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खतरे में 7 हजार साल पुरानी धरोहर: अरावली की रॉक पेंटिंग्स मिट रहीं, संरक्षण पर 6 साल से अटका फैसला
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 22 Apr 2026 12:14 PM IST
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सार
फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों में मौजूद 7 हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग्स खनन और प्राकृतिक क्षरण से तेजी से नष्ट हो रही हैं। संरक्षण का प्रस्ताव 6 साल से अटका हुआ है, जिससे यह अनमोल प्रागैतिहासिक धरोहर खतरे में है।
रॉक पेंटिंग्स
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
फतेहपुर सीकरी स्थित अरावली की पहाड़ियों में बसी प्रागैतिहासिक धरोहर के संरक्षण का फैसला 6 साल से अटका है। यहां 7000 साल पुराने शैलचित्र (रॉक पेंटिंग) हैं, जिन्हें संरक्षित करने का प्रस्ताव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वर्ष 2020 में दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय को भेजा था, लेकिन इस पर अब तक फैसला नहीं हो पाया कि यह संरक्षित होंगी या नहीं। इस बीच खनन के कारण पहाड़ों में मौजूद शैल चित्र मिट रहे हैं।
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सीकरी की पहाड़ियों में रसूलपुर, मदनपुर और बंधरोली क्षेत्र में मौजूद ये रॉक शेल्टर्स मध्य पाषाण काल के माने जाते हैं। यहां की चट्टानों पर द्वारा बनाए गए शिकार के दृश्य, नृत्य मुद्राएं और विलुप्त जीवों के चित्र मौजूद हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार, ये चित्र भीमबेटका की शैली से मेल खाते हैं। लेकिन संरक्षण के अभाव में धूप, बारिश और खनन के कारण यह खत्म हो रहे हैं।
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सिर्फ वादे और आश्वासन
संरक्षणवादी डाॅ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि साल 2019 से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तक को कई बार पत्र लिखे गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा सर्किल ने इनके सरंक्षण के लिए 2020 में प्रस्ताव एएसआई महानिदेशालय भेजा था। सात साल बीत जाने के बाद भी न इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया और न ही सहेजने के प्रयास हुए हैं।
संरक्षणवादी डाॅ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि साल 2019 से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तक को कई बार पत्र लिखे गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा सर्किल ने इनके सरंक्षण के लिए 2020 में प्रस्ताव एएसआई महानिदेशालय भेजा था। सात साल बीत जाने के बाद भी न इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया और न ही सहेजने के प्रयास हुए हैं।

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