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31 साल बाद मिटा दाग: 500 और हिस्ट्रीशीटरों को मिली राहत, एक साल बेदाग रहने पर रिकॉर्ड भी होंगे खत्म

अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 06:27 PM IST
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सार

जुलाई 1994 में मथुरा के रिफाइनरी थाना क्षेत्र में हुई टैंकर लूट के एक मामले में धर्मवीर सिंह का नाम सामने आया। हालांकि महज 15 दिन बाद हुई शिनाख्त परेड में पहचान न होने पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इसके बावजूद इगलास पुलिस ने 15 जुलाई 1995 को उसी मुकदमे को आधार बनाकर धर्मवीर सिंह की हिस्ट्रीशीट खोल दी।

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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एक मुकदमे में नाम आया और अदालत ने उसे बरी कर दिया। कुछ ही समय बाद फिर पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोल दी जिसका कलंक हटने में 31 साल लग गए। इगलास क्षेत्र के एक किसान की यह कहानी अब जिले में पुलिस रिकॉर्ड की बड़ी सफाई की वजह बन गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नीरज जादौन ने न सिर्फ किसान की हिस्ट्रीशीट बंद कराई, बल्कि 70 वर्ष से अधिक आयु के हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी भी तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला लिया है। साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 500 हिस्ट्रीशीटरों को भी राहत दी गई है। यदि अगले एक वर्ष तक इन पर कोई शिकायत नहीं मिलती या कोई अपराध दर्ज नहीं होता तो उनकी हिस्ट्रीशीट भी बंद कर दी जाएंगी।

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मामला इगलास थाना क्षेत्र के गांव गुरसैना निवासी धर्मवीर सिंह का है। जुलाई 1994 में मथुरा के रिफाइनरी थाना क्षेत्र में हुई टैंकर लूट के एक मामले में उनका नाम सामने आया। हालांकि महज 15 दिन बाद हुई शिनाख्त परेड में पहचान न होने पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इसके बावजूद इगलास पुलिस ने 15 जुलाई 1995 को उसी मुकदमे को आधार बनाकर धर्मवीर सिंह की हिस्ट्रीशीट खोल दी।
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करीब तीन दशक तक यह दाग उनके नाम से जुड़ा रहा। हाल ही में एसएसपी द्वारा 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे हिस्ट्रीशीटरों की समीक्षा कर हिस्ट्रीशीट बंद कराने और रिकॉर्ड नष्ट करने की जानकारी मिलने पर धर्मवीर के परिजन उनसे मिले। बेटे गौरव ने एचएस नंबर 59-ए का हवाला देते हुए पूरे प्रकरण की शिकायत की। जब पुलिस ने फिर से जांच की तो पाया कि वर्तमान में धर्मवीर सिंह की आयु 59 वर्ष है और उनके खिलाफ कोई अन्य अपराध दर्ज नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर उनकी हिस्ट्रीशीट तत्काल बंद करने का आदेश जारी हुआ।

एक साल में तय होगा 500 हिस्ट्रीशीटरों का भविष्य
धर्मवीर के मामले के साथ ही पुलिस प्रशासन ने जिले के करीब 500 ऐसे हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी बंद करने का निर्देश दिया है, जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है। पुलिस अब एक वर्ष तक इनके आचरण पर नजर रखेगी। इस अवधि में कोई शिकायत न मिलने पर इन्हें हिस्ट्रीशीट से मुक्त कर दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से अपराध से दूर और बढ़ती आयु के कारण ऐसे लोगों पर लगातार निगरानी की आवश्यकता नहीं रह जाती।

जिले में यह है हिस्ट्रीशीटरों की स्थिति
पिछले वर्ष तक जिले में करीब 2500 हिस्ट्रीशीटर पंजीकृत थे। इनमें से 70 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 130 हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट बंद कर रिकॉर्ड नष्ट किए जा चुके हैं। वहीं हाल के दिनों में करीब 200 नए अपराधियों की हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

संपन्न परिवार से हैं धर्मवीर
धर्मवीर के छोटे भाई और शिक्षक वीरपाल सिंह के अनुसार उनका परिवार संपन्न है और लगभग 100 बीघा जमीन का मालिक है। एक भाई मेरठ में प्रोफेसर हैं, जबकि धर्मवीर दसवीं तक शिक्षित हैं। उनका कहना है कि गांव के एक अपराधी ने रंजिशन लूट के मामले में धर्मवीर सहित चार लोगों का नाम लिखवा दिया था। बाकी तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है और अब सिर्फ धर्मवीर ही जीवित हैं।

पुलिस ने माना, जारी रहना था अनुचित
एसएसपी नीरज जादौन ने कहा, “धर्मवीर के प्रकरण में केवल एक अपराध था और उसमें भी वे बरी हो चुके थे। ऐसे में उनकी हिस्ट्रीशीट खुलना और वर्षों तक जारी रहना अनुचित था, इसलिए इसे बंद कराया गया। इसी तरह के अन्य करीब 500 हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी भी समाप्त कर दी गई है। एक वर्ष बाद उन्हें भी हिस्ट्रीशीट से मुक्त किया जाएगा।”

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