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ऐसे बैंक कर्मचारी: युवाओं पर लुटा रहे रिटायरमेंट का पैसा, खेत में बनाई फ्री व्यायामशाला; 80 पहलवान किए तैयार
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 22 Apr 2026 12:40 PM IST
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सार
आगरा के मलपुरा क्षेत्र में रिटायर्ड बैंक कर्मचारी कुशलपाल चाहर ने अपनी जीवनभर की बचत से खेत पर मुफ्त व्यायामशाला बनाकर युवाओं को नई राह दी है। यहां 80 से ज्यादा युवा निशुल्क पहलवानी सीख रहे हैं, जिनमें कई खिलाड़ी नेशनल और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं।
कुशलपाल चाहर और पहलवानी करते बच्चे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा-ग्वालियर हाईवे स्थित गांव बाद के निवासी रिटायर्ड बैंक कर्मचारी कुशलपाल चाहर ने समाज के लिए एक मिसाल कायम की है, उन्होंने अपनी नौकरी से प्राप्त फंड और जीवनभर की बचत अपने खेत पर व्यायामशाला एवं मंदिर में लगा दी। उनका उद्देश्य स्पष्ट है-क्षेत्र के युवाओं को खेलों के माध्यम से सशक्त बनाना और उन्हें सही दिशा देना, आज उनकी व्यायामशाला में करीब 80 युवा निशुल्क पहलवानी का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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खिलाड़ियों के लिए आवश्यक उपकरण, तेल, साबुन, बादाम, किट, अखाड़ा और अन्य सुविधाएं भी वे स्वयं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई दिवंगत लोटन पहलवान, बड़े पहलवान थे उनका सपना था कि बच्चों को निशुल्क सुविधा मिलनी चाहिए। मजबूत शरीर और अनुशासित जीवन ही युवाओं को सफलता की राह पर आगे बढ़ाता है। कुशलपाल सिंह ने बताया कि यहां तैयारी करने वाले कई पहलवान नेशनल और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। व्यायामशाला के कोच राणा पहलवान ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों में भी पहलवानी को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है कई नन्हे मुन्ने पहलवान भी तैयारी कर रहे हैं।
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सुविधाओं का अभाव पर जगा रही नई उम्मीदें
इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए गांव जारूआ कटरा के निवासी रविंद्र पहलवान ने भी अपने खेत पर करीब 8 साल पहले बनखंडी नाम से व्यायामशाला तैयार की है, जिसमें दर्जनों गांव के सैकड़ों लड़के और लड़कियां पहलवानी के दांव-पेंच के गुर सीखते हैं। वह खुद एक पहलवान रह चुके हैं, रविंद्र पहलवान ने अपने संसाधनों से यह पहल शुरू की।
इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए गांव जारूआ कटरा के निवासी रविंद्र पहलवान ने भी अपने खेत पर करीब 8 साल पहले बनखंडी नाम से व्यायामशाला तैयार की है, जिसमें दर्जनों गांव के सैकड़ों लड़के और लड़कियां पहलवानी के दांव-पेंच के गुर सीखते हैं। वह खुद एक पहलवान रह चुके हैं, रविंद्र पहलवान ने अपने संसाधनों से यह पहल शुरू की।
उनका कहना है कि भले ही वे अपना सपना पूरा न कर सके, लेकिन अब वे क्षेत्र के युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए समर्पित हैं। दूर-दूर से खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं, जिनमें कई नेशनल स्तर की तैयारी कर रहे हैं। नेशनल पदक विजेता पहलवान गामिनी चाहर और सौरभ पहलवान जैसे कई पहलवान यहीं पर तैयारी कर रहे हैं। हालांकि अभी सुविधाओं का अभाव है, फिर भी इन दोनों की पहल क्षेत्र में नई उम्मीद जगा रही है। यह प्रयास न केवल खेल प्रतिभाओं को निखार रहा है, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना भी मजबूत कर रहा है।

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