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Aligarh News: ट्रॉली में भरी तूरी केबल में फंसी, हटाते समय एचटी लाइन पर गिरा, गई जान
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Wed, 18 Feb 2026 02:44 AM IST
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ट्रैक्टर ट्रॉली में भरी तूरी 440 वोल्ट की केबल में फंस गई। उसे हटाते समय अचानक ट्रैक्टर चालक असंतुलित होकर ऊपर से जा रही 11 हजार केवी की लाइन में जा गिरा, जिसके करंट से झुलसकर पल भर में उसकी मौत हो गई।यह हादसा मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे गांव कनोवी में घटित हुआ।
गांव नगला नेकराम निवासी संजीव उर्फ संजू कुमार (20) पुत्र भीकम सिंह पांच दिन से ट्रैक्टर ट्रॉली में तूरी लादकर मलसई गांव के ईंट भट्ठे पर डाल रहे थे। रोजाना की तरह मंगलवार को भी ट्रॉली में बाडी से करीब छह फीट ऊंचाई तक तूरी लादकर वह मलसई के ईंट भट्ठे पर जा रहे थे।
कनोवी गांव के अंदर सड़क पर 11 हजार केवी की लाइन निकली है। इसी लाइन के खंभों पर गांव में बिजली आपूर्ति के लिए 440 वोल्ट की बंड कंडक्टर लाइन (एबीसी लाइन) भी बंधी है। मंगलवार की सुबह गांव के अंदर से होकर निकलते समय ट्रॉली में साइड पर कपड़ों के सहारे बाहर तक निकली तूरी इसी एबीसी लाइन में ऊपर की ओर फंस गई।
इस पर संजीव ने ट्रैक्टर रोक दिया और ट्रॉली के ऊपर चढ़कर तूरी से एबीसी लाइन को हटाने लगे। इसी दौरान तूरी में उनका पैर धंसा और असंतुलित होकर वह ट्रॉली के बिल्कुल ऊपर से निकली 11हजार केवी की लाइन में सीधे जा गिरे। यह देखते ही लोग शोर मचाकर दौड़े। सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई। कोई कुछ कर पाता उससे पहले ही पल भर में करंट से झुलसकर उनकी मौत हो गई। तारों में फंसी गर्दन के सहारे पूरा शरीर वैसे ही धरा रह गया।
ग्रामीणों ने कॉल कर बिजली घर से आपूर्ति बंद करवाई। खबर पाकर परिजन रोते-बिलखते हुए पहुंच गए। उनकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को तारों से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गंगीरी इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ने बताया कि परिवार से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
500 रुपये के लिए रोज खतरों खेल रहा था संजीव
-दो दिन पहले हरदुआगंज में ओवरलोड ट्रैक्टर ऊंची सड़क पर न चढ़ पाया, लटकर दो घरों में जा घुसा था
गंगीरी/ दादों। यह कहारी सिर्फ एक संजीव की नहीं है। जिले भर में ऐसे ट्रैक्टर चालक हैं जो महज 500 रुपये की मजदूरी के लिए रोजाना खतरों से खेल रहे हैं। ऊंचाई तक भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में बिजली के तार फंसने, गड्ढों अथवा कच्चे, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और ऊंचाई पर चढ़ते समय पीछे लौटकर पलटने अथवा दूसरे वाहनों से उनके टकराने का खतरा हर समय बना रहता है।
कनोवी में हुए हादसे के बाद परिजन ने बताया कि संजीव उर्फ संजू कुमार करीब आठ दिन से 500 रुपये रोजाना की मजदूरी पर अपने चाचा लालाराम का ट्रैक्टर चला रहे थे। पांच दिन से चाचा लालाराम के खेत से ही सरसों की तूरी ट्रैक्टर ट्राॅली में लादकर मलसई के ईंट भट्ठे पर डाल रहे थे। थाना पुलिस के अनुसार मंगलवार को भी 20 से 25 क्विंटल तूरी ट्रॉली में करीब छह फीट ऊपर तक भरकर ईंट भट्ठे पर डालने जा रहे थे। महज 500 रुपये में रोजाना खतरे से खेल रहे संजीव मंगलवार करंट की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। वह पांच भाई पुष्पेंद्र, सुरेंद्र, बहन विमलेश और मनोरमा में सबसे छोटे थे। अभी सिर्फ सबसे बड़े भाई पुष्पेंद्र की शादी हुई है। उसकी मौत से मां चंद्रवती देवी, पिता भीकम सिंह सहित भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अभी दो दिन पहले ही हरदुआगंज के बैरामगढ़ी रजबहा पुल पर चढ़ते समय ऐसी ही ओवर ट्रैक्टर ट्रॉली सड़क की ऊंचाई के कारण अनियंत्रित हो गई थी। यह ट्रैक्टर ट्रॉली पीछे की ओर पलटकर सड़क किनारे दो मकानों में जा घुसी थी, जिससे एक निर्माणाधीन मकान क्षतिग्रस्त हुआ और एक घर की एक दीवार गिर गई थी।
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गांव नगला नेकराम निवासी संजीव उर्फ संजू कुमार (20) पुत्र भीकम सिंह पांच दिन से ट्रैक्टर ट्रॉली में तूरी लादकर मलसई गांव के ईंट भट्ठे पर डाल रहे थे। रोजाना की तरह मंगलवार को भी ट्रॉली में बाडी से करीब छह फीट ऊंचाई तक तूरी लादकर वह मलसई के ईंट भट्ठे पर जा रहे थे।
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कनोवी गांव के अंदर सड़क पर 11 हजार केवी की लाइन निकली है। इसी लाइन के खंभों पर गांव में बिजली आपूर्ति के लिए 440 वोल्ट की बंड कंडक्टर लाइन (एबीसी लाइन) भी बंधी है। मंगलवार की सुबह गांव के अंदर से होकर निकलते समय ट्रॉली में साइड पर कपड़ों के सहारे बाहर तक निकली तूरी इसी एबीसी लाइन में ऊपर की ओर फंस गई।
इस पर संजीव ने ट्रैक्टर रोक दिया और ट्रॉली के ऊपर चढ़कर तूरी से एबीसी लाइन को हटाने लगे। इसी दौरान तूरी में उनका पैर धंसा और असंतुलित होकर वह ट्रॉली के बिल्कुल ऊपर से निकली 11हजार केवी की लाइन में सीधे जा गिरे। यह देखते ही लोग शोर मचाकर दौड़े। सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई। कोई कुछ कर पाता उससे पहले ही पल भर में करंट से झुलसकर उनकी मौत हो गई। तारों में फंसी गर्दन के सहारे पूरा शरीर वैसे ही धरा रह गया।
ग्रामीणों ने कॉल कर बिजली घर से आपूर्ति बंद करवाई। खबर पाकर परिजन रोते-बिलखते हुए पहुंच गए। उनकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को तारों से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गंगीरी इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ने बताया कि परिवार से तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
500 रुपये के लिए रोज खतरों खेल रहा था संजीव
-दो दिन पहले हरदुआगंज में ओवरलोड ट्रैक्टर ऊंची सड़क पर न चढ़ पाया, लटकर दो घरों में जा घुसा था
गंगीरी/ दादों। यह कहारी सिर्फ एक संजीव की नहीं है। जिले भर में ऐसे ट्रैक्टर चालक हैं जो महज 500 रुपये की मजदूरी के लिए रोजाना खतरों से खेल रहे हैं। ऊंचाई तक भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में बिजली के तार फंसने, गड्ढों अथवा कच्चे, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और ऊंचाई पर चढ़ते समय पीछे लौटकर पलटने अथवा दूसरे वाहनों से उनके टकराने का खतरा हर समय बना रहता है।
कनोवी में हुए हादसे के बाद परिजन ने बताया कि संजीव उर्फ संजू कुमार करीब आठ दिन से 500 रुपये रोजाना की मजदूरी पर अपने चाचा लालाराम का ट्रैक्टर चला रहे थे। पांच दिन से चाचा लालाराम के खेत से ही सरसों की तूरी ट्रैक्टर ट्राॅली में लादकर मलसई के ईंट भट्ठे पर डाल रहे थे। थाना पुलिस के अनुसार मंगलवार को भी 20 से 25 क्विंटल तूरी ट्रॉली में करीब छह फीट ऊपर तक भरकर ईंट भट्ठे पर डालने जा रहे थे। महज 500 रुपये में रोजाना खतरे से खेल रहे संजीव मंगलवार करंट की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। वह पांच भाई पुष्पेंद्र, सुरेंद्र, बहन विमलेश और मनोरमा में सबसे छोटे थे। अभी सिर्फ सबसे बड़े भाई पुष्पेंद्र की शादी हुई है। उसकी मौत से मां चंद्रवती देवी, पिता भीकम सिंह सहित भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अभी दो दिन पहले ही हरदुआगंज के बैरामगढ़ी रजबहा पुल पर चढ़ते समय ऐसी ही ओवर ट्रैक्टर ट्रॉली सड़क की ऊंचाई के कारण अनियंत्रित हो गई थी। यह ट्रैक्टर ट्रॉली पीछे की ओर पलटकर सड़क किनारे दो मकानों में जा घुसी थी, जिससे एक निर्माणाधीन मकान क्षतिग्रस्त हुआ और एक घर की एक दीवार गिर गई थी।