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UP: मिनी एम्स बनेगा आगरा का SN मेडिकल कॉलेज, कैंसर-किडनी जैसे रोगों के होंगे इलाज; दिल्ली से भी आएंगे मरीज

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 17 Apr 2026 02:48 PM IST
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सार

आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अगले 4-5 वर्षों में मिनी एम्स के रूप में विकसित होगा, जहां 10 नए ब्लॉक बनाए जाएंगे। यहां कैंसर, हृदय, किडनी, लिवर समेत गंभीर बीमारियों के आधुनिक इलाज, ऑपरेशन और जांच की सुविधाएं मिलेंगी।

SN Medical College to Become Mini AIIMS in 4-5 Years Advanced Treatment for Cancer, Heart and Kidney Diseases
एसएन मिनी एम्स जैसा - फोटो : AI
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विस्तार

अगले चार से पांच साल और एसएन मिनी एम्स जैसा होगा। इसमें 10 नए ब्लॉक बन जाएंगे। हृदय, फेफड़े, किडनी, लिवर कैंसर समेत अन्य गंभीर रोगों का एडवांस इलाज ऑपरेशन और जांचों की सुविधा मिलेगी। आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे भविष्य में दिल्ली समेत आसपास के राज्यों से भी मरीज यहां इलाज कराने के लिए आएंगे।
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इंटीग्रेटेड प्लान के तहत लेडी लॉयल और एसएन को एक किया गया है। इससे एसएन मेडिकल कॉलेज 45 एकड़ जमीन में बन रहा है। इसमें 1000 से 1200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 10 बहुमंजिला इमारतें बनेंगी, जिसमें संबंधित बीमारियों की ओपीडी, वार्ड, जांच और ऑपरेशन की सुविधा होगी। यहां कैंसर, किडनी, लिवर, हृदय रोग, पेट रोग समेत अन्य गंभीर रोगों के मरीजों का इलाज और ऑपरेशन की सुविधा होगी। स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं को देखते हुए दिल्ली, जयपुर समेत आसपास के जिलों के मरीज भी यहां इलाज कराने के लिए आएंगे। अभी आगरा और अलीगढ़ मंडल के अधिकांश मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।
 
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अमर उजाला बना मिनी एम्स की आवाज
शहर और आसपास के जिलों के मरीजों के इलाज की जरूरत को देखते हुए एसएन के मिनी एम्स बनाने की आवाज सबसे पहले अमर उजाला ने बुलंद की। चरणबद्ध खबरें लिखते इस मुहिम को आगे बढ़ाया। इससे प्रेरणा लेते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। इस तरह से मिनी एम्स का सपना अगले 4-5 साल में पूरा हो जाएगा।
 

अंग्रेज अफसर जेम्स थॉमसन अस्पताल थे संस्थापक
1854 में ब्रिटिश राज में संस्थापक लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन के नाम पर थॉमसन अस्पताल रखा गया। 1857 में थॉमसन स्कूल से भारतीय डॉक्टरों का पहला बैच पास आउट हुआ। सर्जन जॉन मरे 1854 से 1858 तक स्कूल के पहले प्राचार्य रहे। 1872 से नागरिक छात्रों को भी एलएमपी पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाने लगा। बाद में उत्तर प्रदेश राज्य चिकित्सा संकाय की ओर से एलएसएमएफ में बदल दिया गया। 1883 में छात्राओं के चिकित्सा प्रशिक्षण के लिए एक अलग विभाग के रूप में लेडी लायल अस्पताल की स्थापना की गई। महिला डॉक्टरों का पहला बैच 1886 में पास आउट हुआ। 1939 में संयुक्त प्रांत में डॉक्टरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आगरा मेडिकल स्कूल को पूर्ण विकसित मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नत किया गया। एमबीबीएस का पहला बैच 1944 में उत्तीर्ण हुआ। इनको आगरा विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री दी गई। 1947 में मेडिकल स्कूल का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल, कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी भरत कोकिला के नाम पर सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज कर दिया गया। 1948 में एसएन मेडिकल कॉलेज को भारतीय चिकित्सा परिषद और ग्रेट ब्रिटेन की सामान्य चिकित्सा परिषद की ओर से मान्यता प्राप्त हुई ।

 

ये है स्थिति:
200: सीटें स्नातक में
216: सीटें परास्नातक में
248: चिकित्सक शिक्षक।
1450: बेड हैं अस्पताल में
 

पहले चरण में इनका हो रहा निर्माण: एसए
एकेडमिक ब्लॉक
एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक
इमरजेंसी एंड ट्रामा सेंटर: 200 बेड
सर्जिकल एलाइड ब्लॉक: 300 बेड
मेडिसिन एलाइड ब्लॉक: 300 बेड
क्रिटिकल केयर ब्लॉक: 100 बेड

दूसरे चरण में इनका होगा निर्माण: 
कैंसर ब्लॉक: 300 बेड
सर्जिकल ब्लॉक: 300 बेड
पीडियाट्रिक ब्लॉक: 250 बेड
पैरामेडिकल ब्लॉक

पांच साल में मिनी एम्स लेगा साकार
पांच साल में एसएन मेडिकल काॅलेज का इंटीग्रेटेड प्लान पूरा हो जाएगा। इससे लगभग सभी तरह की बीमारियों का इलाज, जांच और ऑपरेशन मिल सकेंगे। इससे आसपास के जिलों के मरीजों के अलावा दिल्ली-जयपुर से भी मरीज इलाज कराने के लिए आएंगे।- डॉ. प्रशांत गुप्ता, प्राचार्य


 
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