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AMU: यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया बढ़ा शोध, सूत्रकृमि की तीन नई प्रजातियां खोजीं, मिट्टी को देंगी ताकत

इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 21 May 2026 03:09 PM IST
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सार

शोधकर्ताओं ने एक्रोस्टिक्स नामक नेमाटोड (सूत्रकृमि) समूह की तीन नई प्रजातियों की खोज की है। इनमें बाइफर्केटेड, इरेक्टोडेंटैटस और मोनोडेल्फ़िस शामिल हैं। यह खोज मिट्टी की जैव विविधता और सूक्ष्म पारिस्थितिकी को समझने की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

Three new species of nematodes discovered at AMU
एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जंतु विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने सूत्रकृमि की तीन नई प्रजातियां खोजी हैं, जो मिट्टी को ताकत देंगी। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन का स्तर बढ़ेगा। तीनों प्रजातियां जंतु विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. कुदसिया तहसीन के निर्देशन में सबीहा मुमताज और नादिया सूफियान ने खोजी है।

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शोधकर्ताओं ने एक्रोस्टिक्स नामक नेमाटोड (सूत्रकृमि) समूह की तीन नई प्रजातियों की खोज की है। इनमें बाइफर्केटेड, इरेक्टोडेंटैटस और मोनोडेल्फ़िस शामिल हैं। यह खोज मिट्टी की जैव विविधता और सूक्ष्म पारिस्थितिकी को समझने की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने यह अध्ययन सड़े-गले जैविक पदार्थों और अन्य सैप्रोबिक हेबिटेट यानी अपघटन वाले स्थानों पर किया। यहां से एक्रोस्टिक्स वंश की पांच अलग-अलग आबादियां एकत्र की गईं। गहन अध्ययन के बाद इनमें तीन नई और दो पहले से ज्ञात प्रजातियों की पहचान हुई। वैज्ञानिकों ने इन सूक्ष्म जीवों की संरचना को समझने के लिए स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (एसईएम) तकनीक का उपयोग किया। इससे बेहद छोटे अंगों और बाहरी संरचनाओं की साफ तस्वीरें प्राप्त हुईं।
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एएमयू के वैज्ञानिकों ने सूत्रकृमि की तीन नई प्रजातियां खोजी हैं। यह प्रजातियां मिट्टी में ताकत पैदा करेगी। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ेगा।-प्रो. कुदसिया तहसीन, अध्यक्ष, जंतु विज्ञान विभाग, एएमयू

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ये होते हैं नेमाटोड
नेमाटोड बेहद छोटे, धागेनुमा जीव होते हैं, जो मिट्टी, पानी और जैविक कचरे में पाए जाते हैं। डिप्लोगैस्ट्रेड परिवार के ये जीव मुख्य रूप से बैक्टीरिया खाने वाले या दूसरे सूक्ष्म जीवों का शिकार करने वाले होते हैं। कई बार ये कीड़ों के साथ भी जुड़े पाए जाते हैं। ये जीव मिट्टी में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और जैविक पदार्थों के अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नई प्रजातियों की विशेषताएं
बाइफर्केटेड : इस नई प्रजाति की सबसे खास पहचान इसके दो शाखाओं में विभाजित स्पिक्यूल (कुछ कीड़ों में पाई जाने वाली सुई जैसी छोटी संरचना) हैं। इसके अलावा इसमें पंख जैसी संरचना वाला गवर्नाकुलम पाया गया।
इरेक्टोडेंटैटस : इस प्रजाति के मुंह के भीतर लंबा और सीधा दांतनुमा भाग पाया गया, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाता है। इसके नर जनन अंगों की बनावट भी विशेष पाई गई।
मोनोडेल्फ़िस : यह प्रजाति मजबूत शरीर वाली है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका एकल प्रजनन तंत्र है। इसके अलावा इसमें बड़ा रिसेप्टेकुलम सेमिनिस पाया गया, जो प्रजनन प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण अंग है।

ये शोध मिट्टी के लिए अहम
मिट्टी की जैव विविधता को समझने में यह शोध अहम है। धरती के नीचे मौजूद सूक्ष्म जीवों की दुनिया का बड़ा हिस्सा अभी भी अनजाना है। ऐसे अध्ययन न केवल नई प्रजातियों की खोज करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि मिट्टी का पारिस्थितिकी तंत्र किस तरह संतुलित रहता है।

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