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चार मौतों का दर्द: इकलौता बेटा तो किसी का छिन गया भाई, पिता के आंसू और बहन की चीखें; रुला देंगी ये तस्वीरें

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 13 May 2026 10:53 AM IST
सार

आगरा के यमुना हादसे में 13 वर्षीय विक्की की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। चार बेटियों के बाद मन्नतों से मिले इकलौते बेटे का शव देखकर पिता, मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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Yamuna Tragedy: Four Deaths Snatched Away Sons, Brothers and Families’ Last Hope
यमुना हादसा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के बल्केश्वर स्थित पार्वती घाट पर हुए हादसे में सिक्योरिटी गार्ड राकेश के घर का इकलाैता चिराग बुझ गया। 5 घंटे बाद यमुना से जैसे ही 13 साल के विक्की का शव गोताखोर बाहर लेकर आए, वैसे ही पिता दहाड़े मारकर रोने लगे। बहनें भाई को उठाने के लिए दाैड़ पड़ीं। किनारे पर बैठी मां गोमती अपने लाल को मृत देखकर बेहोश गई। घरवालों का रुदन देखकर हर आंख नम हो गईं। पिता का कहना था कि बड़ी मन्नतों के बाद बेटा पैदा हुआ था, पलभर में गोद से छीन लिया।


शोभा नगर निवासी राकेश कुमार एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। वह मंगलवार को ड्यूटी पर गए थे। उन्हें दोपहर 12 बजे बेटे के डूबने की जानकारी मिली। वह सीधे यमुना के घाट पर आ गए। पुलिसकर्मियों और गोताखोरों ने तीन के शवों को निकाल लिया था, जबकि विक्की को नहीं निकाला जा सका था। इस पर राकेश घाट किनारे पर ही बैठ गए। वह इस इंतजार में थे कि बेटा बाहर आएगा तो पिता कहकर बुलाएगा।
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Yamuna Tragedy: Four Deaths Snatched Away Sons, Brothers and Families’ Last Hope
विलाप करता पिता - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि चार बेटियां हैं। इनमें दो की शादी हो चुकी है। दो अभी नाबालिग हैं। बेटा विक्की इकलाैता था। उसके लिए भगवान से मन्नत मांगी थी। तब जाकर खुशियां घर आई थीं। बेटा हर किसी का लाड़ला था। मंगलवार सुबह विक्की सो रहा था। घर में जन्मदिन के बाद रुके रिश्तेदारों के बच्चों ने स्वीमिंग पुल में नहाने की जिद की। विक्की को भी जबर्दस्ती जगाकर ले गए। उन्हें नहीं पता था कि बेटा आखिरी बार घर से जा रहा है। फिर कभी लाैटकर नहीं आएगा।
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विलाप करते विक्की के पिता - फोटो : अमर उजाला
दोपहर में 4 बजे जैसे ही गोताखोरों ने शव मिलने की जानकारी दी, उनका कलेजा ही बैठ गया। बेटे को उठाकर ला रहे पुलिसकर्मियों को देखकर दहाड़े मारकर रोने लगे। साथ में खड़े भाई भूरी सिंह भी बेहाल हो गए। तभी महिलाएं भी आ गईं। विक्की को गोद में उठाने की कोशिश करने लगीं मगर उन्हें पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। यमुना के किनारे पर शोभा नगर की तरफ बैठी मां गोमती दाैड़ पड़ीं। उन्हें भी परिवार के लोगों ने रोका। वह बेटा-बेटा करते हुए बेहोश हो गईं। परिवार की महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला।
Yamuna Tragedy: Four Deaths Snatched Away Sons, Brothers and Families’ Last Hope
विलाप करती महिला - फोटो : अमर उजाला
हमारा भाई लाैटा दो...
विक्की की बहन मोहिनी, पूनम, संध्या और सलोनी भाई की माैत से बेहाल थीं। वह बार-बार भाई-भाई चिल्ला रही थीं। एक ही बात बोल रही थीं कि हमारे भाई को कहां ले गए। उसे लाैटा दो। उसे फिर कभी कहीं नहीं जाने देंगे। वह तो अभी छोटा है।

 
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विलाप करती बहन - फोटो : अमर उजाला
अब काैन बनेगा बुढ़ापे की लाठी
रिश्तेदार कह रहे थे कि राकेश के बुढ़ापे की लाठी छिन गई। चार बेटियों के बाद बेटा हुआ था। बेटियों की शादी के बाद बेटा ही आखिरी समय में सहारा बनता, लेकिन उसकी माैत से अब काैन सहारा बनेगा।
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