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Cashless Treatment: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को राहत, बढ़ सकती है कैशलेस इलाज की सीमा; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Fri, 10 Apr 2026 11:44 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 10 Apr 2026 11:44 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसा पीड़ितों के कैशलेस इलाज की 1.5 लाख रुपये की सीमा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने सरकार और समिति से इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा है।
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केसी जैन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस इलाज से जुड़े मामले की सुनवाई की। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केबी विश्वनाथन की खंडपीठ ने इस विषय पर गहरी चिंता जताई। किसी भी सड़क दुर्घटना पीड़ित को अधिकतम 1.50 लाख और सात दिन तक का ही कैशलेस इलाज मिलता है, लेकिन अब इस सीमा को बढ़ाने की उम्मीद जग गई है।
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कोर्ट ने 6 अप्रैल को सौंपी गई समिति की रिपोर्ट पर विचार किया। रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस बात की निगरानी करें कि क्या 1.50 लाख या सात दिन की सीमा में पीड़ितों का सही इलाज हो पा रहा है या नहीं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन ने कोर्ट के सामने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 162(1) के तहत बीमा कंपनियों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के इलाज के लिए एक अलग योजना बनानी चाहिए।
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उन्होंने दलील दी कि जब किसी दुर्घटनाग्रस्त वाहन का थर्ड पार्टी बीमा है और बीमा कंपनी की देनदारी की कोई मौद्रिक सीमा नहीं होती तो इलाज पर 1.50 लाख या सात दिन की समय सीमा क्यों लगाई जाए? आखिरकार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का अवार्ड मिलने पर बीमा कंपनी ही सारा खर्च चुकाती है तो फिर घायल को समय पर इलाज क्यों न मिले? कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए न्याय मित्र गौरव अग्रवाल, सड़क मंत्रालय व समिति को कहा कि वह इस पर विचार कर अगली सुनवाई में अपना मत रखें।
60 हजार तक में हो रहा 98% पीड़ितों का इलाज
समिति ने खुद स्वीकार किया कि 98% पीड़ितों का इलाज 60 हजार के भीतर हो जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाएं अक्सर बहुत गंभीर होती हैं और ऐसे में मौजूदा सीमा नाकाफी हैं। इसलिए समिति ने भी सीमा बढ़ाने की उम्मीद जताई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 2019 से 2021 के बीच के मोटर व्हीकल नियम उल्लंघन के मामलों को बंद करने के लिए पारित किए गए कानून का मसला भी सामने आया। यूपी सरकार के वकील ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा और मंत्रिपरिषद ने इसे मंजूरी दे दी है। हालांकि, जो मामले गैर-शमनीय अपराधों से जुड़े हैं या जहां बार-बार उल्लंघन हुए हैं, वे मामले दोबारा जीवित किए जाएंगे और न्यायालय में मुकदमे पुन: चलेंगे।
समिति ने खुद स्वीकार किया कि 98% पीड़ितों का इलाज 60 हजार के भीतर हो जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाएं अक्सर बहुत गंभीर होती हैं और ऐसे में मौजूदा सीमा नाकाफी हैं। इसलिए समिति ने भी सीमा बढ़ाने की उम्मीद जताई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 2019 से 2021 के बीच के मोटर व्हीकल नियम उल्लंघन के मामलों को बंद करने के लिए पारित किए गए कानून का मसला भी सामने आया। यूपी सरकार के वकील ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा और मंत्रिपरिषद ने इसे मंजूरी दे दी है। हालांकि, जो मामले गैर-शमनीय अपराधों से जुड़े हैं या जहां बार-बार उल्लंघन हुए हैं, वे मामले दोबारा जीवित किए जाएंगे और न्यायालय में मुकदमे पुन: चलेंगे।
अधिवक्ता केसी जैन ने इस कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना इस तरह का कानून बनाना अवैध है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के मामले में देश में कई वर्षों से पहले स्थान पर है। ऐसे में ट्रैफिक नियमों के डर का कारक खत्म करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।अधिवक्ता जैन की दाखिल अन्य तीन याचिकाएं भी 12 मई, 2026 को सूचीबद्ध की जाएंगी। उस दिन कैशलेस इलाज की सीमा बढ़ाने पर भी अहम फैसला आने की संभावना है।