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High Court : आदेशों के अनुपालन में हीलाहवाली पर तय हो अफसरों की आपराधिक जवाबदेही

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 05 Jun 2026 04:10 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की विवेचना में सुस्ती और निगरानी में हीलाहवाली पर अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। कहा कि अपने असीमित विवेकाधिकार और शक्तियों के प्रयोग में कंजूसी कर अधिकारी लालफीताशाही को बढ़ावा दे रहे हैं।

Criminal liability of officers should be fixed for laxity in complying with orders.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की विवेचना में सुस्ती और निगरानी में हीलाहवाली पर अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। कहा कि अपने असीमित विवेकाधिकार और शक्तियों के प्रयोग में कंजूसी कर अधिकारी लालफीताशाही को बढ़ावा दे रहे हैं। अब समय आ गया है कि अदालती आदेशों के प्रति लापरवाही के लिए छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने के बजाए बड़े अफसरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए, ताकि उनकी जवाबदेही तय हो सके।

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इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने अवनेश कुमार अग्रवाल की याचिका पर निस्तारित करते हुए बरेली की विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिये याची के पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग खारिज कर दी गई थी। साथ ही क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को पासपोर्ट नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।
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2007 में बिजनौर में याची के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ीं दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों पर भ्रष्टाचार, जालसाजी और सरकारी अभिलेख नष्ट करने के आरोप लगाए गए थे। एक मामले में 18 साल बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया, जबकि दूसरे की जांच लंबित है। मामले में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई है।

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कोर्ट ने पाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए मनीष कुमार सिंह के केस में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकारियों को समिति गठित करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुपालन में समिति का गठन दो साल की देरी से हुआ पर उसकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं दिखा। कोर्ट ने समिति की सक्रियता और कार्य प्रगति की रिपोर्ट तलब की। तीन दिसंबर 2025 से अब तक आठ तारीखें लगीं, अपर महाधिवक्ता ने अदालत को मांगी गई जानकारी मुहैया कराने का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद महीनों बाद फैसला सुनाने की तारीख तक अफसर जानकारी नहीं दे सके।

अफसरों की कार्यसंस्कृति पर सीएम दें ध्यान

कोर्ट ने कहा कि सीएम को इस आदेश की प्रति पहुंचाई जाए, ताकि वे ध्यान दें कि बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी अफसर अदालत को अंधेरे में रखने की कोशिश करते है। लिहाजा, अफसरों की इस कार्यसंस्कृति की जानकारी सीएम तक पहुंचाई जानी चाहिए। ताकि, सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ बनाई नीति पर अफसरों की लापरवाही पर लगाम लगाई जा सके।

जानकारी नहीं मिलने पर कोर्ट ने जताया दुःख

उच्च स्तरीय निगरानी समिति की प्रगति रिपोर्ट पर मांगी गई जानकारी अदालत को नहीं दी गई। इस पर कोर्ट ने दुख जताया। कहा कि फरवरी 2026 में फैसला सुरक्षित रखने के बाद कोर्ट ने तीन महीने तक इंतजार किया कि हाई-पावर्ड कमेटी अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी। फैसला सुनाने से दो दिन पहले भी सरकारी वकीलों से संपर्क किया गया पर कोर्ट को कोई जानकारी नहीं दी गई।

मनीष कुमार सिंह मामले में क्या थे दिशा निर्देश

2023 में मनीष कुमार सिंह के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने राज्य सरकार को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों की समयबद्ध जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी बनाने और दिशानिर्देश तय करने का आदेश दिया था।
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