Jal Jeevan Mission: हर घर जल से बदला जीवन, समय की रुकी बर्बादी, बीमारियां हुईं कम
जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस पर की थी, जिसका मकसद रोजाना 55 लीटर पानी प्रति व्यक्ति को उपलब्ध कराना था। अब यह योजना दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है।
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जल ही जीवन है। जल से जीवन की दशा और दिशा भी बदलती है। ऐसा एएमयू के सामाजिक कार्य विभाग के वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया है। हर घर जल योजना ने जिले के ग्रामीणों का जीवन बदल दिया है। हैंडपंप से पानी लाने में रोजाना बर्बाद हो रहा पांच घंटे का समय अब बचने लगा है। जल की गुणवत्ता हर महीने जल सखियां चेक कर रही हैं, जिससे ग्रामीण जल जनित बीमारियों की चपेट में न आएं।
जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस पर की थी, जिसका मकसद रोजाना 55 लीटर पानी प्रति व्यक्ति को उपलब्ध कराना था। अब यह योजना दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। योजना से लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव पर केंद्र सरकार ने अध्ययन करने की जिम्मेदारी एएमयू को दी गई।
सामाजिक कार्य विभाग के प्रो. इकराम हुसैन के नेतृत्व में हुआ अध्ययन सामाजिक कार्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. इकराम हुसैन के नेतृत्व में और यूपी जल निगम (ग्रामीण) के कार्यकारी अभियंता लोकेंद्र शर्मा के समन्वय में टीम ने गांवों में अध्ययन किया गया। यह अध्ययन 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक चला और ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल योजना के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य प्रभावों का गहन विश्लेषण किया गया। मुख्य अन्वेषक डॉ. मोहम्मद आरिफ खान, सह अन्वेषक डॉ. मोहम्मद ताहिर के निर्देशन में रिसर्च असिस्टेंट डाॅ. ताहा, मोहम्मद समीर खान आदि ने टीम ने अध्ययन किया।
अध्ययन में आए सामने
- डायरिया और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों में कमी दर्ज की गई।
- महिलाओं का पानी लाने में लगने वाला समय बचा, जिससे वे शिक्षा और रोजगार में समय दे पा रही हैं।
- वंचित बस्तियों तक भी जल पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
- पंप हाउस, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन की कार्यक्षमता की जांच की गई।
- ग्राम जल व स्वच्छता समितियों और जल सखियों की भूमिका अहम पाई गई।
- नल लगने से स्कूलों में बच्चियों की 90 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति बढ़ी है।
12 विकास खंडों के 12 गांवों में अध्ययन
विकास खंड अकराबाद के गांव बहादुरपुर, अतरौली के गांव मीरगढ़ी, धनीपुर के गांव भोजपुर, चंडौस के के गांव पहावटी, जवां के गांव पड़ाका सुल्तानपुर, लोधा के गांव जतनपुर चिकावटी, बिजौली के गांव बाराहुल, गंगीरी के गांव देहली, खैर के गांव उदयगढ़ी, टप्पल के गांव छज्जूपुर, गोंडा के नगला कलावा, इगलास के बैलोठ में 363 घरों में अध्ययन हुआ।

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