। नोटबंदी और जीएसटी के बाद यह बाजार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहे हैं।
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