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Aligarh: बलिदानी जितेंद्र का पार्थिव शरीर आएगा आज, बेटे के शहीद होने की मां को नहीं पता, अंतिम विदाई की तैयारी

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 15 Jun 2026 12:52 AM IST
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सार

घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी घर या गांव में कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे परिजनों और ग्रामीणों में रोष है। चचेरी बहन कुसुम शर्मा व चचेरे भाई पवन शर्मा का कहना है कि हमने स्वयं शासन-प्रशासन, एसडीएम, बीडीओ और यहां तक कि ग्राम प्रधान तक को सूचित किया, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे।

Arrival of martyr Jitendra Sharma body
बलिदानी जितेंद्र शर्मा, परिजन विलाप करते हुए - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

असम के जोरहाट में शनिवार सुबह दस बजे विमान हादसे में बलिदान हुए टप्पल क्षेत्र के वीर सपूत वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा (31) पुत्र स्व. कालीचरण उर्फ करुआ शर्माका पार्थिव शरीर आज सोमवार को दोपहर पैतृक गांव सालपुर में आएगा। बेटे की शहादत के बारे में अभी मां को जानकारी नहीं है।



परिवार के सदस्यों ने बताया है कि जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर करीब 12 से दो बजे के बीच हिंडन एयरफोर्स स्टेशन गाजियाबाद पहुंचेगा। वहां से पार्थिव शरीर को सैन्य वाहन द्वारा यमुना एक्सप्रेस-वे होते हुए टप्पल-जट्टारी-हजियापुर के रास्ते उनके पैतृक गांव सालपुर लाया जाएगा। परिजनों मुताबिक जितेंद्र की माताजी राजेश्वरी देवी लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनके नाजुक स्वास्थ्य को देखते हुए परिवार और ग्रामीणों ने अभी तक उन्हें जितेंद्र की शहादत की खबर नहीं दी है। 
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सालपुर निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि जितेंद्र भैया हमारे पूरे गांव के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिनका चयन एयरफोर्स में हुआ था। वे स्थानीय युवाओं के लिए हमेशा से एक प्रेरणास्रोत रहे। जितेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा (10वीं और 12वीं) टप्पल क्षेत्र के डीआरजी इंटर कॉलेज धनीपुर कुराना से पूरी की थी, जिसके बाद अलीगढ़ में कोचिंग कर वे भारतीय वायुसेना के लिए चुने गए थे।

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अधिकारी फोन पर परिजनों के संपर्क में हैं। बलिदानी की मां के स्वास्थ्य को देखते हुए मौके पर भीड़ नहीं बढ़ने दी जा रही है। गांव में एंबुलेंस तैनात की गई है। कोतवाल, तहसीलदार व लेखपाल गांव शाम को पहुंच चुके हैं। सोमवार को और भी सफाई की जाएगी।-शिशिर कुमार सिंह, एसडीएम खैर

प्रशासनिक उदासीनता पर ग्रामीणों में गुस्सा
घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी घर या गांव में कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे परिजनों और ग्रामीणों में रोष है। चचेरी बहन कुसुम शर्मा व चचेरे भाई पवन शर्मा का कहना है कि हमने स्वयं शासन-प्रशासन, एसडीएम, बीडीओ और यहां तक कि ग्राम प्रधान तक को सूचित किया, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे।

ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान
गांव निवासी पंकज शर्मा और राकेश ने बताया कि अधिकारियों को फोन करने पर अभी टाइम नहीं है या बाद में भेज देंगे जैसे जवाब मिले। यहां तक कि प्रशासन ने अंतिम संस्कार स्थल की सफाई के लिए सरकारी जेसीबी मशीन देने से भी मना कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने खुद जेसीबी और ट्रैक्टर की व्यवस्था की और खेत की जोताई व सफाई करवाकर अंतिम संस्कार स्थल तैयार किया। जितेंद्र अपने चार विवाहित बहनों (किरन, सुमन, समिता, अजनेश) और दो भाइयों (रमाकांत व भूपेंद्र) में सबसे छोटे थे।  पिता करुआ शर्मा का करीब 12 वर्ष पूर्व ब्रेन हेमरेज से देहांत हो चुका है। ज्ञात रहे वायुसेना के मालवाहक विमान की असम के जोराहट एयरबेस पर हुए हादसे में जितेंद्र सहित पांच सैन्यकर्मी बलिदान हो गए थे।


राज्यमंंत्री दिलेर और कांग्रेस नेता विवेक बंसल पहुंचे घर
शाम को राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर गांव में पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। इसके बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक विवेक बंसल और आलोक गौड़ ने गांव पहुंचकर संवेदना व्यक्त की।

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