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Census: जनगणना खोलेगी गांवों के प्रदूषण का पूरा हिसाब, पता चलेगा घर में कितने वाहन और कैसे बन रहा खाना

आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 27 Mar 2026 03:25 PM IST
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सार

जनगणना में हर परिवार से करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में मौजूद साइकिल, स्कूटर, कार और अन्य वाहनों की संख्या, बिजली कनेक्शन, खाना पकाने के ईंधन (एलपीजी, लकड़ी, कोयला) और पेयजल स्रोत की जानकारी शामिल होगी।

Census and village pollution
जनगणना - फोटो : freepik
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विस्तार

अब प्रदेश के गांवों में कितना प्रदूषण हो रहा है, इसका अंदाजा नहीं बल्कि सटीक हिसाब सामने आएगा। जनगणना हर गांव की हकीकत उजागर करेगी। यह पता चलेगा कि किसके घर में कितने वाहन हैं, कौन लकड़ी-कोयले से खाना बना रहा है और कहां कितनी ऊर्जा खपत हो रही है।

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दरअसल, अभी तक सरकार 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर ही योजनाएं बना रही थी, जबकि बीते 15 साल में गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। संसाधनों और वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ी है, जिससे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है।
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नई जनगणना से मिलने वाले डाटा का विश्लेषण करने के बाद पहली बार गांव-वार कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया जाएगा। इससे यह तय करना आसान होगा कि किन गांवों में प्रदूषण ज्यादा है और वहां किस तरह के कदम उठाने होंगे। सरकार इसी के आधार पर कार्बन न्यूट्रल गांवों की दिशा में ठोस और लक्षित रणनीति तैयार करेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के हर गांव में उपलब्ध संसाधनों का पूरा ब्योरा मिलने से यह तय करना आसान होगा कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कितना है और उसे कम करने के लिए किन उपायों की जरूरत है। इससे गांव-वार रणनीति बनाकर कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य हासिल करने में तेजी आएगी।

अलीगढ़ जिले की बात करें तो यहां 852 में से अब तक एक भी ग्राम पंचायत प्रदूषण मुक्त नहीं हो पाई है। हालांकि दो पंचायत सिकंदरपुर माछुआ और भरतपुर पंचायत शुरूआती सर्वे में आगे चल रही है। साल 2030 तक प्रदेश सरकार को 45 फीसदी पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य मिला है।

नई जनगणना से गांवों में इस्तेमाल हो रहे संसाधनों की सटीक जानकारी मिलेगी। इससे कार्बन न्यूट्रल गांवों की नीति बनाने और उसे लागू करने में आसानी होगी। - यतेंद्र कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, अलीगढ़


सवाल खोलेंगे प्रदूषण का सच
जनगणना में हर परिवार से करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर में मौजूद साइकिल, स्कूटर, कार और अन्य वाहनों की संख्या, बिजली कनेक्शन, खाना पकाने के ईंधन (एलपीजी, लकड़ी, कोयला) और पेयजल स्रोत की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा सौर ऊर्जा उपकरण, जेनरेटर, इंजन और ई-वाहनों का भी ब्योरा लिया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर हर गांव के कार्बन उत्सर्जन का अनुमान लगाया जा सकेगा और उसी अनुसार प्रदूषण कम करने की योजना तैयार की जाएगी।

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