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UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी, पत्नी की करतूत से यदि पति कमाने में असमर्थ तो वह गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विकास कुमार Updated Sat, 24 Jan 2026 08:55 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी की करतूत या कार्यों से उसका पति कमाने में अक्षम हो जाता है तो वह उससे गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती। 

Allahabad High Court remarked if husband unable earn due to wifes actions then she cannot ask for maintenance
Allahabad High Court - फोटो : एएनआई
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी की करतूत या कार्यों से उसका पति कमाने में अक्षम हो जाता है तो वह उससे गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती। जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ला ने इस टिप्पणी के साथ विनिता नाम की एक महिला की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, जिसने अपने पति से गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी। 

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हाईकोर्ट ने कुशीनगर की परिवार अदालत के निर्णय को सही करार दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने पत्नी के गुजारा भत्ता के आवेदन को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि इस तरह के परिदृश्य में गुजारा भत्ता का आदेश देना भारी अन्याय होगा खासकर तब जब पत्नी के परिवार वालों के आपराधिक कृत्य से पति के कमाने की क्षमता बर्बाद हो गई। 

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पत्नी की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, जहां भारतीय समाज आमतौर पर एक पति से काम करने और अपने परिवार का भरण पोषण करने की अपेक्षा रखता है, इस मामले ने अनूठी परिस्थितियां प्रस्तुत की हैं। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि पति की शारीरिक अक्षमता को लेकर कोई विवाद नहीं है और इसकी वजह उसकी पत्नी के परिवार वाले हैं।

क्या है मामला
तथ्यों के मुताबिक, पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. वेद प्रकाश सिंह पूर्व में गुजारा भत्ता देने में सक्षम थे। हालांकि, उनके साले और ससुर ने क्लिनिक में एक झगड़े के दौरान उन्हें गोली मार दी जिसमें एक गोली उनकी रीढ़ में फंसी रह गई। गोली निकालने के लिए जरूरी सर्जरी से उन्हें लकवा मारने का अत्यधिक जोखिम था। वह आराम से बैठने में असमर्थ हो गए। कुशीनगर की परिवार अदालत ने 7 मई, 2025 को अंतरिम गुजारा भत्ता के लिए पत्नी का आवेदन खारिज कर दिया था।

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