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अपराधी बना दिए: झूठे केस में फंसाया, जेल भिजवाया; कोर्ट के आदेश पर थानाध्यक्ष समेत पुलिसकर्मियों पर FIR
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:34 AM IST
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सार
आगरा में झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने के आरोप में अदालत ने थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए। पीड़ित का दावा है कि गुंडा एक्ट का फर्जी रिकॉर्ड दिखाकर उसकी जमानत भी रुकवाई गई थी।
FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में धोखाधड़ी व अन्य आरोप लगाकर पीड़ित ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने सुनवाई के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा, पुलिसकर्मी व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर वर्तमान थानाध्यक्ष को विवेचना के आदेश दिए।
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न्यू आगरा थाना क्षेत्र के नगला तल्फी निवासी प्रेम सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में अपने गांव के निवासी भीकम सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था। 3 अगस्त, 2018 को कब्जा मुक्त कराने के लिए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था।
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उनके आदेश पर कब्जा मुक्त कराने आई टीम ने जमीन की पैमाइश की। उस दौरान कब्जा करने वाले लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया था। भाई ने थाना न्यू आगरा में भीकम सिंह, रणवीर सिंह, जगवीर सिंह, प्रेम प्रताप, डेनी व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद विपक्षी ने समझौता करने का दबाव बनाया। मना करने पर भीकम ने अपने पुत्र रंजीत के माध्यम 11 मई, 2022 को थाना ताजगंज में लूट की झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी।
पुलिस ने 7 सितंबर, 2023 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिला जज की अदालत से जमानत न होने पर हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। थानाध्यक्ष ताजगंज और भीकम सिंह ने वहां शपथ पत्र दिया कि आरोपी प्रेम के खिलाफ थाना न्यू आगरा में गुंडा एक्ट की भी प्राथमिकी दर्ज है। आपराधिक इतिहास दिखाने की वजह से जमानत प्रार्थनापत्र लंबित रहा और वह निर्दोष होने के बाद भी जेल में निरुद्ध रहे।
जेल से रिहा होने पर सूचना के अधिकार में थाना न्यू आगरा से सूचना मांगी तो झूठी सूचना दी कि गुंडा एक्ट की प्राथमिकी दर्ज है। उसके बाद अपर जिला मजिस्ट्रेट नगर (एडीएम सिटी) की कोर्ट में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। वहां से पता चला कि उनके खिलाफ कोई गुंडा एक्ट की प्राथमिकी दर्ज नहीं है।