Soil testing: खाद-कीटनाशकों से मिट्टी हुई बीमार, छोटी ब्रेड खरीदने से भी कम में जानें अपने खेत की ताकत
खेत में कितनी ताकत बची है। इसकी जांच कराना एक छोटी ब्रेड खरीदने से भी सस्ता है। मिट्टी के प्रमुख तत्वों की जांच का शुल्क महज 29 रुपये है, जबकि सभी जांच कराने के लिए 102 रुपये लिए जाते हैं। किसान किसी भी मौसम में कभी भी यह जांच करा सकते हैं। आठ से दस दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट मिल जाती है।
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विस्तार
खाद, खरपतवार और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग ने खेतों की हालत खराब कर दी है। इसकी मिट्टी में जीवांश की मात्रा लगातार कम हो रही है। वित्तीय वर्ष 205-26 में अलीगढ़ मंडल के चार जिलों (अलीगढ़, हाथरस, कासगंज और एटा ) के 68 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। जिसमें जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, कॉपर, मैग्नीज, आयरन, बोरान की भारी कमी दर्ज हुई है। मिट्टी बहुत बीमार और बेहाल है, यह लगभग वेंटिलेटर तक पहुंच गई है।
कृषि विभाग का कहना है कि डीएपी, यूरिया, खरपतवार नाशक और कीटनाशकों के बेतहाशा प्रयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति लगातार कम हो रही है। जैविक खाद, फसल चक्र परिवर्तन, पशुपालन, फसल अवशेष को खेतों में मिलाने से ही इसको ठीक किया जा सकता है। ढेंचा की हरी खाद, केंचुआ खाद या वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद या घूरे की खाद ही मिट्टी को ताकतवर बना सकती है।
डीएपी, यूरिया और कीटनाशकों के बेतहाशा प्रयोग से मिट्टी के तत्व कम हो रहे हैं, सूक्ष्म जीव मर रहे हैं। अलीगढ़ मंडल में मिट्टी की सेहत खराब है, यह चिंता का विषय है। किसानों को मिट्टी की जांच करानी चाहिए, ताकि पता चले कि कौन सा तत्व कम हो रहा है। इसी के अनुसार जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए। -श्याम देव, प्रभारी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला।
अलीगढ़ मंडल की मिट्टी जांच रिपोर्ट
तत्व मानक मिली मात्रा
जीवांश कार्बन 0.80 प्रतिशत से अधिक 0.30 से 0.33 तक
नाइट्रोजन 560 किलो प्रति हेक्टेयर 200 से 250 किलो
सल्फर 15 पीपीएम से अधिक 2 से 3 पीपीएम
फास्फोरस 40 किलो प्रति हेक्टेयर 20 से 30 किलो
मैग्नीज 4 पीपीएम 1 से पीपीएम
आयरन 8 पीपीएम 2 से 5 पीपीएम
जिंक 1.2 पीपीएम 0.5 से 0.60 पीपीएम
बोरान 0.50 पीपीएम 0.5 पीपीएम से अधिक
पोटाश 250 किलो प्रति हेक्टेयर 200 से 250 के बीच मिला
29 रुपये में जाने खेत की ताकत, छोटी ब्रेड खरीदने से भी है सस्ता
खेत में कितनी ताकत बची है। इसकी जांच कराना एक छोटी ब्रेड खरीदने से भी सस्ता है। मिट्टी के प्रमुख तत्वों की जांच का शुल्क महज 29 रुपये है, जबकि सभी जांच कराने के लिए 102 रुपये लिए जाते हैं। किसान किसी भी मौसम में कभी भी यह जांच करा सकते हैं। आठ से दस दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट मिल जाती है। जिससे पता चलता है कि खेत में किस तत्व की कमी है, क्या डालना है। फसल की बुवाई या रोपाई से लगभग एक महीने पहले नमूना लेना बेहतर है, जब खेत में कोई भी खाद, उर्वरक या रासायनिक दवा न डाली गई हो। मेड़, पेड़ की छांव, गोबर की खाद वाली जगह या पानी की नालियों के पास से मिट्टी न लें।
जांच के लिए खेत के चारों कोनों ओर और केंद्र के साथ आठ से दस जगह की मिट्टी लेनी होती है। वी आकार की छह इंच (लगभग आधा फुट) की गहराई से ऊपर से नीचे की ओर खुरपी की मदद से मिट्टी खरोंच लें। सभी जगहों से इकट्ठी की गई मिट्टी (करीब आधा किलो) को अच्छे से मिला लें और फिर उसे छाया में सुखाकर एक साफ थैली में पैक करें। इस थैली को ही प्रयोगशाला लेकर जाएं।
छोटी सी राहत
विभागीय स्तर से जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का कुछ असर हो रहा है। बीते वर्ष जीवांश कार्बन की मात्रा 0.27 से 0.30 मिली थी, जो अब 0.30 से 0.33 तक पहुंची है, लेकिन अभी मानक स्तर 0.80 से बहुत कम है।
किसानों ने स्वयं से कराई जांच
- बीते अप्रैल और मई महीने में 87 किसानों ने कराई जांच
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 1109 तक पहुंचा
कृषि विभाग ने कराई जांच
अलीगढ़ जनपद में
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में 6000 नमूने
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में 12000 नमूने
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में 24000 नमूने
- अलीगढ़ मंडल में
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में 18000 नमूने
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में 34000 नमूने
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में 68000 नमूने