High Court : स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह का निर्णय लेना सांविधानिक अधिकार, सगी बहनों की याचिका पर फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी दबाव या लालच के बालिग स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह का निर्णय लेता है तो यह उसका सांविधानिक अधिकार है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी दबाव या लालच के बालिग स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह का निर्णय लेता है तो यह उसका सांविधानिक अधिकार है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने आगरा निवासी सगी बहनों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर की। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर छह अगस्त को दोनों को पेश करने का आदेश दिया है।
याचिका में दोनों बहनों ने कहा कि उन्होंने इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया है। साथ ही अपनी पसंद के व्यक्तियों से शादी करना चाहती हैं। आरोप है कि पिता ने इसका विरोध कर झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। साथ ही पुलिस से मिलीभगत कर उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा है।
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों लड़कियां बालिग हैं। उन्हें अपनी आस्था, विवाह, निवास और भविष्य से जुड़े निर्णय स्वयं लेने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में कोर्ट का पहला दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से निर्णय ले रहा है या किसी प्रकार की अवैध हिरासत में है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को आदेश दिया है कि दोनों को छह अगस्त को समक्ष पेश किया जाए, ताकि बातचीत कर उनकी इच्छा और वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके। यह भी कहा है कि यदि निर्धारित तिथि पर दोनों को पेश नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर कारण बताना होगा।