Prayagraj Murder Case : कॉल डिटेल और सीसीटीवी साबित हुए अहम, आखिरी बातचीत से बढ़ा शक
वैश्य परिवार हत्याकांड के खुलासे में सीसीटीवी फुटेज और कॉल डीटेल अहम साबित हुए। अभिषेक वैश्य और आरोपी शनि गुप्ता के बीच लगातार फोन पर हुई बातचीत ने पुलिस को सीधे हत्यारोपी तक पहुंचा दिया।
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वैश्य परिवार हत्याकांड के खुलासे में सीसीटीवी फुटेज और कॉल डीटेल अहम साबित हुए। अभिषेक वैश्य और आरोपी शनि गुप्ता के बीच लगातार फोन पर हुई बातचीत ने पुलिस को सीधे हत्यारोपी तक पहुंचा दिया। वारदात से एक सप्ताह के भीतर अभिषेक और शनि के बीच 15 से अधिक बार बातचीत हुई थी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद जब चारों शव बरामद हुए तो शुरुआती जांच में परिवार के भीतर विवाद, संपत्ति संबंधी मतभेद और कारोबारी रंजिश समेत कई बिंदु शामिल किए गए। इसी दौरान जांच टीम ने मृतक अभिषेक वैश्य के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकलवाई। मोबाइल की तकनीकी जांच में एक ऐसा नंबर सामने आया जिस पर अभिषेक लगातार संपर्क में था। आखिरी बार भी इसी नंबर से अभिषेक की बात हुई थी।
नंबर को खंगालने पर पता चला कि वारदात से पहले एक सप्ताह से अभिषेक और उस नंबर के बीच कई बार बातचीत हुई थी। घटना वाले दिन और उससे ठीक पहले भी दोनों कई बार संपर्क में थे। घटनाक्रम के समय को देखते हुए जांच टीम को इस नंबर पर संदेह हुआ। नंबर की पड़ताल की गई तो वह शनि गुप्ता के नाम पर पंजीकृत निकला। इसके बाद पुलिस ने शनि के बारे में स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई।
जांच में सामने आया कि शनि गुप्ता वीरेंद्र वैश्य की मार्केट के पास समोसे-कचौड़ी की दुकान चलाता था। उसकी अभिषेक से दोस्ती थी। दोनों अक्सर एक-दूसरे की दुकानों पर बैठते थे और शराब भी पीते थे।
एक तस्वीर ने खोल दिया पूरा राज
डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की तो सोमवार सुबह पांच बजे एक व्यक्ति मकान से बाहर निकलता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों से उसकी पहचान कराई गई तो उन्होंने उसे शनि गुप्ता बताया। इससे पुलिस का संदेह और गहरा हो गया। तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शनि को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। साक्ष्य सामने रखे गए तो उसके जवाब उलझने लगे। थोड़ी ही देर में उसने हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने की पूरी कहानी कबूल कर ली।