सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Doctors handwriting game on prescriptions Pharmacists at Jan Aushadhi Centres fail to read the names

Prayagraj: पर्चे पर डाॅक्टरों की लिखावट का खेल, जन औषधि केंद्रों के फार्मासिस्ट दवाओं के नाम पढ़ने में ही फेल

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 09 Mar 2026 03:01 PM IST
विज्ञापन
सार

जरूरतमंदों को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के सरकार के तमाम प्रयासों पर कई सरकारी डॉक्टरों, दवा कंपनियों व निजी मेडिकल स्टोर संचालकों की मिलीभगत भारी पड़ रही है।

Doctors handwriting game on prescriptions Pharmacists at Jan Aushadhi Centres fail to read the names
चिकित्सक की ओर से लिखा गया पर्चा। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

जरूरतमंदों को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के सरकार के तमाम प्रयासों पर कई सरकारी डॉक्टरों, दवा कंपनियों व निजी मेडिकल स्टोर संचालकों की मिलीभगत भारी पड़ रही है। शासन ने सरकारी अस्पतालों में बाहरी दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर सख्त रुख अपनाया तो कई ने पर्चे पर लिखावट में ही खेल शुरू कर दिया। इनकी लिखावट ऐसी कि जिसे पढ़ने में सस्ती दवा देने वाले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के फार्मासिस्ट फेल हो जा रहे हैं। जबकि निजी मेडिकल स्टोर संचालक धड़ाधड़ दवाएं निकालकर थमा देते हैं। यह सब कुछ आर्थिक हित साधने के चक्कर में हो रहा है।

Trending Videos


स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन), मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) और तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) के कई चिकित्सकों पर आरोप है कि वे पर्चे पर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के फार्मासिस्ट को समझ में ही नहीं आती हैं। इससे मरीजों व तीमारदारों को पर्चा लेकर लौटना पड़ जाता है। फिर, महंगी दवाएं खरीदने के अलावा इनके पास दूसरा रास्ता नहीं बचता।
विज्ञापन
विज्ञापन


दवा कंपनियों व निजी मेडिकल स्टोर संचालकों से सेटिंग का यह खेल धड़ल्ले से खेला जा रहा है। इसमें सबसे अधिक मार आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रही है। मकड़जाल में उलझकर ये सस्ती दवाओं से वंचित हो जा रहे हैं। निजी मेडिकल स्टोरों से दवाएं लेने का दबाव बनाने के लिए डॉक्टर तरह-तरह की कोशिशें जारी रखे हैं।

अलग रंग की होगी जन औषधि केंद्र की पर्ची

अमर उजाला में दवा की छोटी पर्ची से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद कॉल्विन अस्पताल में जन औषधि केंद्र के लिए अलग रंग की पर्ची का निर्णय लिया गया है। ऐसे में जो दवाएं अस्पताल के औषधि भंडार में उपलब्ध नहीं होंगी, संबंधित चिकित्सक की तरफ से इसी अलग रंग की पर्ची पर लिखी जाएंगी। ऐसा करना अनिवार्य होगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पर्ची का रंग जल्द तय कर दिया जाएगा। वहीं, जन औषधि केंद्र संचालकों के लिए दवा का बिल देना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

सभी चिकित्सकों को बाहरी दवाएं न लिखने को लेकर नोटिस जारी किया गया है। फिर भी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी मरीज व तीमारदार को कोई परेशानी है तो वह सीधे संपर्क करे, तत्काल कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल

हर 15 दिनों में नोटिस जारी करके बाहरी दवाएं न लिखने के लिए हिदायत दी जाती है। इसके बावजूद अगर किसी विभाग के चिकित्सक पर आरोप लगता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. भावना शर्मा, सीएमएस, बेली अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed