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UP: जिस पिता को समझते थे बेहद शरीफ, वो निकला कुख्यात अपराधी; 42 साल बाद सच्चाई सुन बेटों का कांप गया कलेजा

संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 24 Apr 2026 12:17 PM IST
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सार

फिरोजाबाद में थाना दक्षिण पुलिस ने 42 साल से फरार चल रहे वारंटी रतन उर्फ रतना को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। पहचान छिपाकर साधारण जीवन जी रहे आरोपी को सादे लिबास में एक महीने की निगरानी के बाद पकड़ा गया और अब उसे जेल भेज दिया गया है।

Fugitive Arrested After 42 Years: Man Living Under Fake Identity Finally Caught in Firozabad
पुलिस हिरासत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन थाना दक्षिण पुलिस ने साबित कर दिया कि वे न केवल लंबे हैं, बल्कि बेहद सब्र वाले भी हैं। पुलिस ने 42 साल से फरार चल रहे एक ऐसे शातिर वारंटी को गिरफ्तार किया है, जिसे उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने जिंदा या मुर्दा पेश करने का आदेश दिया था। 70 वर्षीय रतन उर्फ रतना पिछले चार दशकों से अपनी पहचान मिटाकर एक गुमनाम जिंदगी जी रहा था।
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रतन उर्फ रतना निवासी मोहल्ला भीमनगर, दक्षिण व हाल निवासी नरायन नगर, रामगढ़ की गिरफ्तारी के बाद जो सच सामने आया, वह किसी फिल्म की कहानी जैसा है। साल 1983 में गैर-इरादतन हत्या के मामले में रतना व इसके साथी मनिया उर्फ मनीराज को जिला कोर्ट से छह-छह साल की सजा हुई थी। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में 1984 में अपील दाखिल की। हाईकोर्ट से अपील बेल पर बाहर आने के बाद रतना फिर कभी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। उसने अपना मोहल्ला भीम नगर छोड़ दिया और रामगढ़ के नारायण नगर में बस गया। उसने अपने अतीत पर ऐसा पर्दा डाला कि उसके अपने बच्चों को भी नहीं पता था कि उनके पिता कानून की नजर में एक अपराधी हैं। वह एक फैक्टरी में चुपचाप मजदूरी कर अपना जीवन बिता रहा था।
 
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पुलिस के लिए कड़ी चुनौती, बिना फोटो, घर-घर तलाशी
एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने बताया कि थाना दक्षिण इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह और एसआई सिंहराज सिंह की टीम के सामने चुनौती कड़ी थी। रतना का न कोई फोटो था, न कोई पहचान पत्र। पुलिस के पास था तो सिर्फ 42 साल पुराना एक नाम। पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और नारायण नगर में एक महीने तक सादे लिबास में डेरा डाला। घर-घर जाकर रतन नाम के वृद्धों की जानकारी जुटाई गई। आखिर में जब कड़ियां जुड़ीं, तो पुलिस रतना के दरवाजे तक जा पहुंची।

गिरफ्तारी पर रतना के उड़े होश, बोला- साहब लगा था अब कभी नहीं पकड़ा जाऊंगा
सीओ सिटी प्रवीण तिवारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को जैसे ही पुलिस ने रतना को घेरा, वह सन्न रह गया। उसने पुलिस से कहा कि उसे उम्मीद भी नहीं थी कि 42 साल बाद पुलिस उसके घर का रास्ता ढूंढ लेगी। उसे लगा था कि वक्त के साथ उसके गुनाह की फाइलें भी धूल खाकर दब चुकी होंगी। रतना ने स्वीकार किया कि वह इतने वर्षों से इस डर में जी रहा था कि कहीं उसका सच परिवार के सामने न आ जाए। सीओ सिटी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इस स्थायी वारंटी की गिरफ्तारी पुलिस की कार्यकुशलता का प्रमाण है। रतना के साथी मनिया की मौत 2002 में ही हो चुकी थी, लेकिन रतना लगातार कानून को छका रहा था। बृहस्पतिवार को उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है और हाईकोर्ट को भी इसकी सूचना दे दी गई है।
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