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UP: मृत पशुओं से संक्रमण का खतरा, कारकस प्लांट की स्थापना पर खड़ा हुआ संकट; टीटीजेड की बंदिशों में फंसा

Sun, 12 Jul 2026 11:40 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 12 Jul 2026 11:40 AM IST
सार

टीटीजेड प्राधिकरण कारकस प्लांट के लिए पूर्व में सैद्धांतिक सहमति दे चुका है लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बिना काम शुरू नहीं किया जा सकता। नगर निगम और टीटीजेड प्राधिकरण ने मिलकर पुराने आदेश में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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Carcass plant stuck in Red Category risk of infection from dead animals
नगर निगम आगरा

विस्तार

मृत पशुओं के वैज्ञानिक निस्तारण का संयंत्र (कारकस प्लांट) ताज ट्रपेजियम जोन (टीटीजेड) की बंदिशों में फंस गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस प्लांट को रेड कैटेगरी (लाल श्रेणी) में रखा है, जिससे इसकी स्थापना पर संकट खड़ा हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले और नीरी की सहमति पर ही प्लांट का भविष्य तय होगा। दूसरी तरफ निराश्रित मृत पशुओं का खुले मैदान और नदियों में निस्तारण से संक्रमण फैलने का खतरा खड़ा हो रहा है।
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जिले में 50 से अधिक गोशालाएं हैं। जहां करीब सात हजार गोवंश है। इसके अलावा जिले में एक लाख से अधिक कुत्ते और 1.50 लाख से अधिक निजी पशु हैं। जिनकी मृत्यु होने पर शवों के वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। प्लांट को लेकर कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए टीटीजेड प्राधिकरण ने अर्जी दाखिल की है। योजना के मुताबिक, ग्राम छलेसर के खसरा संख्या 565 और 566 में नगर निगम को यह प्लांट लगाना है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2024 और 22 अप्रैल 2025 को पारित आदेशों के तहत संपूर्ण टीटीजेड क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों के विस्तारण व स्थानांतरण पर रोक है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, कारकस प्लांट का कुल वायु प्रदूषण स्कोर-70 है, जो इसे रेड श्रेणी में लाता है। टीटीजेड प्राधिकरण इस प्लांट के लिए पूर्व में सैद्धांतिक सहमति दे चुका है लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण बिना सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बिना काम शुरू नहीं किया जा सकता। नगर निगम और टीटीजेड प्राधिकरण ने मिलकर पुराने आदेश में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपर नगर आयुक्त ने गत 11 मार्च को मंडलायुक्त को पत्र लिखा, जिसमें स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट से अंतिम आदेश आने के बाद ही टीटीजेड से विधिवत अनुमति मांगी जाएगी।

 

नीरी की सहमति का भी इंतजार
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्लांट के लिए नेशनल एन्वायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) से भी सहमति लिए जाने के आदेश दिए थे। इसके लिए टीटीजेड कार्यालय ने 12 मार्च को नीरी, नई दिल्ली के चीफ साइंटिस्ट डॉ. एसके गोयल को पत्र भेजा था। वहां से 16 मार्च को मिले जवाब के बाद, टीटीजेड कार्यालय ने 17 मार्च को नगर निगम को पत्र भेजकर आगे की जरूरी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

 
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खुले में हो रहा मृत पशुओं का निस्तारण
पर्यावरणविद् डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि कारकस प्लांट नहीं बनने से मृत पशुओं का निस्तारण खुले मैदानों और नदियों में प्रवाहित कर हो रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा है। जिले में मृत पशुओं के वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं। मंडलायुक्त एवं टीटीजेड चेयरमैन नगेंद्र प्रताप का कहना है कि जल्द सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कारकस प्लांट को शुरू कराने और आवश्यक कार्रवाई के लिए नगरायुक्त को निर्देश दिए हैं।
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