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Aligarh News: मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दिलाने पर वसूली का आरोप, फार्मासिस्ट निलंबित
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : Archive
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मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली करने के आरोप में सीएचसी हरदुआगंज में तैनात फार्मासिस्ट भानुप्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है। उन पर विभागीय कार्यों में धनराशि की मांग एवं 20,000 रुपये वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सीएमओ डॉ.आरएन सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में वायरल वीडियो के आधार पर प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा 13 अगस्त को प्रस्तुत जांच आख्या में फार्मासिस्ट को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि में भानुप्रताप को कार्यालय अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलीगढ़ मंडल से संबद्ध किया गया है। आरोपों की विस्तृत जांच के लिए पृथक से विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हरदुआगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि सुशीला देवी अस्पताल में आया के पद पर तैनात थीं। अक्तूबर 2025 में उनका निधन हो गया। उनके चार बेटे हैं। सबसे बड़े बेटे ने मृतक आश्रित कोटे में बाबू पद की नौकरी का आवेदन किया, लेकिन शासन स्तर पर इस पद पर नियुक्ति करने से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद सबसे छोटे बेटे संतोष ने आवेदन किया और इस वक्त पर वह अतरौली में वार्ड बॉय के रूप में तैनात है। डॉ. प्रवेंद्र ने कहा कि इस प्रकरण में वायरल वीडियो में आरोपी फार्मासिस्ट रुपये गिनते हुए तो दिख रहे हैं, लेकिन रिश्वत लेने की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
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सीएमओ डॉ.आरएन सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में वायरल वीडियो के आधार पर प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा 13 अगस्त को प्रस्तुत जांच आख्या में फार्मासिस्ट को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि में भानुप्रताप को कार्यालय अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलीगढ़ मंडल से संबद्ध किया गया है। आरोपों की विस्तृत जांच के लिए पृथक से विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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हरदुआगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि सुशीला देवी अस्पताल में आया के पद पर तैनात थीं। अक्तूबर 2025 में उनका निधन हो गया। उनके चार बेटे हैं। सबसे बड़े बेटे ने मृतक आश्रित कोटे में बाबू पद की नौकरी का आवेदन किया, लेकिन शासन स्तर पर इस पद पर नियुक्ति करने से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद सबसे छोटे बेटे संतोष ने आवेदन किया और इस वक्त पर वह अतरौली में वार्ड बॉय के रूप में तैनात है। डॉ. प्रवेंद्र ने कहा कि इस प्रकरण में वायरल वीडियो में आरोपी फार्मासिस्ट रुपये गिनते हुए तो दिख रहे हैं, लेकिन रिश्वत लेने की पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
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