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Ambedkar Jayanti: आगरा से हुआ था आंबेडकर जयंती पर छुट्टी का एलान, माला पहनाने एयरपोर्ट से लाैटे थे सीएम

अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Tue, 14 Apr 2026 03:37 PM IST
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सार

तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह आगरा में कांग्रेस के मंडलीय सम्मेलन में आए थे। उन्हें आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करना था, लेकिन उन्होंने सम्मेलन में हिस्सा लिया और बिजलीघर आए बिना एयरपोर्ट लौट गए। इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं ने तब मंडलीय सम्मेलन का मंच, गेट और कांग्रेस के झंडे जला दिए थे।
 

announcement of holiday for Ambedkar Jayanti was started from agra
अमर उजाला में प्रकाशित समाचार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आजादी के बाद से ही दलित राजनीति की प्रयोगशाला रहे आगरा में डाॅ. आंबेडकर के अनुयायियों का प्रभाव रहा है। डॉ. आंबेडकर ने आगरा को दलित आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण माना था और दो बार वह यहां आए थे। राजनीतिक प्रभाव के कारण ही 43 साल पहले 14 अप्रैल 1983 को जब प्रदेश सरकार ने डॉ. आंबेडकर जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की तो तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने आगरा को चुना। किले के सामने रामलीला मैदान में की गई सभा में डॉ. आंबेडकर जयंती पर अवकाश का एलान किया गया था।
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अमर उजाला के पुराने पन्नों में दर्ज है कि आगरा किला के सामने संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसके उद्घाटन के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति को आना था, लेकिन समाज के दो नेताओं के आपसी विवाद के कारण जब राष्ट्रपति का दौरा निरस्त हो गया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र 14 अप्रैल 1983 को आंबेडकर जयंती पर हुए समारोह में हिस्सा लेने आगरा आए थे।
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उन्होंने आंबेडकर प्रतिमा स्थापना समिति के अनुरोध पर बिजलीघर स्थित रामलीला मैदान में हुई सभा में आंबेडकर जयंती पर सभी सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थी। भीमनगरी कमेटी के अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी के मुताबिक उस दौरान राष्ट्रपति का कार्यक्रम निरस्त होने से नाराज आंबेडकर अनुयायियों का गुस्सा थामने के लिए इस एलान को जरूरी माना गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने कहा था कि बाबा साहब को समुदाय विशेष से जोड़ने की प्रवृत्ति खतरनाक है। वह पूरे देश के नेता थे।

 

सीएम ने माला नहीं पहनाई तो लगा दी आग
अमर उजाला के पुराने पन्नों के मुताबिक बिजलीघर स्थित बाबा साहब की प्रतिमा की स्थापना के चार साल बाद 28 अक्तूबर 1987 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह आगरा में कांग्रेस के मंडलीय सम्मेलन में आए थे। उन्हें आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करना था, लेकिन उन्होंने सम्मेलन में हिस्सा लिया और बिजलीघर आए बिना एयरपोर्ट लौट गए। इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं ने तब मंडलीय सम्मेलन का मंच, गेट और कांग्रेस के झंडे जला दिए। इसकी खबर मुख्यमंत्री को लगी तो वह आगरा एयरपोर्ट से वापस लौटे और बाबा साहब की प्रतिमा पर फूल मालाएं चढ़ाईं। उसके बाद ही वह एयरपोर्ट गए। तब जनता पार्टी, भाजपा समेत विरोधी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर वीर बहादुर सिंह का पूरे प्रदेश में विरोध शुरू कर दिया था।

 

गंगाजल और दूध से कराया था प्रतिमा को स्नान
तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के माल्यार्पण न करने से नाराज दलों ने आंबेडकर प्रतिमा को दूध और गंगाजल से स्नान कराकर शुद्ध किया था। 29 अक्तूबर 1987 को तत्कालीन जनता पार्टी नेता रामजीलाल सुमन, भाजपा नेता रमेश कांत लवानियां, भगवान शंकर रावत आदि ने गंगाजल और दूध से बिजलीघर स्थित प्रतिमा को स्नान कराया था। यह प्रकरण एक माह तक पूरे प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करता रहा था।

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