आगरा जनपद के बाह क्षेत्र के बीहड़ में बसे सुंसार गांव का सात किलोमीटर का कच्चा रास्ता बारिश के कारण दलदल में तब्दील हो गया है। गांव की बीमार महिला गुड्डी देवी को अस्पताल ले जा रहा ट्रैक्टर उसमें फंस गया, इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई। ट्रैक्टर निकालकर मुख्य मार्ग तक पहुंचने में ही पांच घंटे लग गए थे। रास्ते की इस बदहाली पर गांववालों में रोष भी है। परिजनों का कहना है यदि सही समय पर अस्पताल पहुंच जाते तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
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बीहड़ में विकास का हाल: कीचड़ में फंसा ट्रैक्टर, बीमार महिला की मौत, समय पर नहीं पहुंच पाई अस्पताल
Mon, 10 Jan 2022 12:06 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 10 Jan 2022 12:06 AM IST
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सात किमी तक है कच्चा रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
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कीचड़ में फंसा ट्रैक्टर
- फोटो : अमर उजाला
कीचड़ में फंसने के कारण ट्रैक्टर को मुख्य मार्ग तक पहुंचने में पांच घंटे लग गए। यहां से इलाज के लिए आगरा ले जाते समय अरनौटा के पास गुड्डी देवी की मौत हो गई। मृतका का एक बेटा तेजपाल और बेटी खुशी (15) हैं।
बारिश से रास्ते पर हुआ कीचड़
- फोटो : अमर उजाला
तेजपाल और गांव के प्रधान रामनाथ ने बताया कि यदि रास्ता ठीक होता तो गुड्डी को समय पर अस्पताल लेकर पहुंचा जा सकता था और जान बचाई जा सकती थी। सड़क बनवाने के लिए बीडीओ से कई बार मांग की जा चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार प्रदर्शन और चुनाव बहिष्कार की घोषणा के बाद भी गांव की सड़क नहीं बन सकी है।
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बीहड़ के कच्चे रास्ते (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
सीडीओ की गाड़ी भी फंसी थी
यमुना के बीहड़ में बसे सुंसार गांव में 23 दिसंबर को विकास कार्यों की जांच के लिए सीडीओ ए मनिकन्डन गए थे। गांव के लिए सात किलोमीटर ऊखड़-खाबड़ रास्ते में उनकी भी गाड़ी फंस गई थी। वह किसी तरह दूसरी गाड़ी से वह गांव पहुंच सके थे। तब गांववालों ने उन्हें सड़क की समस्या बताई थी। इस पर उन्होंने वन विभाग के रेंजर को तलब कर रास्ते की समस्या को दूर कराने के लिए कहा था। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ है।
यमुना के बीहड़ में बसे सुंसार गांव में 23 दिसंबर को विकास कार्यों की जांच के लिए सीडीओ ए मनिकन्डन गए थे। गांव के लिए सात किलोमीटर ऊखड़-खाबड़ रास्ते में उनकी भी गाड़ी फंस गई थी। वह किसी तरह दूसरी गाड़ी से वह गांव पहुंच सके थे। तब गांववालों ने उन्हें सड़क की समस्या बताई थी। इस पर उन्होंने वन विभाग के रेंजर को तलब कर रास्ते की समस्या को दूर कराने के लिए कहा था। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ है।
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बीहड़ में हैं ऐसी पगडंडियां
- फोटो : अमर उजाला
वन विभाग से नहीं मिलती अनुमति
खंड विकास अधिकारी अतिरंजन सिंह ने बताया कि सुंसार का इलाका संरक्षित बीहड़ क्षेत्र में आता है। यहां सड़क बनाने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है, जो मिल नहीं पाती है। वहीं गांव के लिए सात किलोमीटर लंबी सड़क की जरूरत है, इतना मद विकास विभाग के पास नहीं होता है। यह सड़क लोक निर्माण विभाग से ही बन सकती है।
खंड विकास अधिकारी अतिरंजन सिंह ने बताया कि सुंसार का इलाका संरक्षित बीहड़ क्षेत्र में आता है। यहां सड़क बनाने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है, जो मिल नहीं पाती है। वहीं गांव के लिए सात किलोमीटर लंबी सड़क की जरूरत है, इतना मद विकास विभाग के पास नहीं होता है। यह सड़क लोक निर्माण विभाग से ही बन सकती है।