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UP: मोबाइल में हैं ये गेमिंग एप, तो तुरंत डिलीट करें...बच्चों को भूलकर भी ने दें फोन; हाॅरर टास्क दे रहे मौत
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 06 Feb 2026 08:55 AM IST
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सार
ऑनलाइन गेम की लत के कारण गाजियाबाद में 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों के नाैवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की घटना ने सभी को झकझोर दिया है।
बच्चों में खतरनाक है गेमिंग डेथ सिंड्रोम
- फोटो : AI
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विस्तार
गाजियाबाद में हुई दिल दहलाने वाली घटना के विभिन्न पहलुओं को जानने के लिए आगरा पुलिस ने भी काम शुरू कर दिया है। इसके कारणों के बारे में संबंधित थाने की पुलिस से जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं पुलिस आगरा में भी लोगों को जागरूक करने के लिए स्कूलों में अभियान चलाएगी।
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साइबर सेल के मुताबिक, कोरियन गेम पूर्व में प्रचलित ब्लू व्हेल गेम से ज्यादा खतरनाक है। इसमें भी दो तरह के गेम बच्चों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। एक कोरियन लवर गेम नाम से चल रहा है। इसमें गेम खेलने वाले को एक टास्क दिया जाता है। टास्क के दाैरान ही अनजान पुरुष या महिला से दोस्ती कराई जाती है। दोनों एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। फिर खतरनाक टास्क दिए जाते हैं। पूरा नहीं करने वाले को दिए गए आदेश मानने होते हैं।
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दूसरा गेम हाॅरर एंड सर्वाइकल है। इसे खेलने के लिए चार विकल्प दिए जा रहे हैं। काॅपी प्ले टाइम में डायरी में लिखने के लिए टास्क दिया जाता है। दूसरा द बेबी इन येलो है। इसमें जैसा कहा जाए, वैसा ही खेलने वाला करने लगता है। एविल नन में एक बालक की भूमिका निभानी होती है। इसमें ऐसे दुष्ट के चंगुल से निकलना होता है, जिसने उसे पकड़ रखा होता है। एक स्कूल भी दिखाया जाता है। यह एक पुरानी घटना की कहानी को दिखाता है। चाैथा गेम है आइस स्क्रीम। इसमें भी डरावनी गाथा सुनाई जाती है। इसके बाद एक पहेली पूछी जाती है। इस पहेली का जवाब देना होता है। जवाब नहीं दे पाने पर टास्क मिलने लगते हैं।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार का कहना है कि बच्चे अगर मोबाइल चला रहे हैं तो अभिभावक विशेष रूप से ध्यान रखें। वह कब और काैन सा कंटेंट देख रहे हैं। इस बारे में उनसे बात करते रहें। समय-समय पर मोबाइल को भी चेक करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव होने पर मोबाइल उनसे दूर कर दें। उन्हें घर से बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। पुलिस साइबर अपराध से बचाने के लिए लोगों को जागरूक कर चुकी है।
अब बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग और मोबाइल की लत से बचाने के लिए स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएगी। इसके साथ ही सबसे ज्यादा जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की है। वह स्कूलों को दिशा-निर्देश दें। स्कूलों में मनोचिकित्सक की माैजूदगी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।
