Operation Smile: मांगे ब्रांडेड कपड़े, परिवार ने डांटा, यूट्यूब देख कपड़े खरीदने दिल्ली पहुंच गईं चार लड़कियां
चार लड़कियां माता-पिता को देखते ही बिलखते हुए उनसे लिपट गईं और बोलीं अब हम कभी भी और कहीं नहीं जाएंगी। एक लड़की की मां ने कहा अगर तुझे कपड़े ही चाहिए थे तो हमें बताया होता हम खूब कपड़े दिलवाते।
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ब्रांडेड कपड़े खरीदने की चाहत, माता-पिता से कहा तो उन्होंने डांट दिया। यूट्यूब पर वीडियो देख सस्ते कपड़े खरीदने के लिए अतरौली क्षेत्र के एक गांव की चार लड़कियां शनिवार को घर छोड़कर सरोजिनी नगर दिल्ली पहुंच गईं। वहां से ये वृंदावन आ गई। इनकी उम्र 12 से 14 वर्ष के बीच है और ये कक्षा सात से 10वीं की छात्राएं हैं, जिनमें दो सगी बहनें हैं। पुलिस ने 15 घंटे के भीतर इन्हें सर्विलांस की मदद से रविवार को वृंदावन (मथुरा) से खोज निकाला और परिजनों को सौंप दिया है।
रविवार को पुलिस लाइन स्थित सभागार में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया और बताया कि पुलिस की जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई कि चारों सहेलियों ने यूट्यूब पर दिल्ली के मशहूर सरोजिनी नगर मार्केट के वीडियो देखे थे, जिनमें दिखाया गया था कि वहां बहुत अच्छे और सस्ते कपड़े मिलते हैं। माता-पिता की डांट से नाराज होकर इन लड़कियों ने घर छोड़ने का मन बनाया और कुछ रुपये व बैग लेकर पहले दिल्ली के सरोजिनी नगर मार्केट पहुंचीं, हालांकि, इन्होंने वहां कोई खरीदारी नहीं की। इनमें से एक लड़की पूर्व में वृंदावन जा चुकी थी, इसलिए वे सभी दिल्ली से वृंदावन आ गईं। जानकारी यह भी मिली है कि एक पांचवीं लड़की और भी जाने वाली थी लेकिन समय रहते खुलासा हो गया और उस लड़की को जाने से रोक लिया गया।
परिजनों के अनुसार, शनिवार 20 जून दोपहर करीब 1:30 बजे तक चारों सहेलियां साथ थीं, जिसके बाद वे अचानक लापता हो गईं। रात करीब 8:00 बजे डायल-112 के माध्यम से थाना अतरौली पुलिस को सूचना मिली। उच्चाधिकारियों ने गांव पहुंचकर परिजनों, सहपाठियों और शिक्षकों से पूछताछ के बाद थाना अतरौली में केस दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने थाना अतरौली पुलिस व सर्विलांस टीम को 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
लड़कियों की उम्र बहुत कम थी और कोई भी असामाजिक तत्व उनकी इस स्थिति का गलत फायदा उठा सकता था।यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। बच्चे किससे बात कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर क्या देख रहे हैं, उन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। अगर किसी का बच्चा घर से बिना बताए चला जाता है, तो बदनामी के डर से मामले को न छिपाएं। बिना किसी झिझक के तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चे को किसी अनहोनी का शिकार होने से बचाया जा सके।- नीरज कुमार जादौन, एसएसपी, अलीगढ़
150 किमी में लगे 110 कैमरों की फुटेज खंगाली
ऑपरेशन स्माइल के तहत एसएसपी ने पांच टीमों का गठन किया गया। थाना टीम, सर्विलांस और क्राइम इन्वेस्टिगेशन विंग देहात ने संदिग्ध नंबरों और सोशल मीडिया वेबसाइट्स का टेक्निकल एनालिसिस किया। अलीगढ़, दिल्ली और मथुरा/वृंदावन के करीब 150 किलोमीटर के दायरे में आईसीसीसी सहित 110 से अधिक कैमरों की फुटेज खंगाली गई। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल और मेलों में डॉग स्क्वायड की मदद से चेकिंग अभियान चलाया। लड़कियों की तस्वीरें रेंज और सीमावर्ती सभी जिलों के पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर की गईं।
परिजनों को देख बिलखकर लिपटीं, बोलीं अब कभी कहीं नहीं जाएंगी
चार लड़कियां माता-पिता को देखते ही बिलखते हुए उनसे लिपट गईं और बोलीं अब हम कभी भी और कहीं नहीं जाएंगी। एक लड़की की मां ने कहा अगर तुझे कपड़े ही चाहिए थे तो हमें बताया होता हम खूब कपड़े दिलवाते। सभी लड़कियों के माता-पिता छोटे किसान हैं। सभी की आर्थिक स्थिति साधारण है।
डरा रहे आंकड़े, 165 दिन में घर 720 बच्चे हुए लापता
जिले में बीते महज साढ़े पांच महीनों (लगभग 165 दिन) के भीतर 720 नाबालिग बच्चे या तो घर से भाग गए या संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। यानी हर दिन औसतन चार से ज्यादा बच्चे घर छोड़ रहे हैं। यह आंकड़ा डराने वाला है, इनमें से 590 को पुलिस ने सुरक्षित खोज निकाला है, बाकी की तलाश चल रही है।
इस आंकड़े का खुलासा खुद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने किया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में अलीगढ़ में ही तैनात एक सब-इंस्पेक्टर का इकलौता बेटा सिर्फ इसलिए घर से नाराज होकर भाग गया, क्योंकि घरवालों ने उसे स्मार्टफोन दिलाने से मना कर दिया था। वह लड़का पूरे छह महीने तक घरवालों को बिना बताए दिल्ली में रहा। अधिकांश मामलों में नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर भगाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नाबालिग लड़के छोटी-छोटी बातों पर माता-पिता से रूठकर या झगड़कर घर छोड़ रहे हैं।
मानसिक उथल-पुथल के बीच उठाते हैं कदम
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम कहते हैं कि बच्चे गहरी मानसिक उथल-पुथल में ऐसे कदम उठाते हैं। किशोर उम्र में बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता है। माता-पिता की डांट, जैसे मोबाइल छीनना या पढ़ाई के लिए टोकना, बच्चों को गुस्से में घर छोड़ने पर मजबूर करती है। उन्हें लगता है कि भाग जाना ही उस वक्त का समाधान है। बच्चे सोशल मीडिया, यूट्यूब और रील्स की आभासी दुनिया में खोए रहते हैं। उन्हें घर का माहौल उबाऊ या बंदिशों वाला लगता है।