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UP: हनुमान जन्मोत्सव पर शोभायात्रा में निकाला गया हाथी, आयोजकों की बढ़ सकती है मुश्किल; वन विभाग करेगा पूछताछ
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 05 Apr 2026 02:47 PM IST
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सार
श्रीराम लीला कमेटी ने वर्ष 2013 से फाइबर का कृत्रिम हाथी बनवाकर राम बरात में उपयोग किया था। इससे पहले राम बरात में चार हाथी निकाले जाते थे, जबकि आंबेडकर शोभायात्रा में तीन हाथियों पर बाबा साहब की प्रतिमा निकाली जाती थी। राम बरात के साथ ही आंबेडकर शोभायात्रा में भी हाथियों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया।
शोभयात्रा में शामिल हाथी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
शोभायात्रा में झांकी निकालने के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल-1 में दर्ज हाथियों को पीड़ा पहुंचाई जा रही है। शुक्रवार को पुराने शहर से हनुमान जन्मोत्सव पर निकाली गई शोभायात्रा में हाथी का इस्तेमाल किया गया, जबकि इसके लिए अनुमति आवश्यक है और तय गाइडलाइंस के बाद ही हाथी को सड़क पर घुमाया जा सकता है। आगरा में वर्ष 2012 के बाद पहली बार किसी शोभायात्रा में हाथी का उपयोग किया गया। पशुप्रेमियों ने इस पर नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों, पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शुक्रवार शाम को निकाली गई शोभायात्रा के आयोजकों का दावा है कि महावत के पास अनुमतिपत्र है, जबकि स्थानीय वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई और न ही कोई जानकारी दी गई। जयपुर के अयूब खां ने 15 मार्च से 14 अप्रैल तक राजस्थान से उत्तर प्रदेश के शहरों मथुरा, आगरा, मेरठ, अलीगढ़ और हरियाणा के गुरुग्राम के लिए ट्रांसपोर्ट परमिट लिया था। शोभायात्रा में इसी मादा हाथी का इस्तेमाल किया गया जो 49 साल की है। इस पत्र में शोभायात्रा में हाथी के इस्तेमाल का कोई जिक्र नहीं किया गया है।
वर्ष 2013 से राम बरात में बंद हुआ इस्तेमाल
ऐतिहासिक राम बरात में भगवान श्रीराम समेत चारों भाइयों के स्वरूप हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण करते थे, लेकिन वर्ष 2012 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद श्रीराम लीला कमेटी ने वर्ष 2013 से फाइबर का कृत्रिम हाथी बनवाकर राम बरात में उपयोग किया था। इससे पहले राम बरात में चार हाथी निकाले जाते थे, जबकि आंबेडकर शोभायात्रा में तीन हाथियों पर बाबा साहब की प्रतिमा निकाली जाती थी। राम बरात के साथ ही आंबेडकर शोभायात्रा में भी हाथियों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया। रामलीला कमेटी ने कुछ समय के बाद फाइबर के हाथियों का इस्तेमाल भी बंद कर दिया।
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शुक्रवार शाम को निकाली गई शोभायात्रा के आयोजकों का दावा है कि महावत के पास अनुमतिपत्र है, जबकि स्थानीय वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई और न ही कोई जानकारी दी गई। जयपुर के अयूब खां ने 15 मार्च से 14 अप्रैल तक राजस्थान से उत्तर प्रदेश के शहरों मथुरा, आगरा, मेरठ, अलीगढ़ और हरियाणा के गुरुग्राम के लिए ट्रांसपोर्ट परमिट लिया था। शोभायात्रा में इसी मादा हाथी का इस्तेमाल किया गया जो 49 साल की है। इस पत्र में शोभायात्रा में हाथी के इस्तेमाल का कोई जिक्र नहीं किया गया है।
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वर्ष 2013 से राम बरात में बंद हुआ इस्तेमाल
ऐतिहासिक राम बरात में भगवान श्रीराम समेत चारों भाइयों के स्वरूप हाथी पर सवार होकर नगर भ्रमण करते थे, लेकिन वर्ष 2012 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद श्रीराम लीला कमेटी ने वर्ष 2013 से फाइबर का कृत्रिम हाथी बनवाकर राम बरात में उपयोग किया था। इससे पहले राम बरात में चार हाथी निकाले जाते थे, जबकि आंबेडकर शोभायात्रा में तीन हाथियों पर बाबा साहब की प्रतिमा निकाली जाती थी। राम बरात के साथ ही आंबेडकर शोभायात्रा में भी हाथियों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया। रामलीला कमेटी ने कुछ समय के बाद फाइबर के हाथियों का इस्तेमाल भी बंद कर दिया।
आयोजकों से की जाएगी पूछताछ
फुलट्टी में निकाली गई शोभायात्रा में हाथी के उपयोग की जानकारी मिली है। विभाग से इस बारे में कोई अनुमति नहीं ली गई थी। किसी तरह की अनुमति का पत्र भी हमें नहीं दिया गया है। इस बारे में आयोजकों से पूछताछ की जाएगी। - राजेश कुमार, डीएफओ, आगरा
होनी चाहिए कार्रवाई
यह पशु क्रूरता का मामला है। बिना अनुमति शहर की तंग गलियों में हाथी को घुमाया गया, जबकि वहां बिजली के तार और भारी शोरशराबा था। अनुमति के बाद भी ऐसी जगहों पर हाथी नहीं निकाल सकते। इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।- विनीता अरोड़ा, पशुप्रेमी, एक्टिविस्ट
खतरे में डाली लोगों की जान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी शेड्यूल-1 का प्राणी है, जिसके लिए केवल लाइसेंस प्राप्त हाथी को ही अनुमति जारी हो सकती है। बिना अनुमति के इतने बड़े आयोजन में हाथी का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल गया। - अपूर्व शर्मा, एक्टिविस्ट, पशु प्रेमी
ये महावत की जिम्मेदारी
जिस महावत से हाथी मंगवाया, उसके पास राजस्थान सरकार के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन का प्रपत्र था, इसलिए स्थानीय कार्यालय से अनुमति नहीं ली। यह महावत की जिम्मेदारी है। - गौरव बंसल, आयोजन अध्यक्ष
इन नियमों का करना होता है पालन
- आयोजकों को तीन दिन पहले वन विभाग और संबंधित पुलिस थाने को सूचना देनी होती है।
- पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है कि हाथी को कोई संक्रामक रोग नहीं है।
- परिवहन के समय हाथी के साथ प्रशिक्षित महावत और एक सहायक का होना अनिवार्य है।
- हाथियों के पास पटाखे फोड़ने, तेज संगीत बजाने, क्रूर तरीके से उपयोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
- महावत के पास हाथी की डाटा बुक, बीमा, माइक्रोचिप और मालिकाना हक का प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत हाथियों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता अपराध है।
फुलट्टी में निकाली गई शोभायात्रा में हाथी के उपयोग की जानकारी मिली है। विभाग से इस बारे में कोई अनुमति नहीं ली गई थी। किसी तरह की अनुमति का पत्र भी हमें नहीं दिया गया है। इस बारे में आयोजकों से पूछताछ की जाएगी। - राजेश कुमार, डीएफओ, आगरा
होनी चाहिए कार्रवाई
यह पशु क्रूरता का मामला है। बिना अनुमति शहर की तंग गलियों में हाथी को घुमाया गया, जबकि वहां बिजली के तार और भारी शोरशराबा था। अनुमति के बाद भी ऐसी जगहों पर हाथी नहीं निकाल सकते। इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।- विनीता अरोड़ा, पशुप्रेमी, एक्टिविस्ट
खतरे में डाली लोगों की जान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी शेड्यूल-1 का प्राणी है, जिसके लिए केवल लाइसेंस प्राप्त हाथी को ही अनुमति जारी हो सकती है। बिना अनुमति के इतने बड़े आयोजन में हाथी का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल गया। - अपूर्व शर्मा, एक्टिविस्ट, पशु प्रेमी
ये महावत की जिम्मेदारी
जिस महावत से हाथी मंगवाया, उसके पास राजस्थान सरकार के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन का प्रपत्र था, इसलिए स्थानीय कार्यालय से अनुमति नहीं ली। यह महावत की जिम्मेदारी है। - गौरव बंसल, आयोजन अध्यक्ष
इन नियमों का करना होता है पालन
- आयोजकों को तीन दिन पहले वन विभाग और संबंधित पुलिस थाने को सूचना देनी होती है।
- पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है कि हाथी को कोई संक्रामक रोग नहीं है।
- परिवहन के समय हाथी के साथ प्रशिक्षित महावत और एक सहायक का होना अनिवार्य है।
- हाथियों के पास पटाखे फोड़ने, तेज संगीत बजाने, क्रूर तरीके से उपयोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
- महावत के पास हाथी की डाटा बुक, बीमा, माइक्रोचिप और मालिकाना हक का प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत हाथियों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता अपराध है।