Prayagraj : दो भागों में बंटी बच्ची की रीढ़ की हड्डी का एसआरएन अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन
तीन वर्षीय बच्ची की दो भागों में बंटी रीढ़ की हड्डी (स्प्लिट कॉर्ड मालफॉर्मेशन) का स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने सफल ऑपरेशन किया। करीब छह दिन बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
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तीन वर्षीय बच्ची की दो भागों में बंटी रीढ़ की हड्डी (स्प्लिट कॉर्ड मालफॉर्मेशन) का स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने सफल ऑपरेशन किया। करीब छह दिन बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। चिकित्सकों का कहना है कि यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो पांच हजार में किसी एक बच्चे को होती है। मिर्जापुर की तीन वर्षीय बच्ची की रीढ़ की नस में जन्म से गांठ की समस्या थी, जिसका एक ऑपरेशन बचपन में हो चुका है। मगर यह ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। इसकी वजह से बच्ची की स्पाइनल कॉर्ड की हड्डी अतिवृद्धि के कारण दो भागों में बंट गई, जिससे उसके दोनों पैर कमजोर हो गए।
एसआरएन अस्पताल में एमआरआई की जांच के बाद इस समस्या की पुष्टि हुई। न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती। पहले सावधानीपूर्वक बीच की हड्डी को माइक्रो ड्रिल से हटाया गया और फिर विभाजित नसों को मध्य में संगठित करके एकल स्पाइनल कॉर्ड का पुनर्निर्माण किया गया। मरीज की बची हुई हड्डियों से नस के ऊपर रीढ़ की हड्डी का भी पुनर्निर्माण किया गया।
यह है स्प्लिट कॉर्ड मालफॉर्मेशन
स्प्लिट कॉर्ड मालफॉर्मेशन (एससीएम) एक दुर्लभ जन्मजात रीढ़ की हड्डी का विकार है, जिसमें रीढ़ की हड्डी आंशिक रूप से दो भागों में विभाजित हो जाती है। इसे डायस्टेमाटोमाइलिया या डिप्लोमाइलिया भी कहा जाता है। इसमें अक्सर एक अस्थि या रेशेदार ऊतक रीढ़ की हड्डी को दो हिस्सों में बांटता है, जिससे पैरों में कमजोरी, चलने में दिक्कत और मूत्राशय की समस्या हो सकती है।
लक्षण
1- पीठ के निचले हिस्से में त्वचा पर बाल, निशान या गांठ (डर्मल साइनस)।
2- पैरों की लंबाई में अंतर या कमजोरी (पैरापेरेसिस)।
3- चलने-फिरने में कठिनाई और पैरों में सुन्नता।
4- मूत्राशय और आंतों का नियंत्रण खोना (मूत्राशय असंयम)।
5- स्कॉलिओसिस (रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना)।
यह एक जटिल ऑपरेशन है, जिसमें पूरी सावधानी बरतनी पड़ती है। इसका पता एमआरआई या सीटी स्कैन से चलता है। उपचार के लिए सर्जरी (शंटिंग या सेप्टम को हटाना) ही एकमात्र विकल्प है, खासकर अगर लक्षण बढ़ रहे हों। - डॉ. पंकज गुप्ता, न्यूरो सर्जन, न्यूरो सर्जरी विभाग, एसआरएन अस्पताल