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यमुना हादसा: आंखों के सामने एक-एक कर डूबते गए दोस्त, काजल ने सुनाई चार मौतों की खौफनाक कहानी
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 13 May 2026 11:18 AM IST
सार
यमुना हादसे के बाद बचीं काजल और परिजनों की आंखों के सामने डूबते बच्चों की तस्वीरें बार-बार तैर रही हैं। इकलौते बेटे विक्की को बचाने की गुहार लगाती मां और बेसुध होती मौसी का दर्द देखकर घाट पर मौजूद लोग भी रो पड़े।
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यमुना हादसा: घटना बताती काजल
- फोटो : अमर उजाला
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यमुना में 4 बच्चों की मौत के बाद जिम्मेदार जाग गए हैं। भविष्य में हादसों को रोकने के लिए रुनकता के रेणुका घाट पर पीएसी के कैंप को अब बल्केश्वर घाट पर स्थानांतरित किया जाएगा। एडीए की पथकर निधि से घाटों पर डूबने वालों को बचाने के संसाधनों का इंतजाम किया जाएगा।
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यमुना में सर्च
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थानों में नहीं है तैराकी में दक्ष सिपाही
नियमों के अनुसार जिन थानों के क्षेत्र में नदियों के घाट और किनारे हों, वहां तैराकी में दक्ष सिपाहियों को तैनात किया जाना चाहिए। थाने में तैराकी के सभी उपकरण जैसे लाइफ जैकेट और पूरी बॉडी वार्मर किट और अन्य उपकरण मौजूद होने चाहिए। किसी को डूबने से बचाने और नदी में कोई शव बहता देख निकालने आदि कामों के लिए सिपाही प्रशिक्षित होने चाहिए। कमिश्नरेट में नदियों के क्षेत्र वाले थानों में इस तरह की सुविधाओं का अभाव है। कोई घटना होने पर स्थानीय तैराकों के सहारे ही पुलिस राहत कार्य करती है।
नियमों के अनुसार जिन थानों के क्षेत्र में नदियों के घाट और किनारे हों, वहां तैराकी में दक्ष सिपाहियों को तैनात किया जाना चाहिए। थाने में तैराकी के सभी उपकरण जैसे लाइफ जैकेट और पूरी बॉडी वार्मर किट और अन्य उपकरण मौजूद होने चाहिए। किसी को डूबने से बचाने और नदी में कोई शव बहता देख निकालने आदि कामों के लिए सिपाही प्रशिक्षित होने चाहिए। कमिश्नरेट में नदियों के क्षेत्र वाले थानों में इस तरह की सुविधाओं का अभाव है। कोई घटना होने पर स्थानीय तैराकों के सहारे ही पुलिस राहत कार्य करती है।
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गोताखोर
- फोटो : अमर उजाला
मना करने के बाद भी यमुना में उतरे थे बच्चे
जन्मदिन समारोह में आए सभी बच्चे टोली बनाकर यमुना की तलहटी में पहुंचे थे। पानी की तलाश में 300 मीटर से ज्यादा चलकर किनारे पर पहुंचे थे। बल्केश्वर घाट पर मौजूद तैराक टीटू ने उन्हें देखा तो यमुना मेें जगह-जगह गड्ढे होने का हवाला देकर पानी में उतरने से मना कर दिया। टीटू के भाई ने भी उन्हें रोका। टीटू ने बताया कि भाई इसी दौरान कुछ सामान लेने चला गया। मौका देखकर बच्चे पानी में उतरने लगे। वहां फिसलन थी और पानी गहरा था। बच्चों को डूबता देख वह तुरंत पानी में कूदे और काफी प्रयास कर तीन को बाहर निकाल लिया। उस समय पानी से निकालने के बाद बच्चों के शरीर ने हरकत करना बंद कर दिया था।
जन्मदिन समारोह में आए सभी बच्चे टोली बनाकर यमुना की तलहटी में पहुंचे थे। पानी की तलाश में 300 मीटर से ज्यादा चलकर किनारे पर पहुंचे थे। बल्केश्वर घाट पर मौजूद तैराक टीटू ने उन्हें देखा तो यमुना मेें जगह-जगह गड्ढे होने का हवाला देकर पानी में उतरने से मना कर दिया। टीटू के भाई ने भी उन्हें रोका। टीटू ने बताया कि भाई इसी दौरान कुछ सामान लेने चला गया। मौका देखकर बच्चे पानी में उतरने लगे। वहां फिसलन थी और पानी गहरा था। बच्चों को डूबता देख वह तुरंत पानी में कूदे और काफी प्रयास कर तीन को बाहर निकाल लिया। उस समय पानी से निकालने के बाद बच्चों के शरीर ने हरकत करना बंद कर दिया था।
काजल
- फोटो : अमर उजाला
पानी में नहीं जाना चाहती थी काजल
बच्चों की टोली में शामिल काजल ने बताया कि वह बहन संध्या के साथ घाट पर गई थी। कान्हा और विक्की नहाने की जिद कर रहे थे। महक भी उनके साथ पानी में जाना चाहती थी। कान्हा और विक्की को डूबता देख महक और रिया ने उन्हें निकालने की कोशिश की और वह भी पानी में डूबने लगीं। वह भी बचाने को पानी में उतरी और डूबने लगी। वहां बचाने आए एक व्यक्ति ने बांस आगे किया और बांस को पकड़ कर वह बाहर निकल पाई।
बच्चों की टोली में शामिल काजल ने बताया कि वह बहन संध्या के साथ घाट पर गई थी। कान्हा और विक्की नहाने की जिद कर रहे थे। महक भी उनके साथ पानी में जाना चाहती थी। कान्हा और विक्की को डूबता देख महक और रिया ने उन्हें निकालने की कोशिश की और वह भी पानी में डूबने लगीं। वह भी बचाने को पानी में उतरी और डूबने लगी। वहां बचाने आए एक व्यक्ति ने बांस आगे किया और बांस को पकड़ कर वह बाहर निकल पाई।
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रोती मां को चुप कराता मासूम
- फोटो : अमर उजाला
कई बार बेसुध हुई बच्चों की मौसी
हादसे की खबर मिलते ही भूरी सिंह की पत्नी मानसी मौके पर पहुंची। अपने करीबी रिश्तेदारों के बच्चों की लाशें देख कर वह कई बार बेसुध हो गई। लोगों से बार-बार बच्चों की नब्ज देखने को कहने लगी। उन्होंने बताया कि बच्चों से नदी की ओर जाने से मना किया था पर बच्चों ने बात नहीं मानी। अपने घर आए बच्चों की मौत का दंश उनके जिंदगी भर का दुख हो गया। उनकी हालत देखकर लोगों ने ढांढस बंधाने का प्रयास करने लगे।
हादसे की खबर मिलते ही भूरी सिंह की पत्नी मानसी मौके पर पहुंची। अपने करीबी रिश्तेदारों के बच्चों की लाशें देख कर वह कई बार बेसुध हो गई। लोगों से बार-बार बच्चों की नब्ज देखने को कहने लगी। उन्होंने बताया कि बच्चों से नदी की ओर जाने से मना किया था पर बच्चों ने बात नहीं मानी। अपने घर आए बच्चों की मौत का दंश उनके जिंदगी भर का दुख हो गया। उनकी हालत देखकर लोगों ने ढांढस बंधाने का प्रयास करने लगे।