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UP: 'और भी काम रहता है आपने हमें बुला लिया', कोर्ट में जज से बोलीं एसीपी; अवमानना के आरोप में फंसी पुलिस अफसर
Sat, 18 Jul 2026 10:17 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 18 Jul 2026 10:17 AM IST
सार
यूपी के आगरा जिले में कोर्ट में अमर्यादित आचरण करने पर एक पुलिस अफसर की मुश्किल बढ़ गई है। कोर्ट ने पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पुलिस अधिकारी को कोर्ट में हाजिर होकर लिखित स्पष्टीकरण भी देना होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी ने तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त छत्ता श्वेता वर्मा द्वारा अदालत में किए अमर्यादित आचरण पर उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 384 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर 24 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। एसीपी पर आरोप है कि उन्होंने अदालत के आदेशों के पालन में अनावश्यक देरी की। उनसे देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने अमर्यादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा हमें और भी काम रहता है आपने हमें बुला लिया। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि हम करा लेंगे डीएनए।
थाना ट्रांस यमुना के दीपक विहार, टेढ़ी बगिया निवासी आरोपी अर्पित बघेल के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत में लंबित है। विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता का अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी के आपराधिक कृत्य से पीड़िता 33 सप्ताह 10 दिन की गर्भवती है। आरोपी अर्पित बघेल जिला कारागार में निरुद्ध है। सहायक पुलिस आयुक्त छत्ता ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर आरोपी के डीएनए जांच का आदेश देने का आग्रह किया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोहित शेखर बनाम एनडी तिवारी (पूर्व मुख्यमंत्री) एवं अन्य के मामले में पारित नजीर का हवाला देते हुए आरोपी के डीएनए के आदेश पारित कर दिए थे।
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थाना ट्रांस यमुना के दीपक विहार, टेढ़ी बगिया निवासी आरोपी अर्पित बघेल के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी की अदालत में लंबित है। विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता का अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी के आपराधिक कृत्य से पीड़िता 33 सप्ताह 10 दिन की गर्भवती है। आरोपी अर्पित बघेल जिला कारागार में निरुद्ध है। सहायक पुलिस आयुक्त छत्ता ने अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर आरोपी के डीएनए जांच का आदेश देने का आग्रह किया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोहित शेखर बनाम एनडी तिवारी (पूर्व मुख्यमंत्री) एवं अन्य के मामले में पारित नजीर का हवाला देते हुए आरोपी के डीएनए के आदेश पारित कर दिए थे।
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अदालत ने अपने आदेश में अंकित किया कि उक्त आदेश की समाप्ति पूर्व प्रश्न गत प्रकरण की विवेचक अदालत की गरिमा के प्रतिकूल, अमर्यादित, अवज्ञा पूर्ण तथा उपेक्षा पूर्ण आचरण तथा व्यवहार एवं भाव भंगिमाओं का अभिलेख पर उल्लेख किया जाना आवश्यक एवं अनिवार्य है। आरोपी अर्पित बघेल के डीएनए जांच की अनुमति के लिए प्रार्थनापत्र विवेचक द्वारा हस्ताक्षर कर 4 जुलाई, 2026 को विवेचक श्वेता वर्मा के अधीनस्थ द्वारा अदालत में प्रस्तुत किया गया। इस पर अदालत ने आरोपी को 6 जुलाई 2026 को जिला कारागार से तलब किया। उक्त विवेचक के अधीनस्थ द्वारा 14 जुलाई को फिर आरोपी का डीएनए कराने के आदेश हेतु 4 जुलाई का आदेश संलग्न कर प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। दोनों प्रार्थनापत्र में समान तथ्य अंकित थे।
4 जुलाई को पारित आदेश का अनुपालन नहीं करने पर विवेचक के अधीनस्थ को नवीन तथ्यों एवं न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हुए विलंब के स्पष्टीकरण के साथ प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने के मौखिक आदेश दिए गए थे। 15 जुलाई को फिर विवेचक द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर कर अधीनस्थ के माध्यम से आरोपी का डीएनएन कराने के आदेश देने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर विलंब का कारण राजकीय कार्य सरकार की व्यस्तता होना दर्शाया। इस पर अदालत ने आरोपी को 16 जुलाई, 2026 को जिला कारागार से तलब किया। 16 जुलाई को सहायक पुलिस आयुक्त छत्ता अदालत के समक्ष उपस्थित हुईं। विलंब का कारण पूछा गया। इस पर विवेचक ने अदालत की गरिमा के प्रतिकूल, अमर्यादित एवं अपमान जनक तौर पर न्यायालय के समक्ष कहा कि हमें और भी काम रहता है आपने हमें बुला लिया। विवेचक ने अत्यंत ही अशिष्ट पूर्ण तथा अंहकार पूर्ण तरीके से अदालत के समक्ष टिप्पणी की कि हम करा लेंगे डीएनए।
एसीपी पर अवमानना का आरोप
अदालत ने कहा कि श्वेता वर्मा पुलिस वेशभूषा में उपस्थित हुईं। इसके बाद भी पुलिस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने न्यायालय के प्रति अनादर की भावना प्रदर्शित की। उनके कृत्य को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 267 के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। उनके विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 384 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर 24 जुलाई, 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हो लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दे दिए। आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को प्रेषित की गई है, कि उक्त मुकदमे की विवेचना अपने पर्यवेक्षण में वरिष्ठ अधिकारी से कराएं।
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अदालत ने कहा कि श्वेता वर्मा पुलिस वेशभूषा में उपस्थित हुईं। इसके बाद भी पुलिस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने न्यायालय के प्रति अनादर की भावना प्रदर्शित की। उनके कृत्य को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 267 के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। उनके विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 384 के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज कर 24 जुलाई, 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हो लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दे दिए। आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को प्रेषित की गई है, कि उक्त मुकदमे की विवेचना अपने पर्यवेक्षण में वरिष्ठ अधिकारी से कराएं।
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