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उम्मीद का उजियारा: लोगों को रोजगार भी दिया, मुसीबतों का सामना कर तलाशी 'नई राह'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 01 Jan 2021 09:53 AM IST
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Motivational Stories Of Businessperson Get Success After Lockdown
शिशिर भगत (बाएं), वर्षा, नरेंद्र कौर ऊपर से नीचे और यश - फोटो : अमर उजाला
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2020 की यादें कड़वी ज्यादा हैं और मीठी कम। पर फिर भी आशावान होना और सकारात्मक सोचना मनुष्य की प्रवृत्ति है। ऐसा भी नहीं है कि सब बुरा ही बुरा हुआ है। ऐसे समय जब अधिकांश यादों में कोरोना के कहर ने कैसे 2020 को बर्बाद किया- ये ही जिक्र आ रहा है तो हम आपसे ये पूछना चाहते हैं कि तमाम दिक्कतों के बाद भी यह जाता हुआ साल आपके लिए क्या अच्छा लेकर आया? अमर उजाला की इसी पहल के तहत कुछ लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं पढ़िए उनकी कहानियां...
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कोरोना के कठिन काल में मुसीबतों का सामना कर नई राह ढूंढकर उस पर चलने वालों में फतेहाबाद रोड निवासी यश खंडेलवाल भी हैं। उनके पिता का इंजन स्पेयर पार्ट्स का पुश्तैनी कारोबार है। लॉकडाउन में यह ठप हो गया। यश ने पहले सोचा कि नौकरी की जाए लेकिन लॉकडाउन में काम कैसे मिलता? इसलिए नया रास्ता सोचा, गाय के गोबर से उत्पाद बनाना शुरू किया। इसमें प्रतिस्पर्धा भी कम है, काम चल निकला। गोबर से धूपबत्ती, मूर्तियां, हवन सामग्री बनाने का छोटा सा कारखाना खोल लिया। वह बताते हैं कि उनका खुद का संकट तो दूर हुआ है, छह लोगों को रोजगार भी दिया। अब लोग उनके पास पूछने के लिए आते हैं कि यह काम कैसे किया जा सकता है।
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ये भी पढ़ें- उम्मीद का उजियारा: लॉकडाउन से कारोबार में हुआ नुकसान, मेहनत से फिर पाया मुकाम

इवेंट कंपनी ठप हुई तो नरेन्दर ने खोल लिया रेस्टोरेंट
पाशर्वनाथ पंचवटी निवासी नरेन्दर कौर पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं। पति इवेंट कंपनी के संचालक हैं। लॉकडाउन में दोनों ही पेशे ठप हो गए थे। संकट के समय परिवार चलाना आसान नहीं था। ऐसे में नरेन्दर ने रेस्टोरेंट खोल लिया। सोचा कि कुछ चले न चले, खाने-पीने का काम जरूर चलेगा। सोच सही निकली, रेस्टोरेंट चल निकला। लॉकडाउन के बाद भी इसी को आगे बढ़ाया।

वर्षा ने कपड़े का शोरूम खोल दिया परिवार को सहारा
गांधी नगर निवासी वर्षा गोयल घर की साज-सज्जा से जुड़े सामानों की प्रदर्शनी लगाती थीं। कई शहरों में सफल तरीके से इस काम को अंजाम दे चुकी हैं। लॉकडाउन में सभी तरह की गतिविधियां बंद होने के कारण काम ठप हो गया। पति के टेंट के व्यवसाय पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे में नया करने की सोची, कपड़े का शोरूम खोल लिया। वर्षा काम के साथ परिवार की भी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं।


लॉकडाउन में भारी नुकसान के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, एक और प्रतिष्ठान खोला

यह साल अन्य लोगों की तरह भगत हलवाई के लिए भी मुसीबतों भरा रहा। कोरोना की वजह से होली पर मिठाई की बिक्री अनुमान से बहुत कम हुई। लॉकडाउन में 70 दिन तक दुकान ही नहीं खुली। दुकान के अंदर पहले से बनी मिठाई और कच्चा माल खराब हो गया। लॉकडाउन के दो माह बाद भी व्यापार 15 से 30 फीसदी ही हो पाया। लेकिन शिशिर भगत ने हिम्मत नहीं हारी। आशावादी रहकर अपना व्यापार जमाए रखा। परिणाम यह निकला कि अब उन्होंने अपना एक और प्रतिष्ठान खोल दिया है। अब उनका व्यापार गति पकड़कर सामान्य स्थिति में आ चुका है। 
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