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UP: बड़ा मशहूर है आगरा का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, कब और कैसे हुई थी इसकी स्थापना? बेहद रोचक है कहानी
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 17 Apr 2026 03:02 PM IST
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सार
आगरा का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान 1859 में अंग्रेज अफसरों के इलाज के लिए स्थापित किया गया था, जो अब आधुनिक उपचार केंद्र बन चुका है। यहां आज चुंबक तकनीक, स्लीप लैब और 24 घंटे टेलीमानस सेवा के जरिए मानसिक रोगियों का इलाज किया जा रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान आगरा
- फोटो : AI
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विस्तार
अंग्रेजों ने भी नहीं सोचा होगा कि 1857 की क्रांति का विद्रोह ऐसा होगा कि दिमागी संतुलन ही बिगड़ जाएगा। जब पूरे देश में गुलामी के खिलाफ बिगुल बजा तो अंग्रेज भयभीत हो गए। लंबे समय तक तनाव से उनकी मनोदशा ही बिगड़ गई। ऐसे में इनके इलाज के लिए आगरा में 1859 में मेंटल हॉस्पिटल की नींव रखी। इसमें शुरुआत में इलेक्टि्रक शॉक देकर उपचार किया जाता था। 167 साल में उपचार में भी क्रांतिकारी बदलाव हुए। अब चुंबक विधि से मानसिक विकार ठीक किए जा रहे हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि 1857 की क्रांति होने पर अंग्रेज अफसर लेफ्टिनेंट गवर्नर जेआर केल्विन की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद ऐसे कई अफसरों को परेशानी होने लगी। ये पूरी जानकारी ब्रिटिश शासन को पहुंची। इसे गंभीरता से लेते हुए महारानी क्वीन विक्टोरिया ने आगरा में इसके लिए विशेष अस्पताल खोलने के आदेश दिए। इस पर 1859 में मेंटल हॉस्पिटल की शुरुआत हुई। तब इसमें अंग्रेजों का ही इलाज होता था।
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इसमें इलेक्टि्रक शॉक देकर भी उपचार किया जाता था। इसमें मरीज को कष्ट होता था। एक तरह से यहां जेल की तरह की व्यवस्थाएं संचालित होती थीं। इसी के कारण इसके प्रभारी जेल के आईजी हुआ करते थे। धीरे-धीरे मानसिक रोगों के इलाज में बदलाव आया। अब इलेक्टि्रक शॉक देने की जरूरत नहीं है। ये विधि खत्म कर दी है। अब रिपीटेड ट्रांस क्रैनियल मैग्नेटिक सिमुएलेशन (आरटीएमएस) विधि से इलाज हो रहा है। इससे चुंबक विधि से मरीज का उपचार किया जाता है।
24 घंटे फोन पर मानसिक रोगों का परामर्श
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में अब टेलीमानस भी संचालित हो रहा है। इसमें 24 घंटे ऑनलाइन परामर्श की सुविधा है। यहां हेल्पलाइन नंबर 14414 पर फोन करने पर विशेषज्ञ परामर्श देते हैं। इससे मानसिक विकारों से जूूझ रहे मरीजों को घर बेठे ही उपचार मिल रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में अब टेलीमानस भी संचालित हो रहा है। इसमें 24 घंटे ऑनलाइन परामर्श की सुविधा है। यहां हेल्पलाइन नंबर 14414 पर फोन करने पर विशेषज्ञ परामर्श देते हैं। इससे मानसिक विकारों से जूूझ रहे मरीजों को घर बेठे ही उपचार मिल रहा है।
स्लीप लैब में निगरानी...फिर शुरू होता है उपचार
संस्थान निदेशक ने बताया कि अस्पताल में अब नींद के जरिये बीमारी ठीक हो रही हैं। इसमें स्लीप लैब बनी है। इसमें वीडियो पॉलीसोमनोग्राफी मशीन लगी है। इसमें मरीज को एक रात के लिए भर्ती करते हैं। इसमें मरीज के मस्तिष्क, हृदय और नाक में इलेक्ट्रोड लगाए जाएंगे। 6-8 घंटे में मस्तिष्क की तरंगों से जानकारी करते हैं कि किस घंटे में स्वस्थ नींद आई, किस समय नींद प्रभावित हुई। हृदय कितनी बार धड़का, किस समय ज्यादा धड़कनें हुईं, किस समय कम हुईं।
संस्थान निदेशक ने बताया कि अस्पताल में अब नींद के जरिये बीमारी ठीक हो रही हैं। इसमें स्लीप लैब बनी है। इसमें वीडियो पॉलीसोमनोग्राफी मशीन लगी है। इसमें मरीज को एक रात के लिए भर्ती करते हैं। इसमें मरीज के मस्तिष्क, हृदय और नाक में इलेक्ट्रोड लगाए जाएंगे। 6-8 घंटे में मस्तिष्क की तरंगों से जानकारी करते हैं कि किस घंटे में स्वस्थ नींद आई, किस समय नींद प्रभावित हुई। हृदय कितनी बार धड़का, किस समय ज्यादा धड़कनें हुईं, किस समय कम हुईं।
नाक के जरिये ऑक्सीजन की मात्रा कितनी रही। रक्तचाप कितना है। मशीन में ये सभी रिकाॅर्ड हो जाते हैं। कक्ष में सीसीटीवी कैमरे से मरीज कितनी बार करवटें लीं, बेचैनी-घबराहट तो नहीं हो रही। ये भी कैमरे में रिकार्ड करते हैं। ये पूरी प्रक्रिया होने के बाद वैज्ञानिक ढंग से इन रिकार्ड तथ्यों का अध्ययन कर अनिद्रा की वजह तलाश कर इलाज करते हैं। नींद न आना, कई घंटे सोने पर भी सुस्ती रहना या फिर नींद की गोलियां लेने वाले मरीज इसका लाभ ले रहे हैं। अभी तक 80 से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एक नजर:
- 1905 तक आईजी जेल ही मेंटल हॉस्पिटल के प्रभारी रहे।
-1934 में पहले भारतीय डॉ. बनारसी दास प्रथम चिकित्सा अधीक्षक बने।
- 1950 में मानसिक स्वास्थ्य की पहली बर दवा बनाई गई।
- 1955 चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस लाल ने एमडी सायकेट्री का प्रशिक्षण शुरू किया। -1957-1975 तक यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध का केंद्र रहा।
- 2009 में एमडी सायकेट्री, एमफिल क्लिनिकल साइकोलॉजी, एमफिलसाइकियाट्रिक, सोशल वर्क व नर्सिंग के पाठ्यक्रम शुरू हुए, वृद्धजन मनोरोग क्लीनिक, साइको-सेक्सुअल क्लीनिक, बाल व किशोरावस्था क्लीनिक की विशेष ओपीडी संचालित की जाती हैं।
- 1905 तक आईजी जेल ही मेंटल हॉस्पिटल के प्रभारी रहे।
-1934 में पहले भारतीय डॉ. बनारसी दास प्रथम चिकित्सा अधीक्षक बने।
- 1950 में मानसिक स्वास्थ्य की पहली बर दवा बनाई गई।
- 1955 चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस लाल ने एमडी सायकेट्री का प्रशिक्षण शुरू किया। -1957-1975 तक यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध का केंद्र रहा।
- 2009 में एमडी सायकेट्री, एमफिल क्लिनिकल साइकोलॉजी, एमफिलसाइकियाट्रिक, सोशल वर्क व नर्सिंग के पाठ्यक्रम शुरू हुए, वृद्धजन मनोरोग क्लीनिक, साइको-सेक्सुअल क्लीनिक, बाल व किशोरावस्था क्लीनिक की विशेष ओपीडी संचालित की जाती हैं।
आगरा का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थिति:
- 172 एकड़ में फैला हुआ है संस्थान
- 26 से ज्यादा भवन हैं परिसर में
- 550 मरीज वर्तमान में भर्ती हैं।
- 300 मरीज ओपीडी में लेते हैं परामर्श
- 05प्रोफेसर, 04 सीनियर रेजिडेंट, 04मेडिकल ऑफिसर, 24 जूनियर रेजिडेंट
- 60 हजार से अधिक मनोचिकित्सक से जुड़ी पुस्तकें हैं।
- 20 एमडी के छात्र, 01 एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं
- साइकोलोजिकल लैब है, जिसे सभी तरह क मानसिक रोगों की जांच होती है।
- 172 एकड़ में फैला हुआ है संस्थान
- 26 से ज्यादा भवन हैं परिसर में
- 550 मरीज वर्तमान में भर्ती हैं।
- 300 मरीज ओपीडी में लेते हैं परामर्श
- 05प्रोफेसर, 04 सीनियर रेजिडेंट, 04मेडिकल ऑफिसर, 24 जूनियर रेजिडेंट
- 60 हजार से अधिक मनोचिकित्सक से जुड़ी पुस्तकें हैं।
- 20 एमडी के छात्र, 01 एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं
- साइकोलोजिकल लैब है, जिसे सभी तरह क मानसिक रोगों की जांच होती है।
