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Assistant Professor : 16 व 17 अप्रैल को प्रदेश के 52 केंद्रों में हुई थी परीक्षा, 82876 अभ्यर्थी थे पंजीकृत

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Jan 2026 01:19 PM IST
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सार

UPPSC Assistant Professor News : शासन ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया है। परीक्षा की शुचिता और स्वच्छता पर सवाल उठने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि परीक्षा को निरस्त किया जा सकता है। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने भी आपत्ति जताई है और सरकार से निर्णय वापस लेने का आग्रह किया है। 

Assistant Professor: The examination was held on April 16 and 17 at 52 centers in the state
यूपीपीएससी, UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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तीन साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती के लिए 16 व 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। अपने गठन के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग पहली परीक्षा कराई थी। परीक्षा के लिए छह जिलों में कुल 52 केंद्र बनाए गए थे। प्रयागराज, मेरठ व गोरखपुर में 10-10 केंद्र, लखनऊ में नौ, वाराणसी में सात एवं आगरा में छह केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों में परीक्षा के लिए 82,876 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा दो पालियों में सुबह 9:30 से 11:30 बजे व अपराह्न 2:30 से 4:30 बजे तक आयोजित की गई थी।

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हालांकि, परीक्षा के तुरंत बाद ही पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे थे। लिखित परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में आ गई। अभ्यर्थियों के विरोध के बावजूद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अक्तूबर में इंटरव्यू कराने की घोषणा कर दी थी लेकिन विवाद बढ़ने पर तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीति पांडेय ने आयोग की बैठक कर परीक्षा स्थगित कर दी और कुछ दिनों बाद प्रो. कीर्ति पांडेय ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया।

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अभ्यर्थियों ने इन मुद्दों पर उठाए थे सवाल

रेंडमाइजेशन का न होना - असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में रेंडमाइजेशन का न होना सबसे बड़ा सवाल बना। भर्तियों में सेटिंग का आरोप लगता रहा है कि नकल माफिया एक साथ फार्म भरकर एक साथ रोल नंबर आवंटित करा लेते हैं और उसमें अलग-अलग सॉल्वर को बैठाकर पैसा लेकर लोगों को पास कराते हैं। बावजूद इसके इस परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना बड़ा मुद्दा बना।

सीसीटीवी कैमरे का न होना- इस भर्ती परीक्षा में आयोग ने भ्रष्टाचार और नकल को रोकने के लिए न सिर्फ सीसीटीवी कैमरे को सभी केंद्र पर अनिवार्य माना था बल्कि इस परीक्षा के दौरान ड्रोन कैमरे से नकल रोकने की बात कही थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे पर्याप्त संख्या में नहीं थी, जिससे नकल विहीन परीक्षा के दावे कोरे साबित हुए।

परीक्षा केंद्र पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता- आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता लागू की थी लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई सेंटरों में इस मानक का पालन नहीं किया गया और निर्धारित समय के बाद आने वालों को भी केंद्र में प्रवेश दिया गया। इससे परीक्षा में बराबरी और नकल रोकने की प्रतिबद्धता घटी।

आयोग के आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका- एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया, जिस पर गंभीर आरोप लगे कि वह परीक्षा में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था। यह गिरफ्तारी भी परीक्षा संपन्न होने के बाद हुई, जिससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि परीक्षा के पहले वह कई अभ्यर्थियों को पहले ही अनुचित लाभ दे चुका होगा।

हिंदी विषय में सिलेबस से बाहर के प्रश्न - अभ्यर्थियों का दावा था कि हिंदी विषय की परीक्षा में घोषित सिलेबस से बाहर के साथ-साथ एक कुंजी गाइड से अधिकतम हल्के प्रश्न पूछे गए। इससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और उनकी परीक्षा प्रभावित हुई। अभ्यर्थियों ने कहा कि यह आयोग की लापरवाही और दिशानिर्देशों के उल्लंघन का उदाहरण है।

सामान्य अध्ययन में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न- अभ्यर्थियों का दावा था कि सामान्य अध्ययन विषय के घोषित सिलेबस में केवल आधिनुक इतिहास का उल्लेख किया गया था लेकिन वास्तविक परीक्षा में प्राचीन इतिहास से भी प्रश्न पूछे गए। यह सिलेबस के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण है और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारी की थी।

अभ्यर्थियों ने 25 अप्रैल से ही शुरू कर दिया था आंदोलन

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में भ्रष्टाचार व अपारदर्शिता के चलते परीक्षा रद्द की मांग पर इंकलाबी नौजवान सभा आरवाईए के नेतृत्व में आंदोलन 25 अप्रैल 2025 को शुरू किया गया और आयोग पर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद एक मई को प्रदर्शन हुआ और आरवाईए के प्रतिनिधि मंडल की आयोग के सचिव मनोज कुमार से वार्ता हुई। इसके बाद आयोग पर कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया।

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