सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Rising Temperatures Above 35°C Threaten Vegetable Crops Farmers Face Yield Loss Risk

Heatwave Affecting Crops: गर्मी के चढ़ते पारे से सब्जियों पर संकट, घटेगा उत्पादन; किसानों को दी गई ये सलाह

देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 20 Apr 2026 11:56 AM IST
विज्ञापन
सार

बिचपुरी क्षेत्र में 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के कारण जायद फसलों पर गंभीर असर पड़ रहा है और सब्जियों के उत्पादन में गिरावट की आशंका है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सिंचाई, मल्चिंग और कीट नियंत्रण जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी है ताकि नुकसान कम किया जा सके।

Rising Temperatures Above 35°C Threaten Vegetable Crops Farmers Face Yield Loss Risk
सब्जियों की खेती - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार

 अप्रैल माह में लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय जायद (गर्मी) की फसलें अपने महत्वपूर्ण विकास चरण में हैं, लेकिन पारा 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से इन फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, यदि तापमान में जल्द गिरावट नहीं आई तो सब्जियों, दलहनी फसलों और चारे के उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है।
Trending Videos

डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि कद्दू, लौकी, तोरई, खीरा, करेला, बैंगन और टमाटर जैसी मौसमी सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण फूल झड़ने की समस्या बढ़ रही है, जिससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जो फल बन भी रहे हैं, उनका आकार छोटा और गुणवत्ता कमजोर हो रही है। 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान पहुंचने पर पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे पौधे मुरझाने लगते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. चौहान ने कहा कि टमाटर और अन्य सब्जियों में परागण प्रभावित होने से उत्पादन में गिरावट की आशंका है। साथ ही मिट्टी में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे फसलों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के कारण रस चूसक कीटों और रोगों का प्रकोप भी बढ़ रहा है, जिससे मिर्च और बेल वाली फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि जायद मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें तथा ज्वार-बाजरा जैसे चारे की फसलें भी इस तापमान से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

सुबह-शाम के समय करें हल्की सिंचाई
डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताते हैं कि किसान फसलों को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी उपाय अपनाएं। खेतों में मल्चिंग का उपयोग करें, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहे और जड़ों को गर्मी से सुरक्षा मिले। सिंचाई सुबह या शाम के समय हल्की लेकिन बार-बार करें, ताकि पानी का वाष्पीकरण कम हो। जहां संभव हो, ड्रिप या स्प्रिंकलर प्रणाली अपनाना अधिक लाभकारी रहेगा।

कीट एवं रोगों की नियमित करें निगरानी
डॉ. चौहान ने बताया कि फसलों में गर्मी के तनाव को कम करने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें। निराई-गुड़ाई कर मिट्टी की ऊपरी परत को ढीला रखें, जिससे नमी संरक्षित रहती है। साथ ही कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर उचित दवाओं का प्रयोग करें। अत्यधिक तापमान की स्थिति में समय से पहले कटाई कर नुकसान को कम किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed