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150 साल तक ऐसा दिखता था ताजमहल, देखिए मोहब्बत की निशानी की खूबसूरत तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 23 Jun 2018 12:44 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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मोहब्बत की निशानी ताजमहल के एक दीदार के लिए पूरी दुनिया खिंची चली आती है। आज हम आपके सामने ताजमहल के उन दिनों की तस्वीर पेश कर रहे हैं जब इसकी एक झलक पाने के लिए मुख्य गुंबद तक जाना पड़ता था। करीब 150 साल तक ताजमहल बेहद ऊंचे और घने पेड़ों से ढका रहा, जिसका रॉयल गेट से केवल गुंबद वाला हिस्सा ही नजर आता था।
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिश राज के दौरान ताज घूमने आए लार्ड हेस्टिंग्स को 1815 में आम के पेड़ों के कारण ताज का मुख्य मकबरा देखने में दिक्कत आई। 18वीं सदी में ही जनकवि नजीर अकबराबादी ने ताज में ऊंचे पेड़ों पर कविता लिखी। 1854 और 1862 में हैंडबुक आफ ताज में बरगद, बांस, अमरूद, आम, नीबू, पाम, मौलश्री, सेमल के पेड़ होने का जिक्र किया गया है। 1792 और 1862 के फोटो में ताज के चित्र में यह नजर भी आते हैं।
ताजमहल्र
- फोटो : अमर उजाला
कर्नल रावलेट ने पहली बार ताजमहल में कॉपर और चीनी मिट्टी की भूमिगत पाइप लाइन की मरम्मत कराई। पश्चिमी गेट स्थित खान ए आलम नर्सरी से ताज की नहर और सेंट्रल टैंक के फव्वारों के लिए पानी इन्हीं पाइप से आता था। 1904 में लार्ड कर्जन ने कलकत्ता में विधान परिषद को ताज के बाग के संरक्षण के बारे में बताया और उसके बाद ही बाग के पुनरुद्धार और छोटे पेड़ों को लगाने का सिलसिला शुरू हुआ ताकि ताज देखने में व्यवधान न पड़े।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
लार्ड कर्जन ने ही संगमरमरी सेंट्रल टैंक पर संगमरमर की चार बेंच लगवाईं, जिन्हें अब डायना बेंच के नाम से जानते हैं। संगमरमर से पहले यहां लकड़ी की बेंच लगी थीं। पेड़ों के कारण सेंट्रल टैंक से ही ताज की चारों मीनारें और गुंबद नजर आता था। नहर किनारे के ऊंचे पेड़ों को हटाकर यहां साइप्रस के पेड़ एक कतार में लगाए गए।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
1905 में मो. मुईनुद्दीन ने अपनी किताब में दावा किया कि ताजमहल में 48 फुट 9 इंच लंबा 425 साल पुराना पेड़ है। उन्होंने अपनी किताब में मौलश्री, सेब, संतरा, आम, नारियल के पेड़ के साथ गेंदा, गुलाब के फूलदार पौधे नहर के किनारे लगे होने का जिक्र किया था।यूरोपीय यात्री बर्नियर ने भी ताज में घने पेड़ और खुशबूदार पौधों के साथ फलदार पेड़ों का ब्योरा दिया था।