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UP: गाय के गोबर से बनेंगे लट्ठे, लकड़ी की जगह ईंधन का बनेंगे विकल्प; महिलाओं की बढ़ेगी आय
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 18 May 2026 11:23 AM IST
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सार
आगरा की गोशालाओं में अब गोबर से ईंधन के लट्ठे बनाने की मशीनें लगाई जाएंगी, जिससे लकड़ी की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर भी प्राप्त होगा।
गाय। स्रोत पशुपालन विभाग
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विस्तार
गोशालाओं में अब गोबर से लट्ठे बनाने की मशीनें लगने जा रही हैं। ये पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय भी बढ़ाएगी। इन लट्ठों का उपयोग घरों में खाना पकाने से लेकर श्मशान में दाह संस्कार तक में किया जा सकेगा। यह लकड़ी के ईंधन का एक अच्छा और सस्ता विकल्प बनेंगी।
जनपद में 48 गोशालाएं संचालित हैं। लट्ठे बनाने वाली पांच मशीनें आ चुकी हैं, जिन्हें जल्द ही गोशालाओं में लगाया जाएगा। अभी अन्य मशीन आना शेष हैं, जो करीब 12 गोशालाओं में लगाई जाएंगी। एनजीओ स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर इन मशीनों का संचालन करेंगे। एनजीओ समूह से जुड़ी महिलाओं को मशीन चलाने, गोबर से लट्ठे बनाने और उन्हें बाजार में बेचने तक में सहयोग करेंगे। डीसी एनएलआरएम राजन राय ने बताया कि पांच मशीनें आ चुकी हैं और उन्हें गोशालाओं में लगाया जाएगा। इनसे लकड़ी के आकार में गोबर के लट्ठे बनाए जाएंगे। इन्हें स्वयं सहायता समूह स्वयं खरीदकर भी अपना काम शुरू कर सकते हैं।
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पर्यावरण संरक्षण और लकड़ी की बचत
खाना बनाने और श्मशान में चिता जलाने के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ी का इस्तेमाल होता है। इसके लिए पेड़ों की कटाई की जाती है। गोबर के लट्ठे बाजार में उपलब्ध होने से लकड़ी की खपत कम होगी। लोगों को सस्ते दर पर ईंधन भी मिल सकेगा। इससे पेड़ों को कम काटा जाएगा और पर्यावरण को संरक्षण मिलेगा। साथ ही वर्तमान में चल रहे घरेलू गैस के संकट जैसे समय में गोबर के लट्ठे लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित होंगे। मशीन से बने इन लट्ठों का आकार लकड़ी जैसा होगा। इन्हें उपलों की तुलना में आसानी से बाजार से लाया जा सकेगा। इन्हें कम जगह में आराम से रखा जा सकता है। यह एलपीजी का एक सस्ता और सुलभ विकल्प प्रदान करेगा।
खाना बनाने और श्मशान में चिता जलाने के लिए बड़े पैमाने पर लकड़ी का इस्तेमाल होता है। इसके लिए पेड़ों की कटाई की जाती है। गोबर के लट्ठे बाजार में उपलब्ध होने से लकड़ी की खपत कम होगी। लोगों को सस्ते दर पर ईंधन भी मिल सकेगा। इससे पेड़ों को कम काटा जाएगा और पर्यावरण को संरक्षण मिलेगा। साथ ही वर्तमान में चल रहे घरेलू गैस के संकट जैसे समय में गोबर के लट्ठे लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित होंगे। मशीन से बने इन लट्ठों का आकार लकड़ी जैसा होगा। इन्हें उपलों की तुलना में आसानी से बाजार से लाया जा सकेगा। इन्हें कम जगह में आराम से रखा जा सकता है। यह एलपीजी का एक सस्ता और सुलभ विकल्प प्रदान करेगा।