Aligarh News: गेस्ट हाउस में 35 वर्ष पहले शुरू हुआ महिला थाना, आज बना हुआ है महिलाओं की आवाज
अभिषेक शर्मा की ‘थाना डायरी’ में पढ़िए, कैसे गेस्ट हाउस में शुरू हुआ महिला थाना आज हजारों महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र बन चुका है और बदलते दौर में अपराधों के नए चेहरों से मुकाबला कर रहा है।
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कुछ साल पहले तक घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना या छेड़छाड़ की शिकायत लेकर थाने पहुंचना महिलाओं के लिए आसान नहीं था। पुरुष पुलिसकर्मियों के सामने अपनी पीड़ा खुलकर कहने में झिझक और बदनामी का डर उनकी आवाज दबा देता था, लेकिन 35 वर्ष पहले अलीगढ़ में एक थाना शुरू हुआ जो अब साइबर ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन अपराधों तक पहुंचा है। अभिषेक शर्मा की ‘थाना डायरी’ में पढ़िए, कैसे गेस्ट हाउस में शुरू हुआ महिला थाना आज हजारों महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र बन चुका है और बदलते दौर में अपराधों के नए चेहरों से मुकाबला कर रहा है।
जो महिलाएं सामान्य थानों में अपनी बात कहने से हिचकती हैं, उन्हें महिला थाने में गोपनीयता और सहज माहौल मिलता है। समय के साथ अपराधों का ट्रेंड भी बदला है। वर्तमान में यहां 55 कर्मचारी तैनात हैं। - नीरज जादौन, एसएसपी
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तब पुलिस गेस्ट हाउस में मिला कमरा
अलीगढ़ में वर्ष 1990 में महिला थाने की स्थापना की गई थी। शुरुआती दौर में इसे पुलिस के गेस्ट हाउस के एक कमरे से संचालित किया गया। एक दशक पहले ही महिला थाना पुलिस लाइन स्थित नए भवन में शिफ्ट किया गया। तब से लेकर अब तक महिला थाना महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र बनकर उभरा है।
थाने आने से झिझकती थीं महिलाएं
- महिला थाना बनने से पहले अधिकांश महिलाएं सामान्य थानों में शिकायत दर्ज कराने से हिचकती थीं। पुरुष पुलिसकर्मियों के सामने अपनी बात खुलकर न रख पाने और सामाजिक दबाव के कारण कई महिलाएं शिकायत तक दर्ज नहीं करा पाती थीं।
- महिला थाना बनने के बाद पीड़ित महिलाओं को अपेक्षाकृत सहज और सुरक्षित माहौल मिलने लगा। यहां महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने के साथ घरेलू विवादों में काउंसलिंग व्यवस्था भी शुरू की गई। इसके चलते कई पारिवारिक विवाद शुरुआती स्तर पर ही सुलझाए जाने लगे।
- समय के साथ मिशन शक्ति अभियान और विभिन्न थानों में महिला हेल्प डेस्क शुरू होने से भी महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने में सुविधा मिली। संबंधित थानों में समाधान न होने पर मामलों को महिला थाना भेजा जाता है। यहां घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, मारपीट, विवाह संबंधी धोखाधड़ी, नाबालिग लड़कियों के अपहरण, पॉक्सो एक्ट और साइबर ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है।
दो साल में बदला अपराध का ट्रेंड
पिछले दो वर्षों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। फर्जी आईडी बनाकर ब्लैकमेलिंग, निजी फोटो वायरल करने की धमकी और साइबर स्टॉकिंग जैसे मामले महिला थाने की नई चुनौती बनकर सामने आए हैं। हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कई मामलों में जांच और न्याय प्रक्रिया में देरी, स्टाफ की कमी और आधारभूत सुविधाओं की समस्याएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद महिला थाना महिलाओं को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और सुरक्षा दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
आंकड़ों से समझें बदलाव
- 169 केस वर्ष 2024 में दर्ज
- 122 केस वर्ष 2025 में दर्ज
इस साल मामूली अंतर भी
- 1 जनवरी से 20 मई 2025 तक 51 मुकदमे दर्ज
- 1 जनवरी से 20 मई 2026 तक 49 मुकदमे दर्ज