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Nurses Day 2026: रात-दिन मरीजों की सेवा में जुटीं नर्सें, बोलीं- एक 'थैंक्यू' भुला देता है सारी थकान

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 12 May 2026 10:38 AM IST
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सार

आगरा की नर्सें दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटकर मानवता की मिसाल पेश कर रही हैं। किसी ने 20 हजार प्रसव कराए तो किसी ने कोविड काल में हजारों लोगों को वैक्सीन लगाकर जिंदगी बचाई।

Nurses Day 2026 Patient’s Thank You Erases Every Exhaustion Nurses Share Their Dedication
Nurses Day 2026 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

घंटे न दिन-रात देखा। इमरजेंसी हुई तो घर से भी अस्पताल पहुंचे। बार-बार मरीज देखना। कई बार मरीज-तीमारदार का गुस्सा भी झेलते। जैसे ही मरीज ठीक होकर थैंक्यू बोलते...सच कहूं चेहरे पर आभार भरी खुशी देख थकान और काम का दबाव सब भूल जाते। ऐसे ही नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टरों का सहयोगी बनकर मरीजों की सेवा कर रहा है। राजकीय नर्सेज संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश त्यागी ने बताया कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने क्रीमिया युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा की। उनकी जयंती को नर्सिंग दिवस के रूप में मनाकर नमन करते हैं।
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20 हजार करा प्रसव...परिजन बन कराती प्रसव
 लेडी लॉयल के प्रसव कक्ष प्रभारी मंजुला मोरे ने बताया कि ऐसी नौकरी करना चाहती थी, जिसमें सेवा हो। नर्सिंग स्टाफ से बेहतर कोई नहीं दिखा। 18 साल से अधिक समय से सेवाएं दे रही हैं। अभी तक करीब 20 हजार प्रसव करा चुकी हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती कक्ष में प्रवेश करती हैं तो परिजन के चेहरे पर चिंता साफ देख सकते हैं। कक्ष में परिजन बन प्रसव कराती हूं, जब जच्चा-बच्चा को स्वस्थ बताते हैं तो परिजन की खुशी देखते बनती है।

 
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कोविड से सामना, 10 हजार को लगाई वैक्सीन
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स सुनीता भामु ने बताया कि सात साल पहले नर्सिंग स्टाफ बनी। शुरुआत से ही कोविड का सामना हुआ। पहली बार ऐसी बीमारी, फिर भी हिम्मत नहीं हारी। वार्ड में नौकरी दी, जब वैक्सीन आई तो प्रशिक्षण मिला। 10 हजार से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई। इससे मन को संतुष्टि मिली।

 

कर्तव्य के लिए मथुरा से आगरा का सफर
 मथुरा से प्रतिदिन आगरा आकर सेवाएं देने वाली संगीता चौधरी का कहना है कि जिम्मेदारी से भागना उनके स्वभाव में नहीं है। मथुरा से रोजाना आना-जाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जब अस्पताल पहुंचती हैं तो मरीजों की उम्मीदें थकान मिटा देती हैं। घर और बाहर की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना कठिन है, पर एक नर्स के लिए सेवा ही उसका सबसे बड़ा धर्म है।

 

मरीजों के लिए बच्चों को भी छोड़ देती हैं अपनों के भरोसे
नर्स नीतू कुमारी ने कर्तव्य की परिभाषा को एक नया विस्तार दिया है। वे बताती हैं कि अक्सर उनके बच्चों को उनकी जरूरत होती है, लेकिन अस्पताल में कोई और भी है जिसकी जिंदगी नीतू के हाथों में है। बच्चों की शिक्षा और परवरिश जिम्मेदारी है और मरीजों की देखभाल निष्ठा है। बच्चों को परिवार के भरोसे छोड़कर तड़पते हुए मरीज को सहारा देना।

 

मरीजों का ईश्वर जैसा दर्जा ही सबसे बड़ा पुरस्कार
बोदला निवासी नीलम का कहना हैं कि जब कोई मरीज स्वस्थ होकर घर जाता है और भगवान जैसा सम्मान देता है, तो सारी मेहनत सफल हो जाती है। तब सबसे ज्यादा खुशी होती है जब ठीक हुआ मरीज दुआएं देता है। प्रतिदिन वार्ड में 300 से ज्यादा मरीजों को जरूरत होती है। अगर एक दिन भी तत्पर न रहें, तो कई अनहोनी हो सकती है। 


 
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