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UP: तैरना नहीं आता था फिर भी यमुना में कूद गया डेविड, दो भाइयों को न बचा सका; खुद की भी गवां दी जान
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 20 May 2026 09:09 AM IST
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सार
मथुरा के यमुना घाट पर दो युवकों को बचाने के लिए कूदे चांदी कारीगर डेविड की डूबने से मौत हो गई, जिससे इलाके में मातम छा गया। हादसे में कुल तीन युवकों की जान गई, जबकि डेविड की बहादुरी लोगों के लिए मिसाल बन गई।
डेविड का फाइल फोटो और यमुना घाट पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा में यमुना में डूबे चांदी कारीगर 24 वर्षीय डेविड का शव मंगलवार को मिल गया। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। मां, बहन और भाइयों के आंसू नहीं रुक रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि डेविड दोस्तों संग पार्टी करने कैलाश घाट पर गए थे। इस दौरान उन्होंने यमुना के दूसरी ओर, बलदेव इलाके में दो युवकों को डूबते देखा तो उन्हें बचाने के लिए दौड़ लगा दी। वहां पहुंचने के बाद दोनों युवकों को बचाने का प्रयास किया मगर उन्हें बचाने के प्रयास में अपनी जान भी गंवा बैठे। डेविड को तैरना नहीं आता था।
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बोदला स्थित माहौल नगर निवासी डेविड चांदी की पायल बनाने का काम करते थे। डेविड के पिता घनश्याम सब्जी मंडी में मजदूरी करते हैं। उनके दो बड़े भाई अमर और दीपक भी चांदी कारीगर हैं। सोमवार को कारखाने की छुट्टी में डेविड मोहल्ले के पांच दोस्तों के साथ कैलाश घाट पर नहाने गए थे। दोपहर में दोस्तों ने फोन कर जानकारी दी कि वह डूब गया है।
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इस पर परिवार के लोग पहुंच गए। एसडीआरएफ की टीम उनको निकालने के प्रयास में लगी हुई थी। मंगलवार सुबह छह बजे उनका शव निकाला जा सका। मथुरा में पोस्टमार्टम के बाद दोपहर ढाई बजे शव घर लाया गया तो मां नहनी फूट फूट कर रोने लगी। बेटे के शव से लिपट गई। बहन काजल का भी रो रोकर बुरा हाल हो गया।
मृतक के जीजा सागर ने बताया कि डेविड तैरना नहीं जानते थे। उनके दोस्त यमुना किनारे पर चले गए थे, तभी डेविड ने राया, मथुरा के रहने वाले दो भाई आंसू और अहले हसन को डूबते हुए देखा। दोनों ई-रिक्शा चालक बलदेव के सेहत गांव स्थित यमुना में नहाने आए थे। डेविड दोनों को नहीं जानते थे, लेकिन वह दोनों को डूबता देखकर दौड़कर पहुंचे और उन्हें बचाने के लिए यमुना में कूद गए, कुछ ही देर में उनके दोस्त भी वहां पहुंच गए मगर तब तक तीनों डूब चुके थे। मथुरा पुलिस ने आंसू का शव सोमवार को तलाश लिया था, मंगलवार को डेविड व अहले हसन के शव निकाले जा सके थे।
मोहल्ले के घरों में नहीं जले चूल्हे
चांदी कारीगर डेविड मोहल्ले के लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। जब उनकी माैत की जानकारी लोगों हुई तो हर कोई घर पहुंच गया। सोमवार रात को चूल्हे भी नहीं सुलगे। सभी बिलखते परिजन को संभाल रहे थे।
चांदी कारीगर डेविड मोहल्ले के लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे। जब उनकी माैत की जानकारी लोगों हुई तो हर कोई घर पहुंच गया। सोमवार रात को चूल्हे भी नहीं सुलगे। सभी बिलखते परिजन को संभाल रहे थे।