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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court displeased over attempt to reach a judge; calls it a 'black day' in the court's history.

High Court : कोडीन कफ सिरप केस में जज को प्रभावित करने की कोशिश, खुद सुनवाई से हटे, इतिहास का काला दिन बताया

Fri, 31 Jul 2026 12:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Jul 2026 12:31 PM IST
सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन कफ सिरप मामले में लंबित जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश तक निजी तौर पर पहुंचने की कोशिश पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने इसे न्यायालय के इतिहास का 'काला दिन' बताते हुए कहा कि लंबित मामले को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इसके बाद उन्होंने 74 जमानत याचिकाओं की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया और मामलों को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का आदेश दिया

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Allahabad High Court displeased over attempt to reach a judge; calls it a 'black day' in the court's history.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोडीन कफ सिरप मामले से जुड़ी 74 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही एकल पीठ के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने खुद को इससे अलग कर लिया है। सुनवाई के दाैरान उन्होंने बेहद कड़ी टिप्पणी की है। कहा कि लंबित मामले को प्रभावित करने या न्यायाधीश तक पहुंच बनाने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने इसे न्यायालय के इतिहास का काला दिन करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सभी मामलों को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेजने का आदेश दिया। यह आदेश उन्होंने भोला प्रसाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दाैरान दिया है।

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कोर्ट ने आदेश में कहा कि न्याय व्यवस्था की पूरी नींव इस विश्वास पर टिकी है कि न्याय निष्पक्ष, निर्भीक और किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त होकर दिया जाता है। यदि कोई पक्षकार या उससे जुड़ा व्यक्ति न्यायाधीश तक पहुंचने या निजी तौर पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास करता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और कानून के शासन पर सीधा प्रहार है।
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अदालत ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी। आदेश पारित किया जाना था। इसी दौरान संबंधित पक्षों की ओर से पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंचने के प्रयास किए गए। ऐसे आचरण को नजरअंदाज किया गया तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा। यह संदेश जाएगा कि न्यायिक आदेशों को प्रभावित किया जा सकता है।

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फैसला चाहे जो होता पर संदेह बना रहता

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में भले ही फैसला पूरी तरह कानूनी और तथ्यों पर आधारित होता, फिर भी उसके बारे में यह संदेह पैदा होता कि निर्णय बाहरी प्रभाव का परिणाम है। कोर्ट ने कहा कि किसी लंबित मामले में न्यायाधीश से न्यायालय के बाहर संपर्क स्थापित करने का प्रयास न्यायिक मर्यादा, अधिवक्ता आचार संहिता और सांविधानिक मूल्यों के विपरीत है। ऐसे व्यवहार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया कि सभी जमानत याचिकाएं और उससे संबद्ध अन्य मामलों को किसी अन्य पीठ के समक्ष 7 अगस्त 2026 को सूचीबद्ध किया जाए।

मुख्य बातें और घटनाक्रम

मामला: एक याचिका और कई जमानत अर्जियों की सुनवाई के दौरान पक्षकारों की ओर से अदालत के बाहर जज से निजी तौर पर संपर्क करने की कोशिश की गई।

अदालत की प्रतिक्रिया:  इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने खुद को उन मामलों की सुनवाई से अलग कर लिया।

कड़ी टिप्पणी: उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के कृत्य न्यायिक स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा हैं। मामलों की फाइलों को नए सिरे से आवंटन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

कोडीन कफ सिरप मामले में कई जिलों में दर्ज हैं प्राथमिकी

कोडीन कफ सिरप मामले में कई जिलों में प्राथमिकी दर्ज हैं। जमानत के लिए कई याचिकाएं कोर्ट में दाखिल हैं। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल फरार चल रहा है। उसके पिता भोला प्रसाद की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ सुनवाई कर रही थी। बता दें कि शुभम जायसवाल और अन्य आरोपियों की एफआईआर रद्द करने की याचिकाएं दिसंबर 2025 में खारिज हो चुकी हैं। हाई प्रोफाइल मामले में अब तक 50 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एसटीएफ और ईडी पूरे सिंडिकेट, फर्जी दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

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