फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   500-Year-Old Lodi Mosque in Agra Nears Ruin After Decades of Neglect

UP: 500 साल पुरानी लोदी मस्जिद का 30 साल में विनाश, दो गुंबद भी ढहे; टूटी विरासत बचाने की उठी आवाज

Fri, 31 Jul 2026 11:45 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 31 Jul 2026 11:45 AM IST
सार

सिकंदरा की करीब 500 साल पुरानी लोदी मस्जिद उपेक्षा के चलते जर्जर होकर अब मिटने के कगार पर पहुंच गई है, इसके तीन में से दो गुंबद गिर चुके हैं। करीब 25 साल पहले संरक्षण की कोशिश के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ सका, अब पर्यटन से जुड़े लोगों ने ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मांग की है।

विज्ञापन
500-Year-Old Lodi Mosque in Agra Nears Ruin After Decades of Neglect
लोदी काल की मस्जिद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यह महज ईंट-पत्थरों का ढेर भर नहीं है, बल्कि 500 साल से जिंदा विरासत का कत्ल है, जमीन पर जिसकी टूटी हुई ईंटें नहीं, बल्कि इतिहास बिखरा है। 30 साल के अंदर एक-एक करके दीवारें और गुंबद दरकते चले गए और अब इसका नामोनिशां ही मिट गया। लोदी काल की पहली मस्जिद, जिसे 25 साल पहले सहेजने के प्रयास किए गए थे लेकिन परवान नहीं चढ़ सके। अब तीन में से दो गुंबद गिरने के बाद पर्यटन से जुड़े लोगों ने इसे बचाने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन


सिकंदरा में होली पब्लिक स्कूल के सामने 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद का नामोनिशान मिटने के कगार पर है। साल 2001-02 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इसकी मरम्मत के लिए अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में रखा था। उनके तबादले के बाद इसका संरक्षण ही नहीं किया गया। तब यहां तत्कालीन संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने निरीक्षण कर इस धरोहर को बचाने के लिए काम का ब्योरा भी दिया था। आईटीसी होटल ग्रुप ने इसके संरक्षण के लगे रुचि दिखाई थी।
विज्ञापन


2013 की तस्वीर में दीवारें कमजोर, दरारें बढ़ीं
13 साल पहले वर्ष 2013 की तस्वीर में लोदी मस्जिद की उपेक्षा नजर आने लगी थी। गुंबदों पर उगी झाड़ियां और कमजोर दीवारें दिखाई देने लगी थीं। दीवारों में दरारें स्पष्ट दिखने लगीं, लेकिन संरक्षण तब भी शुरू न किया गया। इस मस्जिद में साल 2010 में तीन दिन तक नमाज पढ़ने के नाम पर विवाद हुआ था। तत्कालीन सांसद के नेतृत्व में विरोध किया गया। इस पर यहां नमाज अदा करने से लोगों को रोक दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सल्तनत और मुगलकाल को जोड़ती है वास्तुकला
आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक लोदी काल की मस्जिद को बचाने की जरूरत है। 500 साल पुराने आगरा के इतिहास और सल्तनत काल से मुगलकाल को जोड़ने वाली वास्तुकला समझने के लिए उसका संरक्षण होना ही चाहिए। टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक पुरातत्व के लिए काम कर रहे एनजीओ को आगे आकर इसे बचाना चाहिए। केवल ताज और यूनेस्को धरोहरों के लिए एनजीओ योजना लाते हैं, असलियत में ऐसी धरोहर बचाने की कोशिश की जाए। गाइड एसोसिएशन के ही ताहिरउद्दीन ताहिर ने कहा कि इसे धार्मिक नजरिये से देखने की जगह सांस्कृतिक और पुरातत्व धरोहर मानते हुए बचाया जाए।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed