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UP: अनदेखी का शिकार मुगलिया दौर का निगरानी टावर, दरक रहा पुल छिंगा मोदी दरवाजा; ये तस्वीर कर देगी हैरान
Mon, 03 Aug 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:04 AM IST
सार
आगरा में करीब 300 साल पुराना पुल छिंगा मोदी दरवाजा संरक्षण के अभाव और अतिक्रमण के चलते जर्जर हो रहा है। कभी शहर की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा यह दरवाजा अब दूर से भी नजर नहीं आता और इसकी बादशाही ईंटें व प्लास्टर टूट रहे हैं।
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पुल छिंगा मोदी दरवाजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुगल काल में शहर की सुरक्षा 16 प्रमुख दरवाजों के हवाले थी। जहां से दुश्मनों पर पैनी नजर रखी जाती थी। यह सभी दरवाजे शहर की सुरक्षा दीवार से जुड़े थे। जिनमें से लोहामंडी का पुल छिंगा मोदी दरवाजा भी शामिल था,लेकिन आज अनदेखी के कारण जर्जर होता जा रहा है।
मुगल काल में 300 साल पहले मोहम्मद शाह के शासनकाल में वर्ष 1720-1730 के आसपास बनकर तैयार हुआ पुल छिंगा मोदी दरवाजा आज बदहाल है। अतिक्रमण के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजे की ऐतिहासिकता संकट में पड़ गई है। जिसकी ओर एएसआई विभाग ध्यान नही दे रहा है। विभागीय उपेक्षा के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजे की बादशाही ईंट गिरती जा रही है,जगह जगह से प्लास्टर भी उखड़ गया है।
पुल छिंगा मोदी दरवाजा की सुरक्षा दीवार गोकुलपुरा के कंस गेट से जाकर मिलती थी। लेकिन धरोहर के संरक्षण में लापरवाही के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजा आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। अतिक्रमण के कारण मुगलकाल का सुरक्षा द्वार अब दूर से नजर नही आता। पुल छिंगा मोदी दरवाजा क्षेत्र में आपसी साैहार्द का प्रतीक भी है,इसकी दीवार के एक छोर पर मंदिर और दूसरे पर मस्जिद बनी है।
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ऐतिहासिक धरोहर में विद्युत विभाग ने विद्युत उपकरण लगा रखे है,जिससे सुंदरता प्रभावित हुई है। यह दरवाजा चूना पत्थर और ककैया ईंट से बना एक खूबसूरत ढांचा है,लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी और संरक्षण की मांग के चलते खंडहर में बदलता जा रहा है। स्थानीय निवासी अमित का कहना है कि पुल छिंगा मोदी दरवाजा का रखरखाव होना चाहिए। जिससे आने वाली पीढि़यां इन धरोहरों को देख सके।
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मुगल काल में 300 साल पहले मोहम्मद शाह के शासनकाल में वर्ष 1720-1730 के आसपास बनकर तैयार हुआ पुल छिंगा मोदी दरवाजा आज बदहाल है। अतिक्रमण के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजे की ऐतिहासिकता संकट में पड़ गई है। जिसकी ओर एएसआई विभाग ध्यान नही दे रहा है। विभागीय उपेक्षा के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजे की बादशाही ईंट गिरती जा रही है,जगह जगह से प्लास्टर भी उखड़ गया है।
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पुल छिंगा मोदी दरवाजा की सुरक्षा दीवार गोकुलपुरा के कंस गेट से जाकर मिलती थी। लेकिन धरोहर के संरक्षण में लापरवाही के कारण पुल छिंगा मोदी दरवाजा आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। अतिक्रमण के कारण मुगलकाल का सुरक्षा द्वार अब दूर से नजर नही आता। पुल छिंगा मोदी दरवाजा क्षेत्र में आपसी साैहार्द का प्रतीक भी है,इसकी दीवार के एक छोर पर मंदिर और दूसरे पर मस्जिद बनी है।
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ऐतिहासिक धरोहर में विद्युत विभाग ने विद्युत उपकरण लगा रखे है,जिससे सुंदरता प्रभावित हुई है। यह दरवाजा चूना पत्थर और ककैया ईंट से बना एक खूबसूरत ढांचा है,लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी और संरक्षण की मांग के चलते खंडहर में बदलता जा रहा है। स्थानीय निवासी अमित का कहना है कि पुल छिंगा मोदी दरवाजा का रखरखाव होना चाहिए। जिससे आने वाली पीढि़यां इन धरोहरों को देख सके।