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School Chalo Abhiyan: अलीगढ़ जनपद में 93 स्कूल खाली, कक्षा एक और छह में एक भी प्रवेश नहीं

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 09 Apr 2026 02:18 PM IST
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सार

सवाल लाजमी है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षक, भवन और योजनाएं मौजूद हैं, तो आखिर बच्चे कहां जा रहे हैं? क्या स्कूल चलो अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है, या फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है?

Status of School Chalo Abhiyan in Aligarh
परिषदीय विद्यालय - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार

एक ओर बेसिक शिक्षा विभाग घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए स्कूल चलो अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के 93 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जहां कक्षा एक और कक्षा छह में एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हो सका। यह स्थिति न सिर्फ अभियान की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, बल्कि सरकारी स्कूलों में घटते भरोसे की भी तस्वीर पेश करती है।

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जिले में कुल 2115 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। एक अप्रैल से शुरू हुए नामांकन अभियान के बावजूद कई विद्यालय बच्चों से खाली पड़े हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार विकासखंड गंगीरी में सबसे अधिक 20 विद्यालय ऐसे हैं जहां कक्षा एक और छह में एक भी दाखिला नहीं हुआ। इसके अलावा लोधा में 13, शहर क्षेत्र अलीगढ़ में 16, अतरौली में आठ, इगलास में सात और अकराबाद में छह विद्यालयों की यही स्थिति है। अन्य ब्लॉक धनीपुर, टप्पल और गोंडा में चार-चार व चंडौस, खैर और जवां में तीन-तीन स्कूलों में शून्य नामांकन दर्ज किया गया है।
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ग्राउंड पर स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। कई गांवों में अभिभावक अब अपने बच्चों को निजी स्कूलों की ओर भेज रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिरा है, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं रहती और बुनियादी सुविधाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। यही कारण है कि नए सत्र में कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या कई जगह शून्य रह गई। वहीं कक्षा छह में भी प्रवेश न होना यह संकेत देता है कि प्राथमिक के बाद बच्चे सरकारी स्कूलों से आगे नहीं बढ़ रहे।

स्कूल हैं, शिक्षक हैं, फिर बच्चे कहां?
सवाल लाजमी है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षक, भवन और योजनाएं मौजूद हैं, तो आखिर बच्चे कहां जा रहे हैं? क्या स्कूल चलो अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है, या फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है? इस पर अधिकारियों ने कहा कि मानना है कि यह स्थिति केवल अभिभावकों के रुझान का परिणाम नहीं, बल्कि विद्यालय स्तर पर लापरवाही का भी नतीजा है। शासन की ओर से पहले ही शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को घर-घर संपर्क कर नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद लक्ष्य पूरा न होना सवाल खड़े करता है।

शून्य नामांकन दर्ज होना गंभीर मामला
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रेरणा पोर्टल पर कक्षा एक और छह में शून्य नामांकन दर्ज होना गंभीर मामला है। सभी विद्यालयों को नामांकन और सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इसमें लापरवाही पाई गई तो संबंधित प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और अप्रैल माह का वेतन भी रोका जा सकता है।

कहां कितने स्कूलों में शून्य नामांकन

  • गंगीरी: 20
  • अलीगढ़ (शहर): 16
  • लोधा: 13
  • अतरौली: 8
  • इगलास: 7
  • अकराबाद: 6
  • धनीपुर, टप्पल, गोंडा: 4-4
  • चंडौस, खैर, जवां, बिजौली: 2-3
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