Aligarh News: होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने खोला मोर्चा, उत्पीड़न न रुकने पर चाबियां सौंपने की दी चेतावनी
एसोसिएशन के चेयरमैन और पर्यटन सलाहकार पंकज धीरज ने सरकार से मांग की कि हर जिले में होटल संचालकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
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देश के विभिन्न हिस्सों और दिल्ली के 'बेड एंड ब्रेकफास्ट होम स्टे में हाल ही में हुए हादसों के बाद, स्थानीय प्रशासन द्वारा होटल उद्योग को निशाना बनाए जाने के विरोध में अलीगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। एसोसिएशन ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन कर प्रशासनिक विभागों पर अनावश्यक उत्पीड़न और रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप लगाया है। संचालकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं निकला, तो वे अपने प्रतिष्ठानों की चाबियां मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को सौंप देंगे।
सिर्फ होटल इंडस्ट्री को ही टारगेट क्यों
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष मानव महाजन ने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा सिर्फ होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को टारगेट बनाना बेहद निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाया, ऐसा किस कानून या संविधान में लिखा है कि अग्निकांड केवल होटल और रेस्टोरेंट में ही हो सकता है? क्या स्कूल, अस्पताल, अपार्टमेंट, शोरूम, बैंक और सरकारी भवनों में हादसे नहीं हो सकते? तो फिर कार्रवाई की गाज सिर्फ हम पर ही क्यों गिरती है?
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। अखिल गुप्ता ने आरोप लगाया कि आज हर एक एनओसी के नाम पर मोटी रिश्वत की अपेक्षा की जाती है। यदि रिश्वत न दी जाए, तो कानूनी अड़चनों का हवाला देकर एनओसी को अटका दिया जाता है। महामंत्री विवेक बगाई ने प्रदेश सरकार और स्थानीय अधिकारियों के बीच के विरोधाभास को सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति के माध्यम से होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ क्षेत्रीय अधिकारी अपनी मनमानी और उत्पीड़न से उनके इन मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं।
सराय एक्ट जैसे काले कानून को खत्म करने की मांग
एसोसिएशन के चेयरमैन और पर्यटन सलाहकार पंकज धीरज ने सरकार से मांग की कि हर जिले में होटल संचालकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही, पदाधिकारियों ने शासन से सवाल किया कि अंग्रेजों के जमाने का गुलामी का प्रतीक काला कानून सराय एक्ट" आज विकसित होते भारत में भी क्यों चलन में है? सरकार को तुरंत होटल संचालकों के हित में एक सर्वमान्य और आधुनिक नीति का निर्धारण करना चाहिए।
लाखों की रोजी-रोटी और अरबों का राजस्व दांव पर
संगठन मंत्री मनमीत सिंह और कोऑर्डिनेटर दीपक गर्ग ने स्पष्ट किया कि होटल संचालक अग्नि सुरक्षा और बचाव के हर संभव उपाय करने को तैयार हैं और समय-समय पर करते भी हैं। कोई भी संचालक नहीं चाहता कि उसके प्रतिष्ठान में कोई जनहानि हो। उन्होंने याद दिलाया कि यह इंडस्ट्री न केवल सरकार को करोड़ों-अरबों का राजस्व देती है, बल्कि इससे जुड़े कैटर्स, डेकोरेटर्स, लाइट और डीजे साउंड वाले हजारों-लाखों परिवारों की रोजी-रोटी भी चलती है। यदि महंगाई के इस दौर में उत्पीड़न के कारण यह उद्योग नष्ट हुआ, तो इसके लिए पूरी तरह प्रशासन जिम्मेदार होगा।
मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने एकजुट होकर अलीगढ़ मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से इस प्रकरण में तुरंत हस्तक्षेप कर स्थाई समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डरा-धमका कर उत्पीड़न बंद नहीं किया गया, तो सभी संचालक अपने प्रतिष्ठान बंद कर चाबियां प्रशासन को सौंप देंगे और कर्मचारियों की रोजी-रोटी की पूरी जिम्मेदारी फिर शासन की होगी। इस प्रेस वार्ता के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष मानव महाजन, महामंत्री विवेक बगाई, पर्यटन सलाहकार पंकज धीरज, संगठन मंत्री मनमीत सिंह, कोऑर्डिनेटर व मीडिया प्रभारी दीपक गर्ग सहित भारी संख्या में होटल व रेस्टोरेंट संचालक मौजूद रहे।