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UP: विशाल अजगर और सांप की मुसीबत में पड़ गई जान, एक तारों में उलझा; दूसरा वाशिंग मशीन में जा फंसा

Mon, 13 Jul 2026 02:25 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 13 Jul 2026 02:25 PM IST
सार

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में प्लास्टिक और टेलीफोन के तारों में फंसे आठ फीट लंबे अजगर को वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने सुरक्षित बचाया। वहीं, एक हाउसिंग कॉलोनी की वॉशिंग मशीन में फंसे इंडियन वुल्फ स्नेक का भी सफल रेस्क्यू किया गया।

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Eight-Foot Python Trapped in Plastic and Wires Rescued by Wildlife SOS in Agra
फंसे हुए सांप - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र से वाइल्डलाइफ़ एसओएस रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने रेप्टाइल्स बचाने के दो अनोखे ऑपरेशन किए। उन्होंने एक आठ फ़ीट लंबे अजगर को बचाया, जो टेलीफ़ोन के तार और प्लास्टिक कचरे में फंसकर घायल हो गया था, इसके साथ ही वॉशिंग मशीन में फंसे एक इंडियन वुल्फ़ स्नेक को भी सुरक्षित बचाया गया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे फेंका गया कचरा और तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
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आगरा में लापरवाही से फेंके गए टेलीफ़ोन के तार और प्लास्टिक की बोतल में एक अजगर बुरी तरह से फंस गया था। घायल सांप मुश्किल से हिल-डुल पा रहा था। हर कोशिश के साथ तार उसके शरीर को और गहरी तरह से जकड़ रहा था। वाइल्डलाइफ़ एसओएस की टीम ने तुरंत अजगर को बाहर निकाला और उसे आगरा भालू संरक्षण केंद्र पहुंचाया। वहां पशु-चिकित्सकों ने सर्जरी करके फंसे हुए तार को निकाला और उसे प्लास्टिक की बोतल से आज़ाद किया। इसके साथ ही रेडियोग्राफ़िक जांच से पुष्टि हुई कि उसकी हड्डियों में कोई चोट नहीं आई थी। सांप अभी भी पशुचिकित्सा टीम की देखरेख में है और पूरी तरह से ठीक होने के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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एक अलग घटना में आगरा के ही सिकंदरा छेत्र की एक हाउसिंग कॉलोनी के निवासियों ने अपनी वॉशिंग मशीन के अंदर इंडियन वुल्फ स्नेक को देखा, जिसके तुरंत बाद उन्होंने वाइल्डलाइफ एसओएस हेल्पलाइन पर संपर्क किया। रेस्क्यू टीम ने सावधानी से वॉशिंग मशीन को खोला और सांप को सुरक्षित बाहर निकाला। सांप को कोई चोट नहीं आई थी, जिसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
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आगरा के डीएफओ और नेशनल चंबल सैंक्चुअरी प्रोजेक्ट के डिप्टी कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट, आईएफएस राजेश कुमार ने कहा, "जब कचरा जमा होता है, तो इसका खामियाजा जंगली जानवरों को भुगतना पड़ता है। महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों के आस-पास के इलाकों में कचरे को गैर-जिम्मेदाराना तरीके से फेंकने की वजह से ही यह अजगर जानलेवा स्थिति में फँस गया था। वन विभाग की मदद करते हुए वाइल्डलाइफ़ एसओएस की त्वरित कार्रवाई ने अजगर की जान बचा ली, लेकिन कचरे को सही तरीके से एवं सही जगह पर फेंकना ही एकमात्र समाधान है।

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "इंसानों की लापरवाही की कीमत जंगली जानवरों को चुकानी पड़ रही है। जब प्राकृतिक आवासों के पास कचरा फेंका जाता है, तो फेंकी गई प्लास्टिक की बोतल या तार का एक टुकड़ा भी जानलेवा जाल बन सकता है। वाइल्डलाइफ़ की सुरक्षा की शुरुआत कचरे को ज़िम्मेदारी से निपटाने और हमारे साझा इलाकों को खतरनाक कचरे से मुक्त रखने जैसे आसान कामों से होती है।"


वाइल्डलाइफ़ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, "हर रेस्क्यू हमें याद दिलाता है, कि जंगली जानवर ऐसे इलाकों में ढल रहे हैं, जहाँ तेज़ी से इंसानों का कब्ज़ा बढ़ रहा है। जंगलों के पास फेंका गया कचरा न सिर्फ़ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि जंगली जानवरों की जान भी ले सकता है।"

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर, बैजू राज एमवी ने कहा, "चूहों की आबादी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करके स्वस्थ इकोसिस्टम बनाए रखने में सांप बहुत ज़रूरी भूमिका निभाते हैं। जब वे घायल हो जाते हैं या इंसानी इलाकों में फंस जाते हैं, तो सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि उन्हें छेड़ा न जाए और रेस्क्यू टीम को बुलाया जाए, ताकि लोगों या जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।"


वाइल्डलाइफ़ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के डिप्टी डायरेक्टर, डॉ. एस. इलयाराजा ने कहा, "जब अजगर को लाया गया, तो तार उसकी खाल में धंस गया था और उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ़ हो रही थी। सबसे पहले तार को हटाना और ज़ख्मों को साफ़ करना ज़रूरी था। रेडियोग्राफ़िक जांच से राहत मिली कि हड्डियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन ज़ख्म गहरे हैं और इसे जंगल में छोड़ने से पहले रोज़ाना लगातार देखभाल की ज़रूरत होगी।"

 
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