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Driving Licence: अलीगढ़ के 18 हजार डीएल आठ माह से लखनऊ में अटके, आरटीओ के चक्कर लगा रहे आवेदक

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 19 May 2026 12:32 PM IST
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सार

परिवहन विभाग में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने में देरी का असर करीब 18 हजार आवेदकों पर पड़ा है। सितंबर, अक्तूबर और नवंबर से लंबित मामलों के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। लर्निंग लाइसेंस के बाद स्थायी डीएल के लिए आवेदन करने वाले आरटीओ कार्यालय से लेकर मोटर ड्राइविंग इंस्टीट्यूट तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

Aligarh driving licences stuck in Lucknow
लाइसेंस की जानकारी लेते आवेदक, अलीगढ़ का ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग इंस्टीट्यूट - फोटो : संवाद
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विस्तार

अक्तूबर से अब तक लाइसेंस नहीं आया, आखिर लखनऊ से डीएल कब तक आएगा? यह सवाल 18 मई को आरटीओ कार्यालय पहुंचे तहसील खैर के उटवारा गांव निवासी सुनील कुमार ने अधिकारियों से किया। यही पीड़ा अतराैली के बहादुरपुर गांव निवासी मुकेश सिंह की भी थी। इन्होंने बताया कि कई बार चक्कर काट चुके हैं, हर बार बोल दिया जाता है, जल्द आ जाएगा, प्रक्रिया जारी है।



जब अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो यह समस्या सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि 18 हजार लोगों से जुड़ी पाई गई। आरटीओ कार्यालय पहुंचने वाले अधिकतर आवेदकों ने बताया कि उन्होंने नवंबर में डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक डीएल प्रिंट होकर नहीं मिला। कई बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं। हर बार अलग-अलग वजह बताकर लौटा दिया जाता है। ऑनलाइन स्टेटस में केवल लंबित या प्रक्रिया जारी है ही दिखाई देता है।

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लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस प्रिंटिंग से संबंधित निजी एजेंसी में बदलाव और तकनीकी कारणों से आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। नई एजेंसी के माध्यम से प्रिंटिंग प्रक्रिया तेज की जा रही है। चरणबद्ध तरीके से लंबित डीएल संबंधित आवेदकों तक जल्द ही डाक के माध्यम से पहुंच जाएंगे।- दीपक कुमार शाह, आरटीओ प्रशासन

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सितंबर से नवंबर तक आवेदन करने वाले 18 हजार लोग 
परिवहन विभाग में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने में देरी का असर करीब 18 हजार आवेदकों पर पड़ा है। सितंबर, अक्तूबर और नवंबर से लंबित मामलों के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। लर्निंग लाइसेंस के बाद स्थायी डीएल के लिए आवेदन करने वाले आरटीओ कार्यालय से लेकर मोटर ड्राइविंग इंस्टीट्यूट तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इन सभी आवेदकों पर लखनऊ में स्मार्ट कार्ड प्रिंट करने वाली आउटसोर्स कंपनी की देरी व लापरवाही भारी पड़ रही है। आवेदकों का कहना है कि लाइसेंस न बनने से नौकरी, वाहन खरीद और अन्य जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। कुछ लोगों ने दोबारा फीस जमा कर फिर से आवेदन भी किया है।


नई कंपनी के जिम्मा संभालते ही बढ़ीं दिक्कतें
आरटीओ में स्मार्ट डीएल कार्ड प्रिंट करने का काम पहले एक निजी कंपनी के पास था। अक्तूबर 2025 से यह जिम्मेदारी नई कंपनी फोकाम नेट लिमिटेड, लखनऊ को सौंप दी गई है। इसके बाद से ही स्मार्ट कार्ड प्रिंटिंग की प्रक्रिया धीमी पड़ गई।











 

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