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Agra News: छात्र के दांत तोड़ने के मामले की बाल आयोग में शिकायत
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आगरा। थाना सिकंदरा क्षेत्र स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में दसवीं के दो छात्रों के बीच मारपीट के मामले की शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की गई है। इसमें मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। यह भी कहा कि पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन किया। पीड़ित छात्र के पिता ने वीडियो वायरल कर संवेदनहीनता दिखाई। प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में थाना प्रभारी को भी जिम्मेदार ठहराया है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को लिखे पत्र में बाल अधिकार कार्यकर्ता ने लिखा कि शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 के दो नाबालिग छात्रों के बीच झगड़े का मामला अत्यंत गंभीर है। घटना में एक छात्र ने दूसरे छात्र के दांत तोड़ दिए। पीड़ित छात्र के पिता, जो एक यूट्यूबर हैं, ने पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। यह तेजी से वायरल हो रहा है। एक छात्र का दूसरे छात्र के दांत तोड़ देना अपने आप में गंभीर अपराध है, लेकिन उससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि इस पूरे प्रकरण में नाबालिगों की पहचान को खुलेआम सार्वजनिक कर दिया गया।
पीड़ित छात्र के पिता की ओर से पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि यह नाबालिग के हितों के प्रतिकूल भी है। मीडिया में पीड़ित बच्चे के फोटो वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। इस प्रकरण में थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी नाबालिग छात्र के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (2) और 117 (2) बीएनएस में प्राथमिकी दर्ज की जबकि दोनों ही छात्र नाबालिग हैं। प्राथमिकी की प्रति सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें आरोपी छात्र का नाम भी सार्वजनिक हो गया। यह कृत्य किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। यह कानूनन दंडनीय अपराध है। इससे बच्चों की गरिमा एवं भविष्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
-। जेजे एक्ट के प्रति जागरूक नहीं हो रहे
बाल अधिकारों पर प्रति माह पुलिस कमिश्नरेट आगरा में थाने के बाल कल्याण अधिकारियों को बुलाकर कार्यशाला आयोजित कराई जाती है। उसके बावजूद भी पुलिस कर्मी जेजे एक्ट के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। बाल अधिकारों पर पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के उच्चाधिकारियों को संज्ञान लेकर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाना सराहनीय है, परंतु यह पर्याप्त नहीं है। बच्चों के मानसिक, सामाजिक और कानूनी संरक्षण हेतु व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। थाना प्रभारी भी जिम्मेदार हैं। उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
यह की गई मांग
- उच्च स्तरीय, समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। दोषियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
- नाबालिगों की पहचान उजागर करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई हो।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से वायरल वीडियो, एफआईआर प्रति एवं अन्य सामग्री तत्काल हटवाई जाए।
- स्कूल प्रशासन की भूमिका, लापरवाही एवं घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था की विफलता की जांच।
- भविष्य में ऐसे मामलों की पनरावत्ति रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं और निगरानी की जाए।
- दोनों बच्चों को काउंसिलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। यह घटना बाल अधिकारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
बाल कल्याण समिति ने जाना बच्चे का हाल
आगरा।
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने हॉस्पिटल में भर्ती छात्र का हाल जाना। टीम में सदस्य मजिस्ट्रेट रेनु चतुर्वेदी, हेमा कुलश्रेष्ठ, अर्चना उपाध्याय एवं जिला बाल संरक्षण इकाई से रुबीना नादर के अलावा चाइल्डलाइन से प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर ब्रिजेश कुमार गौतम शामिल रहे। टीम ने अस्पताल में घायल बच्चे की स्थिति का जायजा लिया। डॉक्टरों से जानकारी ली। बच्चे का ऑपरेशन काफी बड़े स्तर पर किया गया था। उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी, लेकिन अब बच्चा सुरक्षित है। धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है। परिजन को आश्वस्त किया गया कि मामले में शीघ्र एवं उचित कार्रवाई की जाएगी। समिति की ओर से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी और सामाजिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उधर, आरोपी छात्र को पिता बुधवार को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष ले गए। मगर किसी कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब बृहस्पतिवार को बुलाया गया है।
थाना प्रभारी क्या कर रहे थे, कैसे दर्ज हो गई प्राथमिकी?
सात साल से कम सजा वाले अपराध में नाबालिग छात्र पर प्राथमिकी दर्ज हो गई। इसमें मारपीट की सामान्य धारा लगाई गईं। एक दरोगा और दो सिपाही की लापरवाही पर निलंबन की कार्रवाई हुई। प्राथमिकी को रद कर दिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर मुंशी कोई प्राथमिकी अपने स्तर से दर्ज कर सकते हैं। यह मामला सिर्फ लापरवाही का है या फिर मुंशी ने प्रभारी के आदेश पर प्राथमिकी लिखी? जांच की जानी चाहिए।
पिता ने कहा, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
पीड़ित छात्र के पिता का कहना है कि प्राथमिकी को दर्ज करने के बाद समाप्त किया गया है। यह गलत है। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों से मिलेंगे। अगर न्याय नहीं मिलता है तो न्यायालय की शरण लेंगे।
व्हाट्सएप ग्रुपों पर ऑडियो वायरल
मामले में स्कूल के छात्रों के कुछ आडियो व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल हो रहे हैं। इसमें छात्र घटना के पीछे एक दूसरे के ऊपर कमेंट बता रहे हैं। वहीं पीड़ित छात्र के पिता पर दर्ज प्राथमिकी की प्रति भी वायरल हो रही हैं। इसके साथ ही आरोपी छात्र के पिता कह रहे हैं कि उनके बेटे का नाम सोशल मीडिया पर उजागर किया गया। वह छात्र के पिता की शिकायत करेंगे।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को लिखे पत्र में बाल अधिकार कार्यकर्ता ने लिखा कि शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 के दो नाबालिग छात्रों के बीच झगड़े का मामला अत्यंत गंभीर है। घटना में एक छात्र ने दूसरे छात्र के दांत तोड़ दिए। पीड़ित छात्र के पिता, जो एक यूट्यूबर हैं, ने पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। यह तेजी से वायरल हो रहा है। एक छात्र का दूसरे छात्र के दांत तोड़ देना अपने आप में गंभीर अपराध है, लेकिन उससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि इस पूरे प्रकरण में नाबालिगों की पहचान को खुलेआम सार्वजनिक कर दिया गया।
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पीड़ित छात्र के पिता की ओर से पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि यह नाबालिग के हितों के प्रतिकूल भी है। मीडिया में पीड़ित बच्चे के फोटो वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। इस प्रकरण में थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी नाबालिग छात्र के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (2) और 117 (2) बीएनएस में प्राथमिकी दर्ज की जबकि दोनों ही छात्र नाबालिग हैं। प्राथमिकी की प्रति सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें आरोपी छात्र का नाम भी सार्वजनिक हो गया। यह कृत्य किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। यह कानूनन दंडनीय अपराध है। इससे बच्चों की गरिमा एवं भविष्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
-। जेजे एक्ट के प्रति जागरूक नहीं हो रहे
बाल अधिकारों पर प्रति माह पुलिस कमिश्नरेट आगरा में थाने के बाल कल्याण अधिकारियों को बुलाकर कार्यशाला आयोजित कराई जाती है। उसके बावजूद भी पुलिस कर्मी जेजे एक्ट के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। बाल अधिकारों पर पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के उच्चाधिकारियों को संज्ञान लेकर तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाना सराहनीय है, परंतु यह पर्याप्त नहीं है। बच्चों के मानसिक, सामाजिक और कानूनी संरक्षण हेतु व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। थाना प्रभारी भी जिम्मेदार हैं। उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
यह की गई मांग
- उच्च स्तरीय, समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। दोषियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
- नाबालिगों की पहचान उजागर करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई हो।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से वायरल वीडियो, एफआईआर प्रति एवं अन्य सामग्री तत्काल हटवाई जाए।
- स्कूल प्रशासन की भूमिका, लापरवाही एवं घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था की विफलता की जांच।
- भविष्य में ऐसे मामलों की पनरावत्ति रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं और निगरानी की जाए।
- दोनों बच्चों को काउंसिलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। यह घटना बाल अधिकारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
बाल कल्याण समिति ने जाना बच्चे का हाल
आगरा।
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने हॉस्पिटल में भर्ती छात्र का हाल जाना। टीम में सदस्य मजिस्ट्रेट रेनु चतुर्वेदी, हेमा कुलश्रेष्ठ, अर्चना उपाध्याय एवं जिला बाल संरक्षण इकाई से रुबीना नादर के अलावा चाइल्डलाइन से प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर ब्रिजेश कुमार गौतम शामिल रहे। टीम ने अस्पताल में घायल बच्चे की स्थिति का जायजा लिया। डॉक्टरों से जानकारी ली। बच्चे का ऑपरेशन काफी बड़े स्तर पर किया गया था। उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी, लेकिन अब बच्चा सुरक्षित है। धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है। परिजन को आश्वस्त किया गया कि मामले में शीघ्र एवं उचित कार्रवाई की जाएगी। समिति की ओर से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी और सामाजिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उधर, आरोपी छात्र को पिता बुधवार को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष ले गए। मगर किसी कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब बृहस्पतिवार को बुलाया गया है।
थाना प्रभारी क्या कर रहे थे, कैसे दर्ज हो गई प्राथमिकी?
सात साल से कम सजा वाले अपराध में नाबालिग छात्र पर प्राथमिकी दर्ज हो गई। इसमें मारपीट की सामान्य धारा लगाई गईं। एक दरोगा और दो सिपाही की लापरवाही पर निलंबन की कार्रवाई हुई। प्राथमिकी को रद कर दिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर मुंशी कोई प्राथमिकी अपने स्तर से दर्ज कर सकते हैं। यह मामला सिर्फ लापरवाही का है या फिर मुंशी ने प्रभारी के आदेश पर प्राथमिकी लिखी? जांच की जानी चाहिए।
पिता ने कहा, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
पीड़ित छात्र के पिता का कहना है कि प्राथमिकी को दर्ज करने के बाद समाप्त किया गया है। यह गलत है। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों से मिलेंगे। अगर न्याय नहीं मिलता है तो न्यायालय की शरण लेंगे।
व्हाट्सएप ग्रुपों पर ऑडियो वायरल
मामले में स्कूल के छात्रों के कुछ आडियो व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल हो रहे हैं। इसमें छात्र घटना के पीछे एक दूसरे के ऊपर कमेंट बता रहे हैं। वहीं पीड़ित छात्र के पिता पर दर्ज प्राथमिकी की प्रति भी वायरल हो रही हैं। इसके साथ ही आरोपी छात्र के पिता कह रहे हैं कि उनके बेटे का नाम सोशल मीडिया पर उजागर किया गया। वह छात्र के पिता की शिकायत करेंगे।
