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रोहित शेट्टी फायरिंग केस: विष्णु को बनना था फौजी, इस तरह बना लॉरेंस बिश्नोई गैंग का शूटर; जानें कहानी
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 17 Feb 2026 08:58 AM IST
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सार
बॉलीवुड डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग केस में एसटीएफ ने जिन सात बदमाशों को गिरफ्तार किया है, उनमें किसान का बेटा विष्णु भी शामिल है। विष्णु कब अपराधी बन गया, घरवालों को पता ही नहीं चला। वो फौजी बनना चाहता था।
विष्णु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
एसटीएफ ने विष्णु की गिरफ्तारी के लिए गांव बिजाैली में दबिश दी। पहले परिजन समझे थे कि बदमाशों ने धावा बोला है। उन्होंने 112 नंबर मिलाया। टीम ने भाइयों विष्णु और दिनेश को उठाया। इनमें से एक को छोड़ दिया गया। बाद में परिजन को एसटीएफ की गिरफ्तारी के बारे में पता चला।
फिरोजाबाद के हरिया गांव के रहने वाले सूरजपाल 1985 में बिजाैली आए थे। यहीं पर बस गए। वह छोटे बेटे विष्णु को फौजी बनाना चाहते थे। उसने बीए तक पढ़ाई की है। फौज में भर्ती होने की तैयारी भी कर रहा था। दो महीने पहले दिल्ली से घर आया था। तब से गांव में सुबह-शाम जिम पर रहता था। खेती में हाथ बंटाता था। जिम में पक्की तलैया बाह का प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित आता था। उसने ही बेटे को फंसाया। दो बड़े बेटे संतोष एवं दिनेश कैटर्स का काम करते हैं। वह परिवार के साथ 1985 में फिरोजाबाद के हरिया गांव से आकर बिजौली में बसे थे। ट्यूबवेल पर कुछ साल पहले उनके पिता की हत्या कर दी गई थी।
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फिरोजाबाद के हरिया गांव के रहने वाले सूरजपाल 1985 में बिजाैली आए थे। यहीं पर बस गए। वह छोटे बेटे विष्णु को फौजी बनाना चाहते थे। उसने बीए तक पढ़ाई की है। फौज में भर्ती होने की तैयारी भी कर रहा था। दो महीने पहले दिल्ली से घर आया था। तब से गांव में सुबह-शाम जिम पर रहता था। खेती में हाथ बंटाता था। जिम में पक्की तलैया बाह का प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित आता था। उसने ही बेटे को फंसाया। दो बड़े बेटे संतोष एवं दिनेश कैटर्स का काम करते हैं। वह परिवार के साथ 1985 में फिरोजाबाद के हरिया गांव से आकर बिजौली में बसे थे। ट्यूबवेल पर कुछ साल पहले उनके पिता की हत्या कर दी गई थी।
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रविवार में एसटीएफ की टीम आई। दबिश देकर विष्णु और दिनेश को ले गई। घर में तलाशी के दाैरान तोड़फोड़ भी कर दी। परिजन को लगा कि बदमाश आ गए हैं। इसलिए परिवार की विनीता ने पुलिस को सूचना दी। बाद में पुलिस बड़े भाई दिनेश को घर पर छोड़ गई, वह दो दिन पहले ही गुजरात से घर आया था। कैटरिंग का काम करता है। घर पर छापेमारी के बाद पुलिस ट्यूबवेल पर पहुंची थी। कोठरी एवं झोपड़ी खंगाली थी। विष्णु कुशवाह के पकड़े जाने के बाद सूरजपाल और उनकी पत्नी रामसखी की आंखों में आंसू नहीं रुक रहे। उन्होंने बताया कि खेती-बाड़ी एवं ट्रैक्टर चलाकर अपनी गुजर-बसर करते हैं। वहीं बिजौली का सनी भी मुंबई में नौकरी करता है। उसके पिता राकेश कुमार मजदूरी करते हैं।
विदेश में बैठे हरि बाक्सर के संपर्क में था दीपक
एसटीएफ के मुताबिक, दीपक शर्मा विदेश में बैठे हरि बॉक्सर के संपर्क में था। उसी ने रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग कराई थी। वारदात के पीछे शुभम लोनकर गिरोह ने मुख्य रूप से टारगेट दिया था। सनी और सोनू ने उनके घर के बाहर रेकी की थी। रितिक यादव ने दीपक और उसके साथियों की छिपने में मदद की थी। गिरफ्त में आए सभी बदमाश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आरोपियों ने आपस में संपर्क और योजना बनाने के लिए सिग्नल एप का इस्तेमाल किया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों और फंडिंग स्रोतों की जानकारी जुटाई रही है।
एसटीएफ के मुताबिक, दीपक शर्मा विदेश में बैठे हरि बॉक्सर के संपर्क में था। उसी ने रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग कराई थी। वारदात के पीछे शुभम लोनकर गिरोह ने मुख्य रूप से टारगेट दिया था। सनी और सोनू ने उनके घर के बाहर रेकी की थी। रितिक यादव ने दीपक और उसके साथियों की छिपने में मदद की थी। गिरफ्त में आए सभी बदमाश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आरोपियों ने आपस में संपर्क और योजना बनाने के लिए सिग्नल एप का इस्तेमाल किया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों और फंडिंग स्रोतों की जानकारी जुटाई रही है।
टाइम रहते सुधर जाओ...
फिल्म निर्माता पर हमले की जिम्मेदारी शुभम लोनकर आरजू नाम के एकाउंट से फेसबुक पोस्ट में लॉरेंस गैंग ने ली थी। जिसमें लिखा गया था कि अगली बार छाती पर गोली लगेगी। सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर। आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे।
फिल्म निर्माता पर हमले की जिम्मेदारी शुभम लोनकर आरजू नाम के एकाउंट से फेसबुक पोस्ट में लॉरेंस गैंग ने ली थी। जिसमें लिखा गया था कि अगली बार छाती पर गोली लगेगी। सभी भाइयों को आज जो ये मुंबई में (शेट्टी टावर) फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई है, उसकी जिम्मेदारी शुभम लोनकर, आरजू बिश्नोई, हरि बॉक्सर, हरमन संधू हम लेते हैं। हमने इसको बहुत बार मैसेज लगाया कि हमारे काम में दखल ना दे, लेकिन इसको समझ में नहीं आया। इसको ये छोटा सा ट्रेलर दिया है। अगर इसने आगे फिर हमारी बात नहीं समझी और हमारी बात नहीं मानी, तो अब घर के बाहर नहीं, अंदर इसके बेडरूम में गोली चलेगी, इसकी छाती पर। आगे बॉलीवुड को चेतावनी है कि टाइम रहते सुधर जाओ, नहीं तो बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारा बाबा सिद्दीकी से भी बुरा हाल करेंगे।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था गोलू पंडित
9 जून 2025 को प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित को राजस्थान के गंगानगर की पुलिस ने कारोबारी पर जानलेवा हमले के आरोप में गिरफ्तार किया था। जमानत पर छूटने के बाद वह फिर से सक्रिय हो गया था। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 16 जनवरी को प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित को उत्तम नगर इलाके से गिरफ्तार किया था।
9 जून 2025 को प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित को राजस्थान के गंगानगर की पुलिस ने कारोबारी पर जानलेवा हमले के आरोप में गिरफ्तार किया था। जमानत पर छूटने के बाद वह फिर से सक्रिय हो गया था। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 16 जनवरी को प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू पंडित को उत्तम नगर इलाके से गिरफ्तार किया था।
40 साल रही थी डकैतों की दहशत
1950 से 1990 के दशक तक यमुना व चंबल के बीहड़ में डकैतों की तूती बोलती थी। अपहरण उद्योग डर और दहशत की वजह था। मान सिंह, मोहर सिंह, माधौ सिंह, रज्जन गुर्जर, जगजीवन परिहार, निर्भय गुर्जर, लवली पांडेय जैसे गिरोह बीहड़ में दहशत का पर्याय थे। सर्वोदयी नेता विनोवा भावे की पहल से डकैतों ने हथियार डाले तो चंबल में शांति अमन का माहौल लौटा था।
1950 से 1990 के दशक तक यमुना व चंबल के बीहड़ में डकैतों की तूती बोलती थी। अपहरण उद्योग डर और दहशत की वजह था। मान सिंह, मोहर सिंह, माधौ सिंह, रज्जन गुर्जर, जगजीवन परिहार, निर्भय गुर्जर, लवली पांडेय जैसे गिरोह बीहड़ में दहशत का पर्याय थे। सर्वोदयी नेता विनोवा भावे की पहल से डकैतों ने हथियार डाले तो चंबल में शांति अमन का माहौल लौटा था।