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UP: ताजमहल के पीछे बना दिया पार्क, केंद्र ने मांगा समय; सुप्रीम कोर्ट में 25 अगस्त को सुनवाई
Tue, 04 Aug 2026 10:23 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 04 Aug 2026 10:23 PM IST
सार
ताजमहल के पीछे यमुना किनारे बने पार्क के मुआवजे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र की ओर से हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। श्री रंगजी महाराज विराजमान ट्रस्ट 7030 वर्ग मीटर जमीन के उपयोग के बदले मुआवजे की मांग कर रहा है; मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
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ताजमहल के पीछे बने इसी बाग़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
ताजमहल के पीछे यमुना नदी के किनारे पार्क बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। दो जजों की बेंच के सामने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और मंत्रालय के अधिवक्ता ने हलफनामा दाखिल करने के लिए अदालत से समय की मांग की। बेंच ने अगली सुनवाई की तारीख 25 अगस्त तय की है।
2001 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जगमोहन के निरीक्षण के दौरान ताजमहल के पीछे नदी की बाढ़ से आई सिल्ट, कचरा और पत्थरों की कटाई के बाद पड़ा मलबा देखकर उन्होंने पार्क बनाने के निर्देश दिए थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां पार्क बनाया तो वृंदावन के ठाकुर श्री रंगजी महाराज विराजमान ट्रस्ट ने याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की थी।
ट्रस्ट का दावा है कि ताज के पीछे 7030 वर्ग मीटर जमीन उनके नाम पर है। सालाना 5.50 करोड़ रुपये के हिसाब से ट्रस्ट ने 25 साल के उपयोग के लिए मुआवजा मांगा था, जिस पर डीएम ने अपनी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को सौंपी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान बेंच के सामने मंत्रालय के अधिवक्ता ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।
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2001 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जगमोहन के निरीक्षण के दौरान ताजमहल के पीछे नदी की बाढ़ से आई सिल्ट, कचरा और पत्थरों की कटाई के बाद पड़ा मलबा देखकर उन्होंने पार्क बनाने के निर्देश दिए थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां पार्क बनाया तो वृंदावन के ठाकुर श्री रंगजी महाराज विराजमान ट्रस्ट ने याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की थी।
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ट्रस्ट का दावा है कि ताज के पीछे 7030 वर्ग मीटर जमीन उनके नाम पर है। सालाना 5.50 करोड़ रुपये के हिसाब से ट्रस्ट ने 25 साल के उपयोग के लिए मुआवजा मांगा था, जिस पर डीएम ने अपनी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को सौंपी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान बेंच के सामने मंत्रालय के अधिवक्ता ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।
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