सूर्य की मखमली लालिमा और पक्षियों के प्राकृतिक संगीत के वातावरण में ऊं अर्हं नमः का नाद। ज्ञान और योग मुनियों की अमृत वाणी से सकारात्मकता को ओढ़े भक्ति और ज्ञान का संगम। मानों प्रकृति और योग-ज्ञान के इस माहौल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का तनाव, चिंता, समस्या जैसी हर तकलीफ की गठरी बनकर उनके शरीर से बाहर निकल गई हो। आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज के शिष्यों मुनि प्रणम्य सागर व मुनि चंद्र सागर महाराज ने ताजखेमा के टीले पर ताज के साये में आगरा सहित विभिन्न प्रांतों के हजारों श्रद्धालुओं को अहम का त्याग कर अर्हं का मार्ग दिखा चेतना तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया।
{"_id":"616b9b8679fbeb1d49421415","slug":"om-arhan-namah-will-resonate-tajmahal-tajkhema-at-sunday","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"आगरा: ताजमहल के साये में गूंजा ऊं अर्हं नमः, जैन मुनि प्रणम्य सागर ने दिया लोगों को निरोग रहने का प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: ताजमहल के साये में गूंजा ऊं अर्हं नमः, जैन मुनि प्रणम्य सागर ने दिया लोगों को निरोग रहने का प्रशिक्षण
Sun, 17 Oct 2021 09:15 AM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 17 Oct 2021 09:15 AM IST
विज्ञापन
आगरा: योग करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा: योग मुद्राओं में लोग
- फोटो : अमर उजाला
आगरा दिगम्बर जैन परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुनि प्रणम्य सागर ने अर्हं की पांच मुद्राओं (एक्टीविटी, रिलेक्सेशन, हीलिंग, अवेयरनेस, मोटीवेशन) के माध्यम से तन और मन दोनों को निरोग रखने का प्रशिक्षण दिया। प्रेम, अहिंसा और मैत्री का संदेश देता हरियाली से परिपूर्ण वातावरण में वास्तविक प्रेम की परिभाष से परिचय कराते हुए बताया कि कैसे अपने अंदर के प्रेम को प्रकट किया जाता है और अपनी चेतना के प्रेम को दूसरों तक पहुंचा सकते हैं।
आगरा: ताजमहल के साये में गूंजा ऊं अर्हं नमः
- फोटो : अमर उजाला
मुनि प्रणम्य सागर ने कहा कि बीमारी हमारे शरीर व मन की कमजोरी से आती हैं। चाहें वह कोरोना हो या डेंगू। डाक्टर और वैद्य भी तभी रोग दूर कर पाते हैं, जब हमारा आत्मविश्वास मजबूत हो। यदि हमें खुद अपने ही रोग को दूर करने का विश्वास हो तो यही से स्वस्थ रहने की यात्रा शुरू हो जाएगी। इसके लिए चेतना और आत्मा के विश्वास का होना जरूरी है। ये दो विश्वास होंगे तो प्रकृति भी आपका साथ देगी। सूरज का तेज, पेड़ पौधों की हरियाली, सुहाना वातावरण, अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश सब आपका साथ देंगे और पंचपत्वों की कमी आपके शरीर में कभी नहीं हो पाएगी। आप दुनिया में बड़े-बड़े आश्चर्य करके दिखा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा: योग करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
इनकी रही उपस्थिति
आज के कार्यक्रम मे जहां पूरे देश के विभिन्न प्रान्तों से लोग आए वहीं आगरा नगर के भी सैंकड़ों लोग मौजूद रहे। जिसमें प्रदीप जैन (पीएनसी), जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन ठेकेदार, नीरज जैन, निर्मल मोठ्या, राकेश जैन पर्दा, राजेन्द्र जैन एडवोकेट, मनीश जैन, विमल जैन, पन्नालाल बैनाडा, हीरालाल जैन, चौधरी गौरव जैन, अंकेश जैन, दिलीप जैन, अमित सेठी, राजकुमार राजू, अनन्त जैन आदि प्रमुख थे! संगीत एवं स्वर श्री दीपक जैन, शशी पाटनी, संस्कृति, ख्याती, कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन मुख्य संयोजक मनोज कुमार जैन बाकलीवाल ने कीया।
आज के कार्यक्रम मे जहां पूरे देश के विभिन्न प्रान्तों से लोग आए वहीं आगरा नगर के भी सैंकड़ों लोग मौजूद रहे। जिसमें प्रदीप जैन (पीएनसी), जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन ठेकेदार, नीरज जैन, निर्मल मोठ्या, राकेश जैन पर्दा, राजेन्द्र जैन एडवोकेट, मनीश जैन, विमल जैन, पन्नालाल बैनाडा, हीरालाल जैन, चौधरी गौरव जैन, अंकेश जैन, दिलीप जैन, अमित सेठी, राजकुमार राजू, अनन्त जैन आदि प्रमुख थे! संगीत एवं स्वर श्री दीपक जैन, शशी पाटनी, संस्कृति, ख्याती, कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन मुख्य संयोजक मनोज कुमार जैन बाकलीवाल ने कीया।
विज्ञापन
आगरा: ताजखेमा पर योग करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
जब शाहजहां के पौते से मिले मुनिश्री...
शाहजहां का पौता महाराज से मिला तो बैंक बैलेंस न होने से दुखी होने लगा। कहा कि मेरा दादा इतना दीवाना न होता तो मेरे पास भी बहुत बड़ा बैंक बैलेंस होता। मानस योग के दौरान हृदय को व्यायाम कराने को श्रद्धालुओं को हंसाने के लिए महाराज ने यह जोक सुनाया तो पूरे प्रांगण में ढहाके गूंजने लगे। महाराज ने कहा कि इतनी जोर से हंसिए कि रक्त में इतना बहाव बन जाए कि बीपी, कोलेस्ट्रॉल जैसे सभी रोह बाहर निकल जाएं।
अपने आप को ग्रहणशील बनाएं
ऊं अर्हं ऊं अर्हं ऊं... सत्संग से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में आजकल की भागदौड़ वाली जीवन शैली में तनाव और अवसाद मुक्त रहने के छोटे-छोटे जादुई टिप्स दिए मुनि ने। कहा कि किसी का बुरा सोचने के बजाय अपनी सफलता के बारे में सोचिए और प्रयास करिए। अच्छी बातों के लिए हमाशे ग्रहणशील रहें। होके मायूस न यूं शाम से ढलते रहिए, जिन्दगी भोर है सूरज से निकलते रहिए... पंक्तियों के माध्यम से सकारात्मक रहने का संदेश दिया तो वहीं बताया कि खुश रहने के लिए किसी के साथ की आवश्यकता नहीं। सिखाया कि मेरा सुख मेरा आनन्द मेरी चेतना से झड़ रहा है। मैं अपने आप में पूर्ण हूं। मेरा मन मेरा हृदय सशक्त है। तो आप तन और मन दोनों के सभी गोरों से दूर रहेंगे।
शाहजहां का पौता महाराज से मिला तो बैंक बैलेंस न होने से दुखी होने लगा। कहा कि मेरा दादा इतना दीवाना न होता तो मेरे पास भी बहुत बड़ा बैंक बैलेंस होता। मानस योग के दौरान हृदय को व्यायाम कराने को श्रद्धालुओं को हंसाने के लिए महाराज ने यह जोक सुनाया तो पूरे प्रांगण में ढहाके गूंजने लगे। महाराज ने कहा कि इतनी जोर से हंसिए कि रक्त में इतना बहाव बन जाए कि बीपी, कोलेस्ट्रॉल जैसे सभी रोह बाहर निकल जाएं।
अपने आप को ग्रहणशील बनाएं
ऊं अर्हं ऊं अर्हं ऊं... सत्संग से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में आजकल की भागदौड़ वाली जीवन शैली में तनाव और अवसाद मुक्त रहने के छोटे-छोटे जादुई टिप्स दिए मुनि ने। कहा कि किसी का बुरा सोचने के बजाय अपनी सफलता के बारे में सोचिए और प्रयास करिए। अच्छी बातों के लिए हमाशे ग्रहणशील रहें। होके मायूस न यूं शाम से ढलते रहिए, जिन्दगी भोर है सूरज से निकलते रहिए... पंक्तियों के माध्यम से सकारात्मक रहने का संदेश दिया तो वहीं बताया कि खुश रहने के लिए किसी के साथ की आवश्यकता नहीं। सिखाया कि मेरा सुख मेरा आनन्द मेरी चेतना से झड़ रहा है। मैं अपने आप में पूर्ण हूं। मेरा मन मेरा हृदय सशक्त है। तो आप तन और मन दोनों के सभी गोरों से दूर रहेंगे।